‘वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ने देंगे, ये तय था, अब साफ भी हो गया। दिल जरूर टूटा है, लेकिन हौसला नहीं।’
ये कहना है स्टैंडअप कॉमेडियन राजस्थान के श्याम रंगीला का। PM मोदी की मिमिक्री करने की वजह से वे मशहूर हैं, लेकिन उनके खिलाफ वाराणसी से नॉमिनेशन फाइल करने के बाद अब श्याम अलग वजहों से सुर्खियों में हैं।
श्याम, PM मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन नॉमिनेशन रिजेक्ट हो गया। वे आरोप लगाते हैं कि मुझे नॉमिनेशन की सही जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद जब गलतियां ठीक कराने DM ऑफिस पहुंचा, तो बदतमीजी की गई।
नॉमिनेशन की तारीख बीत गई है। लिहाजा, श्याम भी राजस्थान लौट गए हैं। वाराणसी सीट पर आखिरी फेज में 1 जून को वोटिंग होनी है। दैनिक भास्कर ने श्याम रंगीला से वाराणसी में नामांकन, स्टैंडअप कॉमेडी और राजनीति समेत कई मुद्दों पर बातचीत की। पढ़िए और देखिए पूरा इंटरव्यू…
सवाल: स्टैंडअप कॉमेडी बढ़िया चल रही थी, फिर वाराणसी से चुनाव लड़ने का प्लान कैसे बना लिया?
जवाब: अच्छी स्टैंडअप कॉमेडी से सिर्फ मेरा भला हो सकता था, लेकिन सिर्फ मेरा नहीं बल्कि देश का भला होना चाहिए। लोकतंत्र ध्वस्त होता है, तो सबको पीड़ा होती है। मैंने सूरत और इंदौर सीट को लेकर कॉमेडी करनी चाही, तो यही पीड़ा मुझे भी हुई।
मुझे लगा कि ये कॉमेडी का विषय तो नहीं है। देश में ऐसी राजनीति हो रही है कि ये लोग कांग्रेस कैंडिडेट को चुनाव से पहले अपने पाले में ले जा रहे हैं। दूसरी पार्टी के नेताओं का पर्चा उठवा लिया जाता है।
ये सब देखकर मैंने सोचा कि मुझे PM मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ना चाहिए। इसके पीछे मकसद सिर्फ इतना था कि जो धांधली बाकी राज्यों में हुई, वो मैं वाराणसी में नहीं होने दूंगा। वहां से चुनाव लड़कर हम ये संदेश तो दे सकेंगे कि अगर हम मोदी के खिलाफ भी पर्चा भरेंगे तो कभी वापस नहीं लेंगे।
सवाल: आपका आरोप है कि वाराणसी में नॉमिनेशन करते वक्त आपके साथ बदतमीजी हुई?
जवाब: सिर्फ मैं ही नहीं, PM मोदी के खिलाफ जो भी नामांकन करने गया, उसके साथ बदतमीजी हुई। 14 मई की रात 10 बजे हम फॉर्म की गलतियां सही करवाने DM ऑफिस गए, तो वहां से मुझे बाहर निकाल दिया।
मैंने वाराणसी के DM एस.राजलिंगम से बस इतना कहा कि सर हम टाइम के मुताबिक ही आए हैं। इतना सुनते ही वो भड़क गए और कहा, ‘तुम लोग अब भी यहां घूम रहे हो। यहां क्या पिकनिक में आए हो। ये पिकनिक मनाने की जगह है क्या। इन लोगों को यहां से तुरंत बाहर निकालो।’
उनकी बातें सुनकर मैं यही सोच रहा था कि DM एक पढ़ा-लिखा इंसान होता है। अगर उनके बोलने का तरीका ये है तो इतना पढ़ने-लिखने का क्या फायदा। चाहे एक वोट मिले या 10 वोट, हमें किसी के भी खिलाफ चुनाव लड़ने का अधिकार है, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता।
13 मई को मैं नामांकन करने पहुंचा, तब कांग्रेस नेता अजय राय भी वहां पहुंचे। वे बिना किसी लाइन के अंदर घुस गए और 15 मिनट बाद लाइन को चीरते हुए बाहर चले गए। मैं उस वक्त 150 लोगों के साथ बाहर लाइन में ही खड़ा रह गया। इससे तो यही साबित होता है कि सब पहले से तय है।
सवाल: वाराणसी में नरेंद्र मोदी को हराना मुश्किल है, फिर भी आप राजस्थान से वाराणसी नामांकन करने गए। इसके पीछे क्या सोच थी?
