‘पहले घर तोड़ा अब वोटर लिस्ट से नाम काटा जा रहा है… हमारी नागरिकता का क्या होगा?’ असम में एसआर को लेकर क्या है डर?

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“अगर वोटर लिस्ट से नाम कट गया तो हमारी नागरिकता ख़त्म हो जाएगी. चिंता से न नींद आती है और न ही कुछ खाया पिया जा रहा है. हमारे मकान तोड़ दिए गए अब अगर नागरिकता नहीं रही तो कहां जाएंगे?”

इतना कहते ही 50 साल की फ़ाज़िला ख़ातून रोने लगती है. फ़ाज़िला इस समय नौगांव ज़िले के कचुआ थाना क्षेत्र में चानखुला के एक खुले मैदान में प्लास्टिक की बनी झुग्गी में रह रही हैं.

एसआर यानी स्पेशल रिवीज़न से जुड़े एक नोटिस को दिखाते हुए फ़ाज़िला कहती हैं, “मैं नोटिस मिलने के बाद बेटों के साथ हर उस दफ़्तर गई जहां हमें बुलाया गया. अधिकारी को सारे कागज़ दिखाए. तीन-चार बार सुनवाई के लिए गए. नहीं जाते तो वोटर लिस्ट से नाम काट दिया जाता.”

“अब भी मन में डर बैठा है. टेंशन हो रही है. हमारी नागरिकता नहीं बची तो क्या होगा? कुछ लोग बोल रहे है कि हमारा नाम काट दिया है. किसके पास जाऊं? क्या करूं, कुछ सोच नहीं पा रही हूं.

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