तारीख- 11 मई। जगह- सीतापुर का पाल्हापुर गांव। यहां दो मंजिला कोठी में एक ही परिवार के 6 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
उस समय घर में मौजूद 7 लोगों में सिर्फ अजीत सिंह बचा था। अजीत के भाई अनुराग, भाभी प्रियंका, भतीजी अरवा (12), अरवी (8), भतीजे आद्विक (5) और मां सावित्री देवी की हत्या की गई थी।
उस रात क्या हुआ था, घर में इकलौते बचे अजीत सिंह को ही सब कुछ पता था। उसी की बात को पहले पुलिस ने थ्योरी मान लिया कि अनुराग ने शराब के नशे और गुस्से में आकर पूरे परिवार को खत्म कर दिया। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अजीत के अलग-अलग बयानों ने हत्याकांड का सच खोल दिया।
आखिर अजीत ने भाई के परिवार और अपनी मां की हत्या क्यों कर दी? उसने अकेले कैसे इतने बड़े हत्याकांड को अंजाम दे दिया। दैनिक भास्कर की टीम लखनऊ से 70 किलोमीटर दूर स्थित गांव पहुंची। टीम ने इस केस की इन्वेस्टिगेशन कर रहे पुलिस अफसरों, रिश्तेदारों और गांववालों से बात की, जो सच निकलकर आया वह चौंकाने वाला था। दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए आधी रात को हुए घटनाक्रम का सच…
जांच टीम में शामिल एक पुलिस अफसर के मुताबिक- 13 मई को सीतापुर में वोटिंग थी। अनुराग के भाई अजीत को खबर थी कि बड़ा भाई अनुराग परिवार के साथ गांव वोटिंग करने के लिए आएगा, क्योंकि शनिवार-रविवार पड़ रहा था।
अनुराग के परिवार के आने से पहले अजीत पत्नी और बच्चों को अपने ससुराल लखनऊ के चिनहट छोड़कर गांव आ गया। शाम को जब अनुराग शराब पीकर आया, तो दोनों भाइयों के बीच कहासुनी हुई। इस झगड़े के बाद सभी खाना खाकर अपने-अपने कमरों में सो गए।
रात 2 बजे घर की बिजली काटी
नीचे के एक कमरे में मां सावित्री और दूसरे कमरे में अनुराग सो गए। घर की ऊपरी मंजिल पर एक कमरे में प्रियंका बच्चों के साथ सो गई, जबकि सामने वाले कमरे में अजीत था। अजीत ने रात 2 बजे के आसपास घर की बिजली काट दी।
कमरों में एयरकंडीशन लगा है, लेकिन गर्मी बहुत थी। इसके चलते प्रियंका कमरे से बाहर आ आई। वह बरामदे में पड़ी चारपाई पर बैठ गई। अचानक अंधेरे में उसके सामने अजीत आ गया। वह लोन जमा करने को लेकर बात करने लगा।
प्रियंका से कहासुनी की, फिर हथौड़े से हमला
दोनों में कहासुनी शुरू हो गई। इस पर अजीत ने हथौड़े से प्रियंका के सिर पर वार कर दिया। प्रियंका खून से लहूलुहान होकर चारपाई पर गिर गई। शोर मचाने की कोशिश की, लेकिन अजीत ने तमंचे से प्रियंका के सिर में गोली मार दी।
भाग जा तू जानता नहीं क्या कर दिया है…
अनुराग नशे में था, लेकिन मां सावित्री गोली की आवाज सुनकर ऊपर आ गई। उन्होंने प्रियंका को खून से सना हुआ और पास खड़े अजीत को देखा। उसके कपड़ों पर खून लगा था। मां को एहसास हो गया कि अजीत ने बहू की हत्या कर दी। उन्होंने अजीत से कहा- तू भाग जा, तू जानता नहीं, क्या कर दिया है? लेकिन अजीत के सिर पर खून सवार था।
मां की बात अनसुनी कर दी। उसने कहा- तू भी अनुराग का साथ देती है। फिर मां के सिर पर भी हथौड़े से वार कर दिया। मां सावित्री के सिर से खून निकलने लगा। वह साड़ी से अपना खून रोकते हुए नीचे आ गईं। पीछे-पीछे अजीत भी नीचे आ गया। उसने देखा कि मां सावित्री जिंदा हैं, तो उसने उनके सिर पर फिर से वार कर दिया। मौके पर ही मौत हो गई।