जवाब: मैं राजस्थान का हूं, तो क्या वाराणसी जाकर चुनाव नहीं लड़ सकता। राज्यों की सीमाएं हमें किसी के खिलाफ चुनाव लड़ने से रोक नहीं सकती। मैं वाराणसी से ही लड़ना चाहता था। इसलिए मैं समझता हूं कि लोगों को मेरे फैसले से दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मुझे खुशी है कि मैं वहां मोदी के खिलाफ नामांकन करने गया था और पूरा काम करके लौटा हूं।
सवाल: क्या लगता है, आपका नामांकन क्यों रद्द हुआ?
जवाब: पहली बात ये कि मेरे साथ जिनके पर्चे रद्द किए गए, उनमें एक चीज कॉमन थी। सबके पर्चे पर लिखा गया था कि आपने शपथ नहीं ली। दूसरे कारण तो आप छोड़ ही दीजिए। अगर 13 मई को हमारा नॉमिनेशन होता तो उसकी गलतियां 14 तारीख को सही करा सकते थे।
मेरी तरह जिन 27-28 लोगों का पर्चा लिया गया, उन्हें पर्चे में गलतियां तक नहीं बताई गईं। बाद में सबके नॉमिनेशन रिजेक्ट करते हुए लिख दिया गया कि आपने शपथ नहीं ली है।
14 मई को हम दोबारा DM ऑफिस गए, लेकिन शाम 4 बजे के बाद हमें शपथ दिलवाई गई। अगले दिन बताया गया कि आपने तय वक्त तक शपथ नहीं ली, लिहाजा आपका नामांकन रद्द किया जाता है। वहां ऐसे बहुत लोग थे, जिन्होंने कहा कि हमें शपथ क्यों नहीं दिलाई जा रही है। DM साहब ने सबको ये कहकर मना कर दिया कि ये हमारा काम नहीं है।
सवाल: आपको नामांकन रद्द होने के बाद सोशल मीडिया पर समर्थन भी मिला और ट्रोल भी किया गया। आप ट्रोलर्स को कैसे मैनेज करते हैं?
जवाब: मैं ट्रोलर्स को सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि मैं नेता नहीं हूं। हम जो काम दिल लगाकर कर रहे हों, उसका जवाब देना हम कॉमेडियंस के लिए सिर्फ 2 सेकेंड का काम है। मुझे किस बात पर रिस्पॉन्ड करना है, वो तो मैं ही डिसाइड करूंगा।
ट्रोलर्स को लगता है कि मैंने लोगों से पैसे लिए हैं तो मैं उनसे यही कहना चाहता हूं कि हां… मैंने 20 लाख नहीं, 20 करोड़ रुपए लिए हैं। साबित कर पाओ तो कर दो। अब तो नामांकन भरने के बाद मेरा बैंक खाता भी सार्वजनिक हो गया है। अपनी टीम लगाकर इसकी जांच करा लो, सब पता चल जाएगा।
सवाल: आप कभी PM मोदी से मिले हैं, अगर नहीं तो जब मिलेंगे, उनसे क्या कहेंगे?
