अंजू प्रजापति/रामपुर: वक्त और हालात कब बदल जाए कुछ कह नहीं सकते, ऐसा ही एक उदाहरण मोअज्जम अली उर्फ मुन्ने भाई हैं. कहने को तो यह मार्शल आर्ट के नेशनल प्लेयर रह चुके हैं और ब्लैक बेल्ट धारक भी हैं. लेकिन वर्तमान में वह जलेबी बेच रहे हैं . आर्थिक मजबूरी हमसे वो सब करा लेती है, जो हम नहीं करना चाहते हैं.
मोहल्ला राजद्वारा निवासी मोअज्जम अली उर्फ मुन्ने मियां को मार्शल आर्ट का बचपन से ही बहुत शौक था. वह अपने ख्वाब को पूरा करने के लिए वर्ष 1988 में मुंबई चले गए और वहां मार्शल आर्ट ट्रेनिंग सेंटर ज्वॉइन कर लिया. ट्रेनिंग के बाद उन्होंने ब्लैक बेल्ट की भी उपलब्धि भी हासिल की और कई स्टेट और नेशलन स्तर पर मेडल जीते. अपनी मेहनत के दम पर एक बार दिल्ली तो दूसरी बार धनगढ़ी में ब्लैक बेल्ट से सम्मानित हुए. बाद में मजबूरी के चलते उन्हें वापस घर लौटना पड़ा. इस दौरान अपनी योग्यता के अनुसार उन्होंने नौकरी की तलाश भी की. लेकिन बात नहीं बनी. फिर नौकरी की राह देख कर घर बैठे रहने से अच्छा उन्होंने जलेबी बेचनी शुरू की.
मोअज्जम अली उर्फ मुन्ने मियां पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी के 2008 में निजी सिक्योरिटी गार्ड भी रह चुके हैं. साथ ही मोअज्जम के सिखाए हुए शिष्य आज भी विभिन्न पदों पर खासतौर पर पुलिस के अच्छे पदों पर तैनात हैं. मोअज्जम अली उर्फ मुन्ने भाई ने बताया कि परिवार के भरण पोषण के लिए जलेबी बेचना शुरू किया और अब यही उनकी आय का साधन है. साथ ही अब उनकी जलेबी पूरे शहर में ही नहीं बल्कि दिल्ली और दुबई तक प्रसिद्ध है.
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