नीचे के कमरे में अनुराग लेटा था, लेकिन उसका कमरा नहीं बंद था। दरवाजा खोलकर अजीत ने अनुराग के सिर में गोली मार दी। फिर अजीत ऊपर गया। बच्चे जाग गए थे। उसने सबसे पहले बड़ी बेटी अरना (12) को बुलाया और कमरा बंद कर दिया। फिर नीचे लाकर अरना को अनुराग के कमरे में ले गया।
बड़ी बेटी का पैर तोड़ा, छत से फेंका
अरना के सिर में गोली मारी, लेकिन निशाना मिस हो गया। गोली मृत पड़े अनुराग के सिर में लग गई। अरना ने विरोध किया, तो उसे हथौड़े से मारा। फिर गोली मारी। छत पर उसे उठाकर ले गया। वहां उसकी टांग तोड़ दी, जब वह बेसुध हो गई, तो छत से नीचे फेंक दिया।
फिर अजीत ने हर सबूत खत्म करने की प्लानिंग कर ली थी। अनुराग की छोटी बेटी अरवी (8) और बेटे आद्विक (5) के सिर पर हथौड़े से वार किए। फिर दोनों को छत से नीचे फेंक दिया। बच्चे मर गए या नहीं, यह जांचने के लिए वह बाहर भी आया। फिर बच्चों के सिर पर हथौड़े से वार किए, ताकि वह सभी मर जाएं। उसने लगभग डेढ़ घंटे में हत्याकांड को अंजाम दिया।
कपड़ों से खून के धब्बों को मिटाने की भी हुई कोशिश
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अजीत ने सबको मारने के बाद अपने कपड़ों लगे खून के धब्बों को धोने का भी प्रयास किया। पुलिस को घर में बने बाथरूम में बाल्टी में खून से सना पानी मिला। इस बाल्टी में अजीत ने हाथ और कपड़ों को धोने की कोशिश की थी।
इसके बाद उसने कपड़े बदल दिए। वह घर से बाहर आकर खड़ा हो गया। इसी बीच उसकी ताई घर से बाहर निकली, तो वह चिल्लाने लगा कि सब खत्म हो गया, अनुराग ने सबको मार डाला। फिर आस-पास के लोग इकट्ठा होना शुरू हो गए।
उस समय अरवी और आद्विक की सांसें चल रही थीं। गांव वालों ने जब अजीत से कार की चाभी मांगी तो वह बहस करने लगा। दूसरी गाड़ी से दोनों बच्चों को अस्पताल लेकर निकले, लेकिन बच्ची की मौत रास्ते में हो गई। वहीं, आद्विक ने लखनऊ के अस्पताल में दम तोड़ दिया।
6 हत्याओं के पीछे की वजह क्या है?
जांच टीम में शामिल एक पुलिस अफसर ने बताया कि अनुराग के पिता ने बैंक से किसान क्रेडिट पर 24 लाख रुपए लोन लिया था। 16 लाख पिता और 8 लाख मां के नाम पर लोन था। यह लोन खेती के लिए लिया गया था। पिता की मौत के बाद अनुराग ने खेत में तैयार करीब 40 लाख की फसल बेच दी, लेकिन बैंक का लोन जमा नहीं किया।
पिता की मौत के बाद पूरी खेती दोनों भाइयों और मां के नाम पर आ गई, जिससे लोन भी सभी के नाम ट्रांसफर हो गया। यही बात अजीत को अखरने लगी। वह बार-बार भाई से लोन जमा करने को कहता, लेकिन अनुराग आनाकानी करने लगा। कई बार उसने लोन के लिए भाभी और मां से भी बात की। मगर कोई भी हल नहीं निकला।
अजीत की इनकम सीमित, जबकि अनुराग की कमाई लाखों में
पुलिस ऑफिसर ने बताया- छोटे भाई अजीत की इनकम सीमित थी। टीचर की नौकरी में व्यस्तता के कारण वह अपने हिस्से की जमीन में ढंग से खेती भी नहीं कर पाता था। दूसरी ओर उसे हार्ट से जुड़ी बीमारी भी थी। इसमें हर महीने काफी रुपए खर्च हो रहे थे। सीतापुर के महमूदाबाद में हाल ही में उसने लोन लेकर घर बनवाया था, जिसकी EMI भी भर रहा था।
दो बेटियों की पढ़ाई से लेकर घर के सभी खर्च उसकी सैलरी पर ही निर्भर था। इसके बाद पिता का लोन। अब वह आर्थिक रूप से परेशान था। दूसरी ओर अनुराग की खेती से लाखों की इनकम, उसकी पत्नी की अच्छी नौकरी थी। ये सब भी उसे अखरने लगी। उसके बार-बार कहने के बाद भी अनुराग लोन नहीं चुका रहा था।