जवाब: नहीं, मैं उनसे अब तक नहीं मिला हूं। अगर वे मुझसे मिलते हैं तो मैं सबसे पहले उन्हें धन्यवाद दूंगा। वो इतने पॉपुलर हैं कि उनकी मिमिक्री करके मुझे इतना फेमस होने का मौका मिला। दूसरी बात ये कहूंगा कि अगर सच में उन्होंने मेरे ह्यूमर की रिस्पेक्ट की होती तो आज बहुत सी चीजें अलग होतीं। मैं उनका अंध-भक्त होता।
सवाल: PM के तौर पर नरेंद्र मोदी आपको कैसे नेता लगते हैं?
जवाब: मेरा मानना है कि भारत में किसी भी राजनीतिक पार्टी को 10 साल से ज्यादा सरकार में रहने का वक्त नहीं दिया जाना चाहिए। कोई भी सरकार हो, आपसी सहमति से उसे हटा देना चाहिए। 10 साल तक सत्ता में बने रहने के बाद चाहे कोई भी हो, उसमें अहंकार आ जाता है। उन्हें लगने लगता है कि हम जो करेंगे वही होगा। लोकतंत्र कुछ नहीं है, हम ही सब कुछ हैं।
सवाल: इंडियन पॉलिटिक्स में आपका सबसे फेवरेट नेता कौन है?
जवाब: मुझे आज भी मोदी जी को सुनना बहुत अच्छा लगता है। उनसे कोई भी सवाल आप पूछिए वो ऐसा जवाब देंगे कि आपको मजा आ जाएगा। भले ही वो जवाब सच्चा हो, गलत हो या झूठा हो। कुछ भी हो… वो ऐसे लहजे में कहेंगे कि सुनकर आनंद आ जाएगा।
उनकी पर्सनैलिटी देखकर लगता है कि वे हमारे प्रधानमंत्री हैं। उनकी दाढ़ी बिल्कुल सेट रहती है। वो जब सूटेड-बूटेड होकर तनकर चलते हैं तो दूर-दूर तक सिर्फ वही नजर आते हैं।
उन्होंने हाल ही में गेमर्स और कंटेंट क्रिएटर्स से मुलाकात की। मुझे वो बहुत अच्छा फैसला लगा, क्योंकि इससे युवाओं के बीच उनकी पॉपुलैरिटी बढ़ी है। चुनाव से पहले टैलेंटेड यूथ से मिलने का आइडिया मोदी के स्ट्रॉन्ग माइंड को दिखाता है।
सवाल: आपने ट्वीट किया कि लोगों के नामांकन कैसे रिजेक्ट करें, ये सोची समझी साजिश है। पूरे भारत में ऐसा हो रहा है। इसका क्या मतलब है?
जवाब: मैं बताना चाहता था कि 13 मई को जो 5 नॉमिनेशन हुए, उनमें से हमारी लाइन में लगा कोई आदमी नहीं था। फिर वो 5 नामांकन किसके थे। इसके एक दिन बाद यानी 14 तारीख को जब PM मोदी ने पर्चा भरा, तब तक 14 लोग अपना नामांकन कर चुके थे।
इन 14 लोगों को पहले ही बता दिया गया था कि आप 14 मई तक अपने फॉर्म की गलतियों को सुधार सकते हैं। इसके बावजूद कोई नहीं आया, लेकिन हम बाहर लाइन में लगे रहे और हमें नॉमिनेशन नहीं करने दिया गया। बाद में 14 तारीख की शाम 3 बजे के बाद 26 लोगों का नामांकन लिया जाता है, लेकिन अगले दिन सबके पर्चे खारिज हो जाते हैं।
अब ये सुनने में आ रहा है कि वाराणसी से PM मोदी के खिलाफ 8 लोग चुनाव लड़ेंगे। यानी पहले चुने गए 14 लोगों में 6 का पर्चा कहां गया किसी को कुछ नहीं पता। ये 6 लोग वही डमी कैंडिडेट हैं, जो 10 या 13 मई को प्रत्याशियों का समय बर्बाद करने के लिए लाइन में लगे थे। उन्हें हार-जीत या चुनाव लड़ने से कोई मतलब नहीं था।
सवाल: आप पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। ऐसा क्या हुआ कि पार्टी से नाता तोड़ लिया?
