सरकार की नीति और नियति देखनी होगी, सपा ने हमेशा सम्मान किया; महिला आरक्षण बिल पर बोले अवधेश प्रसाद

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संसद का बजट सत्र 16 अप्रैल से दोबारा शुरू होगा। केंद्र सरकार ने यह निर्णय महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के उद्देश्य से लिया है। खासतौर पर संसद के इस सत्र में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा होगी। सरकारी योजना के मुताबिक, 16, 17 और 18 अप्रैल को सदन में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े अहम बिलों पर विस्तार से चर्चा होगी। मौजूदा समय में लोकसभा की कुल 543 सीटें हैं, लेकिन प्रस्तावित बदलाव के तहत इनमें करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।

इस बढ़ोतरी के बाद सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी। इस प्रस्ताव में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को भी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत 816 सीटों में से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया जा सकता है, जो कुल सीटों का लगभग एक-तिहाई होगा। इस मामले पर समाजवादी पार्टी के अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद की प्रतिक्रिया सामने आई है।

अवधेश प्रसाद ने कहा कि हमारी पार्टी, समाजवादी पार्टी, ने हमेशा महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण का समर्थन किया है, चाहे मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में हो या अखिलेश यादव के शासनकाल रहा हो। उत्तर प्रदेश में नेताजी के नेतृत्व में ही पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया गया था। जिसकी वजह से हमारी पत्नी सोना देवी पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं। हमारी पार्टी महिलाओं की गरिमा का पूर्ण समर्थन करती है।

जहां तक ​​विधेयक का सवाल है, तो हमें सरकार के इरादे और नीति को देखना होगा, क्योंकि अक्सर दोनों में अंतर होता है। विधेयक को आने दीजिए, हम इसके प्रावधानों और इसे लागू करने के तरीके की जांच करेंगे, क्योंकि पहले भी कई विधेयक पेश किए गए हैं लेकिन प्रभावी रूप से कानून नहीं बन पाए हैं।

आपको बता दें 2023 में महिला आरक्षण कानून संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। इसके तहत महिला आरक्षण नई जनगणना के बाद लागू होना है। अब सरकार का प्रस्ताव है कि नई जनगणना का इंतजार करने की बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए। इससे प्रोसेस तय समय पर पूरी हो सकेगी और आरक्षण लागू किया जा सकेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ेंगी। 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। वहीं बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है।
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