इसे लेकर आए दिन विवाद भी होता रहता था। अजीत इन सबके लिए अपनी भाभी प्रियंका को भी दोषी मानता था। उसका मानना था कि भाभी ही अनुराग को लोन न जमा करने के लिए उकसाती थी।
गांववालों ने क्या देखा और सुना
गांव में घुसते ही पहली मुलाकात भानु प्रताप सिंह से हुई। भानु बताते हैं- घटना वाली सुबह 5 बजे हमारे भाई प्रभाकर को लखनऊ से बड़े भैया (मृतक अनुराग के ताऊ के बड़े बेटे आशुतोष) का फोन आया कि किसी का फोन नहीं मिल रहा है।
देखो घर में गोली चल रही है। अनुराग सबको मार रहा है। हम लोग भागते दौड़ते चिल्लाते हुए पहुंचे। पीछे-पीछे जिसने आवाज सुनी, वह लोग भी मौके पर पहुंचे। मौके पर मैंने देखा कि दो बच्चे मेरे भाइयों की गोद में थे। अस्पताल ले जाने के लिए अजीत गाड़ी नहीं दे रह था। उसकी लोगों से बहस हो रही थी।
भानु प्रताप सिंह से बातचीत के बाद जब भास्कर टीम आगे बढ़ी तो करीब 700 मीटर के बाद 2 बीघे का एक अहाता मिला, जो चारों तरफ से बाउंड्री वॉल से घिरा हुआ है। गेट से घुसते ही सबसे पहले अनुराग सिंह के ताऊ आरपी सिंह का घर बना हुआ है। उसी दीवार से सटा हुआ अनुराग का घर है।
अहाते में एक किनारे कृषि से जुड़े तमाम यंत्र पड़े हुए हैं। ताऊ के घर के सामने एक पुरानी सी जीप खड़ी हुई है। ताऊ के घर के बरामदे में कुछ रिश्तेदार बैठे मिले, जबकि घर में कुछ महिलाएं बैठी मिलीं। अनुराग के घर पर ताला लगा हुआ मिला।
वहां हमें पता चला कि अनुराग के छोटे भाई अजीत सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है, जबकि ताऊ आरपी सिंह और उनके 2 बेटों को पुलिस ने पूछताछ के नाम पर थाने में बिठा रखा है। अजीत की पत्नी विभा और उसके भाई को भी थाने में बिठा रखा है। हमारी बातचीत मृतक अनुराग की ताई अमरावती सिंह से हुई।
दरवाजा खोलते ही ताई से बोला अजीत- सब खत्म हो गया
अमरावती सिंह ने बताया-‘ सुबह 5 बजे उठकर मेरी घूमने की आदत है। वारदात वाले दिन मैंने जैसे ही घर का दरवाजा खोला, सामने अजीत खड़ा मिला। हड़बड़ाते हुए चिल्लाया- ताई जी, सब खत्म हो गया। अनुराग ने सभी को मार डाला।
मैं भाग कर वहां पहुंची, तो तीनों बच्चे जमीन पर लहूलुहान पड़े थे। तीनों बच्चों को देखते ही मैं बदहवास होकर गिर गई। इसी बीच शोर सुनकर आस-पास के लोग आ गए। मैंने एक लड़के को अपने घर के अंदर से पति को बुलाने के लिए कहा।’
पुलिस ने अजीत को हिरासत में ले लिया है, ऐसे में हमने ताई अमरावती से सवाल किया कि क्या अनुराग और अजीत के बीच कोई विवाद था? हालांकि, इस सवाल पर ताई ने चुप्पी साध ली।
गांव में पसरा सन्नाटा, हत्याकांड पर बोलने से ग्रामीणों का इनकार
इस सवाल के साथ जब हम गांव में घुमे तो लोग घटना की चर्चा तो करते दिखे, लेकिन कोई भी इस मसले पर बातचीत करने को तैयार नहीं था। सभी का कहना था- गांव के प्रभाकर ने अनुराग के बच्चों को अस्पताल ले जाने में मदद कर दी थी, लेकिन पुलिस उसे भी उठा ले गई।
ऐसे में कोई भी अब इस मसले पर ज्यादा बोलना नहीं चाहता था।
टीचर की गढ़ी कहानी में पुलिस भी आ गई
इधर, घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, तो अनुराग के छोटे भाई अजीत ने बताया था कि उसने किसी तरह खुद को कमरे में बंद कर जान बचाई। पुलिस ने भी शुरू में इसी कहानी को सच मान लिया।
11 मई की सुबह 9 बजे से पहले सीतापुर एसपी ने मामले का फौरी तौर पर खुलासा कर दिया। बताया कि अनुराग मानसिक रूप से विक्षिप्त था। शराब का आदि था। उसी ने शराब के नशे में अपने तीन बच्चों, पत्नी और मां को खत्म कर दिया। फिर उसने सुसाइड कर लिया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा- अनुराग की हत्या की गई