जवाब: राजस्थान में विधानसभा चुनाव के वक्त मैंने अरविंद केजरीवाल को सपोर्ट करने के लिए AAP जॉइन की थी। तब मैंने लोगों से AAP को वोट देने की अपील भी की थी। दिसंबर, 2023 आते-आते मैंने देखा कि राजस्थान में चुनाव जीतने के लिए AAP की कोई रणनीति नहीं थी। ऐसा कोई माहौल नहीं बन पाया कि मेरा सपोर्ट उन्हें फायदा पहुंचा सके।
राजस्थान के नतीजे आए तो AAP की बुरी हार हुई। तब मुझे लगा कि जब यहां AAP पार्टी का कोई वजूद ही नहीं है, तो मेरा उसे समर्थन देने का कोई मतलब नहीं बनता। यही सब देखकर मैंने पार्टी छोड़ दी।
सवाल: लाफ्टर चैलेंज के उस एपिसोड की क्या कहानी है, जब आपका शो रोक दिया गया था?
जवाब: 2017 में ‘द ग्रेड इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ शो आया। शो की तरफ से मेरे पास कॉल आई और मैं उसका हिस्सा बन गया। PM मोदी पर मेरी मिमिक्री वाली परफॉर्मेंस देखकर अक्षय कुमार सहित वहां मौजूद सभी जज बहुत खुश हुए थे।
वो क्लिप टेलिकास्ट होनी थी, उससे 3 दिन पहले मेरे पास शो के प्रोड्यूसर का फोन आया। वे बोले कि आपकी परफॉर्मेंस में से कुछ पार्ट रिप्लेस करने पड़ेंगे क्योंकि इस पर सेंसरशिप का इश्यू है।
इसके बाद मैंने खाली पड़े स्टूडियो में दोबारा परफॉर्म किया। बाद में वो एडिटेड वीडियो टेलिकास्ट किया गया। इसके बाद मुझे शो से एलिमिनेट कर दिया गया। बाद में उसी शो की हटाई गई क्लिप सोशल मीडिया पर अपलोड हुई। इसके बाद लोग मुझे जानने लगे और मेरे सपोर्ट में आ गए।
आप सोचिए जरा, जो लड़का 2014 से पहले मोदी जी का अंधभक्त था, उसी के शो पर उन्हीं की सरकार में सेंसर बोर्ड ने रोक लगा दिया।
PM की मिमिक्री करने पर राजद्रोह की धमकी मिली
राजस्थान के हनुमानगढ़ कस्बे के रहने वाले श्याम रंगीला का असली नाम श्याम सुंदर है। पिता जवाहर लाल किसान हैं। श्याम ने 2012 में 12वीं पास की और फिर जयपुर से एनिमेशन का कोर्स किया। 2014 से पहले श्याम रंगीला नरेंद्र मोदी के समर्थक थे।
एनिमेशन की पढ़ाई के बाद स्टैंडअप कॉमेडी को अपना प्रोफेशन बनाया और बड़े नेताओं की मिमिक्री करने लगे। 2017 में उन्हें ‘ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ शो में परफॉर्म करने का मौका मिला और वो सुर्खियों में आए। उन्होंने शो में PM मोदी की मिमिक्री की थी। हालांकि, बाद में शो से एलिमिनेट कर दिए गए।
PM मोदी की मिमिक्री को लेकर श्याम कई विवादों में भी रहे। साल 2021 में जब पेट्रोल के दाम 100 रुपए से ऊपर चले गए तो उन्होंने एक पेट्रोल पंप पर जाकर मोदी की मिमिक्री करते हुए वीडियो बनाया। इसके बाद पंप मालिक ने उनके खिलाफ राजद्रोह का केस करने की धमकी दी थी।
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