बस्ती लोकसभा सीट पर वोटिंग खत्म हो गई है। यहां 55.67 % वोटिंग हुई है। बीजेपी प्रत्याशी हरीश द्विवेदी ने वोट डाल दिया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह ने भी वोट डाला। इस सीट पर 19,02,898 मतदाता हैं। यह नौ उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। यह
भाजपा ने तीसरी बार भरोसा जताते हुए सांसद हरीश द्विवेदी को चुनावी मैदान में उतारा है। इंडी गठबंधन से सपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री राम प्रसाद चौधरी को टिकट दिया। बसपा ने पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर मिश्र का टिकट काटने के बाद पूर्व विधायक जितेंद्र चौधरी के बेटे लवकुश पटेल को उतारा है।
वोटिंग की तस्वीरें देखें…
चुनाव कराने के लिए 11 हजार 750 कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। हर्रैया विधानसभा क्षेत्र में 526, कप्तानगंज में 497, रुधौली में 593, सदर में 520 और महादेवा विधानसभा क्षेत्र में 551 ईवीएम का प्रयोग किया जाना है। 1482 मतदान केंद्रों पर मतदान होना है। 182 क्रिटिकल मतदान केंद्रों और 254 मतदेय स्थलों एवं 17 वल्नरेबुल केंद्र और 18 वल्नरेबुल मतदेय स्थलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पैरामिलिट्री फोर्स के जिम्मे रहेगी।
इसके लिए 18 कंपनी सीपीएमएफ (एसएसबी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, पंजाब आर्म्ड पुलिस फोर्स) आई है। पुलिस विभाग की क्यूआरटी टीम लगातार भ्रमणशील रहेगी। यह किसी भी सूचना पर मतदान केंद्रों पर पहुंच जाएंगी। 126 सेक्टर, 16 जोन और चार सुपर जोनल और मजिस्ट्रेटों के वाहनों को जीपीएस से लैस किया गया है, ताकि उनकी रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके। रूट को भी जीपीएस पर फीड कराया गया है, जिससे फोर्स को भी मतदान केंद्रों पर पहुंचने में दिक्कत न हो।
2019 में भारतीय जनता पार्टी के दूसरी बार के प्रत्याशी हरीश द्विवेदी विजयी हुए थे। वहीं बसपा प्रत्याशी राम प्रसाद चौधरी सेकेंड फाइटर थे, हरीश द्विवेदी को 44.68 व राम प्रसाद चौधरी को 41.8 प्रतिशत वोट मिला था। राजनीतिक जानकारों की मानें तो लवकुश पटेल जितनी तेज लड़ेंगे, भाजपा को उतना ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि सपा के राम प्रसाद चौधरी कुर्मी बिरादरी से हैं और लवकुश पटेल भी कुर्मी हैं। इनके पिता जीतेंद्र कुमार विधायक रहे हैं। इनकी पकड़ कुर्मी बिरादरी में काफी बेहतर है। यहां सीधी लड़ाई भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच में है।
अब समझिए सियासी समीकरण
मौजूदा सांसद का विरोध, बिगड़ी बीजेपी की गणित
पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं- चुनाव से ठीक दो-तीन महीने पहले तक यहां भाजपा के पक्ष में अच्छा माहौल था। चूंकि यह अयोध्या के बगल की सीट है, इसलिए लोग राममय हो चुके थे। लेकिन, यहां के भाजपा प्रत्याशी हरीश द्विवेदी का विरोध है, इसलिए पीक चुनाव में भाजपा का समीकरण बिगड़ चुका है। आम मतदाता यहां बदलाव चाहता है। जिसकी वजह से अब माहौल भाजपा के खिलाफ जा रहा है। अब सपा और भाजपा में टफ फाइट है।
दलित वोटर जिसके साथ जाएंगे वो जीतेगा
पाॅलिटिकल एक्सपर्ट बताते हैं- बस्ती में लड़ाई विचारों की है। गरीब सोच रहा है अगर मोदी को जिता दें तो अनाज मिलेगा। दूसरा वर्ग सोच रहा है कि अगर मोदी जीते तो संविधान खतरे में पड़ जाएगा। इस बीच बसपा ने अपना प्रत्याशी बदलकर पूरा समीकरण बिगाड़ दिया। दलित वोटर जिसके साथ जाएंगे, उसकी जीत निश्चित है।
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