Lok Sabha Chunav 2024: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ गए हैं, जिसमें एनडीए की बंपर जीत का अनुमान लगाया जा रहा है। एग्जिट पोल के मुताबिक पीएम मोदी की पॉपुलैरिटी के चलते बीजेपी और एनडीए को लोकसभा चुनाव में बड़ा फायदा हो सकता है। इन एग्जिट पोल्स पर देश विदेश से रिएक्शन आ रहे हैं और एक विदेशी नेता ने इन एग्जिट पोल के बाद यह तक कह दिया कि मोदी विरोधी पश्चिमी मीडिया भारत विरोधी निगेटिव कवरेज पर पुनर्विचार करें और इससे बचे।
दरअसल, यह विदेशी नेता नॉर्वे के पूर्व मंत्री और राजनयिक एरिक सोलहेम ने विदेशी पश्चिमी मीडिया को आईना दिखाया है और यह तक कह दिया कि अब समय आ गया है कि वेस्टर्न मीडिया भारत और मोदी के बारे में अपनी लगातार जारी विरोधी कवरेज पर पुनर्विचार करे।
दरअसल, एग्जिट पोल्स के नतीजे अनुमान सामने आने के बाद नॉर्वे के पूर्व मंत्री सोलहेम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत में एग्जिट पोलस चार जून को नतीजे आने पर पीएम नरेंद्र मोदी की बड़ी जीत का दावा कर रहे हैं। अगर पोल सही हैं, तो सरकार में दस साल के बाद यह लगभग अभूतपूर्व विश्वास मत होगा।
सोलहेम ने पीएम मोदी और भारत को लेकर कहा कि अब समय आ गया है कि पश्चिमी मीडिया भारत और मोदी के बारे में जारी अपनी लगातार नेगेटिव कवरेज पर पुनर्विचार करें, और भारत को लेकर एक सकारात्मक रुख अपनाएं।
Exit polls in India ?? predict big win for Prime Minister Modi when results are published June 4th.
If the polls are accurate, its a near unprecedented vote of confidence after ten years in government.
May be time for Western media to rethink their constant negative coverage of… pic.twitter.com/O9gO1QfYIW
इंडिया टुडे एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल्स के अनुसार, एनडीए 361-401 सीटें जीत सकता है, जबकि इंडिया अलायंस को 131 – 166 सीटे मिलने का अनुमान है। इसके अलावा एबीपी न्यूज के सी वोटर के अनुसार एनडीए को 353-383 सीटें मिल सकती हैं। इतना ही नहीं, 152-182 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।
ऐसे में अब सभी को इंतजार चार जून का है, जब लोकसभा चुनाव के नतीजे सामने आएंगे, जो कि इस बार के एग्जिट पोल का भी एक बड़ा टेस्ट साबित होने वाले हैं।
एग्जिट पोल में मोदी सरकार की वापसी की भविष्यवाणी की गई है, जबकि इंडिया गठबंधन को हार का सामना करना पड़ सकता है। राम मंदिर पर नकारात्मक प्रचार, सहयोगियों की बेवफाई, संयुक्त रैलियों की कमी और बीजेपी के प्रभावी प्रचार को इंडिया गठबंधन की हार के कारणों के रूप में बताया गया है।
