Exit Poll 2024 FAQ: जिस Exit Poll को लेकर इतने उतावले, इन 8 सवालों के जवाब जानते हैं या नहीं? – Jansatta

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Lok Sabha Election Result Exit Poll 2024 FAQS: लोकसभा चुनाव अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ चला है। अब सातवें चरण की वोटिंग होने जा रही है, उसकी समाप्ति के बाद एग्जिट पोल्स के आंकड़े भी जारी कर दिए जाएंगे। अब असल नतीजों का रोमांच तो रहता ही है, उसके साथ-साथ यह पोलिंग एंजेसियां किसे जिता रही हैं, किसे रहा रही हैं, इसका भी अपना मजा रहता है। अब जिस एग्जिट पोल को लेकर आप लोग इतना उतावले रहते हैं, उससे जुड़े इन सवालों के जवाब आपको पता भी हैं या नहीं?
एग्जिट पोल असल में एक तरह का चुनावी सर्वे है जिसमें असल नतीजों से पहले जनता के रुझान को समझने की कोशिश होती है। यह जानने का प्रयास होता है कि आखिर वोटर ने किस पार्टी के पक्ष में वोट किया है। यह एग्जिट पोल कोई सरकार नहीं करवाती है, ना ही कोई सरकारी बॉडी इसमें शामिल रहती है। प्राइवेट एजेंसियां ही ऐसे एग्जिट पोल्स को अंजाम देती हैं।
एग्जिट पोल करने का तरीका एकदम सिंपल होता है। जब हर चरण की वोटिंग चल रही होती है, तब न्यूज चैनल और उनके साथ जुड़ी पोलिंग एजेंसी के अधिकारी भी वहां मौजूद होते हैं। जब वो मतदाता अपनी वोटिंग करके आते हैं, उन्हीं से सीधे पूछा जाता है कि आपने किसे वोट किया। थ्योरी यह है कि जब वोटर वोट करके आता है, तब उसके मन में एकदम ताजा रहता है कि उसने किस प्रत्याशी को अपना समर्थन दिया है, ऐसे में उसी समय यह पोलिंग एजेंसी अपना काम करती हैं। बाद में उन सभी आंकड़ों को समझकर, उनका निचोड़ नंबर्स के रूप में सामने रखा जाता है।
एग्जिट पोल ज्यादातर न्यूज चैनल दिखाने वाले हैं। कई डिजिटल वेबसाइट पर भी एग्जिट पोल के आंकड़े देखे जा सकते हैं। लेकिन अगर एक ही जगह पर आपको सारे एग्जिट पोल के नतीजे चाहिए तो जनसत्ता की वेबसाइट पर आना पड़ेगा, जनसत्ता के यूट्यूब चैनल से जुड़ना पड़ेगा।
एग्जिट पोल शुरू होने का कोई सही समय नहीं होता है। आंकड़ों से पहले की कवरेज या कहें भूमिका बांधना तो दोपहर तीन बजे से ही चालू हो जाता है। लेकिन एग्जिट पोल का कोई भी आंकड़ा तब तक जारी नहीं किया जा सकता जब तक मतदान पूरा ना हो जाए। वोटिंग होने के भी आधे घंटे बाद ही पहला आंकड़ा जारी किया जा सकता है।
नहीं, एग्जिट पोल को एकदम सटीक या असल नतीजे नहीं मान सकते हैं। एग्जिट पोल का काम सिर्फ रुझान बताना है, वो किसी पक्ष में लहर दिखा सकता है, लेकिन एकदम सही आंकड़े जारी हो जाएं, इसकी उम्मीद कम रहती है। लेकिन फिर भी इतिहास बताता है कि एग्जिट पोल सटीक भी साबित हुए हैं और कई और कई बार औंधे मुंह भी गिरे हैं।
ऐसा कहा जाता है कि 1957 का जो लोकसभा चुनाव हुआ था, उसमें सबसे पहले चुनावी सर्वे किया गया था। वो सर्वे Indian Institute of Public Opinion ने किया था। इसके बाद इसी एजेंसी को दूरदर्शन ने 1996 के लोकसभा चुनाव के लिए हायर किया था और उसके बाद से एग्जिट पोल का चलन शुरू हो गया।
ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल में सबसे सिंपल अंतर तो ये होता है कि ओपिनियन पोल चुनावी तारीखों की घोषणा से पहले किया जाता है, वही एग्जिट पोल सारे चरणों की वोटिंग होने के बाद। दूसरा फर्क ये होता है कि ओपिनियन पोल में तो आप सभी से बात करते हैं, लेकिन एग्जिट पोल के दौरान सिर्फ मतदाता से ही बात की जाती है।
Representation of the People Act,1951 के सेक्शन 126A के तहत वोटिंग के दौरान कोई भी पोलिंग एजेंसी अपना एग्जिट पोल जारी नहीं कर सकती है। चुनाव आयोग के पास भी पूरी ताकत रहती है कि वो एग्जिट पोल करने वाली कंपनियों के लिए नियम बना सकती है। सबसे बड़ा नियम तो यही है कि पोलिंग के समय कोई आंकड़ा जारी ना किया जाए।
LIVE Voting: लोकसभा चुनाव के 7वें (आखिरी) चरण में 7 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश की कुल 57 लोकसभा सीटों पर 1 जून को मतदान होगा। इस चरण में बिहार, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में वोटिंग है। इस चरण के मतदान के साथ ही 19 अप्रैल से शुरू हुए चुनाव के सभी चरणों का मतदान संपन्न हो जाएगा।

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