लोकसभा चुनाव 2024 के लिए राजस्थान में नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। राज्य की कुल 25 लोकसभा सीटों पर 266 प्रत्याशी मैदान में हैं। राजस्थान में मतदान दो चरणों में होगा। पहले चरण में 144 उम्मीदवार 12 सीटों पर मुकाबला करेंगे। दूसरे चरण में 152 उम्मीदवार 13 सीटों के लिए मैदान में रहेंगे। पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल और दूसरे चरण का मतदान 26 अप्रैल को होगा।
पिछले आम चुनाव (2019) में राजस्थान में कुल प्रत्याशियों की संख्या 249 थी, यानी इस बार की तुलना में 17 कम। कहां से कितने उम्मीदवार:
साल 1998 और 2009 को छोड़ दें तो राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर उसकी स्थापना के बाद से लगातार बढ़ा है। वोट शेयर में बड़ी उछाल राम मंदिर आंदोलन के वर्षों में देखने को मिला था।
1989 में भाजपा का वोट शेयर 29.6 प्रतिशत था, जो 1991 में बढ़कर 40.88 प्रतिशत हो गया यानी 11.2 प्रतिशत की उछाल। अगले चुनाव में यह करीब दो प्रतिशत और बढ़कर 42.36 प्रतिशत हो गया।
गौरतलब है कि 1992 में अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद को गिराए जाने के बाद कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देकर भाजपा शासित चार राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि राजस्थान एकमात्र ऐसा राज्य बना, जहां 1993 में भाजपा सत्ता में लौट आई। ऐसा कैसे हुआ? पहले चुनाव में छह सीट जीतने वाली जनसंघ (अब भाजपा) राजस्थान में इतनी मजबूत कैसे हो गई? विस्तार से जानने के लिए फोटो पर क्लिक करें:
मंदिर आंदोलन के चरम के दौरान भाजपा का वोट शेयर 11.2 प्रतिशत बढ़ा था लेकिन 2009 की तुलना में 2014 में यह 18.37 प्रतिशत बढ़ गया। 2014 और 2019 में भाजपा का वोट शेयर क्रमश: 54.94 प्रतिशत और 58.47 प्रतिशत था। सीट शेयर के मामले में भी यही ट्रेंड देखने को मिला है। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को राजस्थान की कुल 25 सीटों में से मात्र चार पर जीत मिली थी, वहीं 2014 में भाजपा सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही है। 2019 में भाजपा की एक घट गई।