पुलिस ने मृतकों के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया था। रविवार को जब मृतकों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई, तो चौंकाने वाली बात सामने आई, जिससे गांव वालों के साथ-साथ पुलिस भी सकते में आ गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, अनुराग के सिर में 2 गोली लगी थी। उनके माथे पर हथौड़े से भी मारा गया।
अनुराग की पत्नी प्रियंका के सिर पर 1 गोली लगी। उसके चेहरे पर हथौड़े से 2 बार हमला किया गया। माथे पर गहरा घाव मिला। बुजुर्ग मां सावित्री के माथे पर दो बार हथौड़े से वार किया गया।
तीनों बच्चों के पैर टूटे, हाथ में फ्रैक्चर मिले
तेज हमले की वजह से सावित्री सिंह का माथा आगे से पूरा खुल गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में तीनों बच्चों के पैर टूटे मिले। उनके हाथ में भी फ्रैक्चर मिला। अनुराग की बड़ी बेटी अरना (12) के गले में गोली लगी है, जो सिर से बाहर निकल गई। उसके माथे पर हथौड़ा मारने का एक निशान भी था।
छोटी बेटी अरवी (8) और बेटे आद्विक (5) के सिर पर हथौड़े से 2-3 बार तेज हमला किया गया। अरना के सिर पर पीछे भी मारा गया। पीछे से उसका पूरा सिर खुला था। बेटे का माथा भी पूरा खुला था। उसके चेहरे पर भी हमला किया गया। बच्चों के शरीर पर चोट के भी कई निशान मिले।
अब जानिए अजीत कैसे शक के घेरे में आया
1.पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट- अजीत के बताया अनुसार अनुराग ने ही सबकी हत्या की थी। फिर खुद को गोली मारकर सुसाइड कर लिया, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में निकलकर आया कि अनुराग को दो गोली लगी थी। दूसरा-सिर पर हथौड़े के निशान थे। अगर कोई अपनी जान लेगा तो हथौड़े से अपने पर वार नहीं करेगा। दूसरा-दो नहीं, सिर में एक ही गोली मार पाएगा।
2.कार की चाभी नहीं दी- भतीजी अरवी और भतीजे आद्विक खून से लथपथ तड़प रहे थे, जब गांव वालों ने अजीत से कार की चाभी मांगी तो उसने नहीं दी। गांव वालों ने यह बात भी पुलिस को बताई। इससे वह शक के घेरे में आ गया।
3. अपने परिवार को शिफ्ट करना-हत्याकांड से एक दिन पहले अजीत ने अपनी पत्नी और बच्चों को लखनऊ स्थित चिनहट में ससुराल पहुंचाकर आया था। पुलिस को उन्हें भेजने का कोई वाजिब वजह नहीं बता पाया।
4. बयान बदले- वह पुलिस के सामने दो बार बयान बदले। वह यह नहीं बता पाया कि अनुराग ने उसे कैसे छोड़ दिया। पुलिस ने तीन बार पूरे सीन को रिक्रिएट किया, तब जाकर पूरा मामला स्पष्ट हुआ।
अजीत ने दो बार बयान बदले
पुलिस अधिकारियों ने बताया- अजीत को पुलिस हिरासत में न तो मारा गया न ही टॉर्चर किया गया, क्योंकि वह हार्ट पेशेंट है। हां, सच निकालने के लिए उसे दो रातों से सोने नहीं दिया गया। इस दौरान उसने दो बार अपने बयान बदले हैं। इसके बाद हमने घटनास्थल पर तीन बार मर्डर का सीन रिक्रिएट करना पड़ा। पुलिस की जांच में पता चला कि तमंचा अजीत के पिता का था।
इस मर्डर के खुलासे के लिए आईजी लखनऊ तरुण गाबा की टीम, सीतापुर क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टीम लगी हुई है। अभी तक की पुलिस इंवेस्टिगेशन में सामने आया है कि तीन बच्चों समेत छह लोगों की हत्या में केवल अजीत सिंह ही शामिल था।
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