वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में मुस्लिम छात्रों की संख्या ज़्यादा होने पर शुरू हुआ था विरोध, अब इसे बंद करने का फ़ैसला

Spread the love

भारत के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने मंगलवार को गंभीर ख़ामियों का हवाला देते हुए जम्मू के रियासी स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल एक्सीलेंस को दी गई मेडिकल कोर्स एमबीबीएस संचालित करने की अनुमति रद्द कर दी.

ये इस मेडिकल कॉलेज का पहला एमबीबीएस बैच था.

एनएमसी भारत में मेडिकल शिक्षा और डॉक्टरों के पेशेवर आचरण की निगरानी करता है. भारत में मेडिकल कोर्स संचालित करने के लिए एनएमसी की अनुमति अनिवार्य है.

इस मेडिकल कॉलेज को पिछले साल सितंबर में इसी सत्र (2025-26) से 50 सीटों पर छात्रों के दाख़िले की अनुमति दी गई थी.

कॉलेज की इन 50 सीटों में से 40 से अधिक सीटों पर मुसलमान छात्रों को दाख़िला मिला था.

इसके बाद से ही श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के बैनर तले कई हिंदूवादी संगठन मेडिकल कॉलेज में मुसलमान छात्रों के अधिक संख्या में दाख़िले का विरोध कर रहे थे.

एनएमसी के आदेश के बाद एक तरफ़ हिंदूवादी संगठनों ने जश्न मनाया है, वहीं दूसरी तरफ़ इस कॉलेज में शिक्षा ले रहे छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

ज़िम्मेदारी तय होः उमर अब्दुल्ला

इसी बीच, गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि अगर एसएमवीडीआईएमई में ख़ामियां थी तो इसकी ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा है कि उनकी सरकार प्रभावित छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में दाख़िले का प्रबंध करेगी. उन्होंने कहा कि छात्रों को उन कॉलेजों में दाख़िला दिलाया जाएगा जो उनके घरों के नज़दीक हैं.

एनएमसी ने भी अपने आदेश में कहा था कि शिक्षा हासिल कर रहे छात्रों का दाख़िला दूसरे कॉलेजों में करवाने की व्यवस्था की जाएगी.

जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए गुरुवार को उमर अब्दुल्ला ने कहा, “आपको यूनिवर्सिटी (श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी) और उसके पदाधिकारियों से सवाल करने चाहिए, नीचे से लेकर ऊपर तक कि अगर आपने मेडिकल कॉलेज स्थापित किया है तो यह एनएमसी की जांच में पास क्यों नहीं हुआ?”

एनएमसी ने दो जनवरी को कॉलेज का आकस्मिक निरीक्षण किया था और छह जनवरी को कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स के संचालन की अनुमति वापस लेने का आदेश जारी कर दिया.

एनमीसी ने अपनी जांच के दौरान मेडिकल कॉलेज में कई ख़ामियां सामने आने का हवाला दिया है. एनएमसी ने इंस्टीट्यूट के इंफ्रास्ट्रक्चर में गंभीर ख़ामियां बताई हैं. इनमें फैकल्टी की संख्या, क्लिनिकल मटीरियल और अन्य चीज़ों का हवाला दिया गया है.

प्रदर्शन करते हिंदूवादी दल के नेता

हिंदूवादी संगठनों के विरोध के बाद कार्रवाई

नवंबर में कॉलेज में दाख़िला लेने वाले छात्रों की सूची सार्वजनिक होने के बाद से ही इसका विरोध शुरू हो गया था.

एसएमवीडीआईएमई में निर्धारित 50 सीटों में से 40 से अधिक सीटों पर मुसलमान छात्रों को नीट परीक्षा में मेरिट के आधार पर दाख़िला मिलने के बाद 22 नवंबर को श्री वैष्णो देवी संघर्ष समिति का गठन हुआ था.

गठन के बाद से ही श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति इस मेडिकल कॉलेज के ख़िलाफ़ अभियान चला रही थी और एमबीबीएस कोर्स की मान्यता रद्द करने की मांग कर रही थी.

इस संघर्ष समिति में 50 से अधिक संगठन शामिल थे, जिनमें आरएसएस और बीजेपी से जुड़े संगठन भी थे. बजरंग दल ने कॉलेज के ख़िलाफ़ उग्र प्रदर्शन भी किया था.

एनएमसी का निर्णय आने से एक दिन पहले भी समिति ने जम्मू सिविल सचिवालय के बाहर धरना दिया था. जम्मू में चक्का जाम की चेतावनी भी दी थी. इसके एक दिन बाद ही एनएमसी ने कॉलेज में कोर्स की अनुमति वापस लेने का आदेश जारी कर दिया था.

एनएमसी की कार्रवाई के बाद मेडिकल कॉलेज के ख़िलाफ़ अभियान चला रही समिति ने इसे अपने प्रयासों का नतीजा बताते हुए जश्न मनाया है. समिति के सदस्यों के मिठाई बाँटने और ढोल-नगाड़ों पर नाचने की तस्वीरें सामने आई हैं.

इस आदेश के बाद एक प्रेस वार्ता में समिति के संयोजक रिटायर्ड कर्नल सुखवीर सिंह मंकोटिया ने कहा, “45 दिनों के आंदोलन की जीत हुई है. केंद्र के गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का धन्यवाद. उन्होंने इस निर्णय को तुरंत करवाया. यह न्याय की विजय है.”

समिति से जुड़े और सनातम धर्म सभा के संयोजक पुरुषोत्तम दाधिची ने कहा, “हम उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का भी धन्यवाद करते हैं. हमें जानकारी मिली है कि एलजी मनोज सिन्हा का भी इस निर्णय में सहयोग मिला है.”

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मेडिकल कोर्स बंद होने के बाद पूछा है- जश्न किस बात का है?

‘जश्न किस बात का?’

संघर्ष समिति के कॉलेज बंद होने पर जश्न मनाने पर टिप्पणी करते हुए बुधवार को मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “ये जश्न किस बात का है. अगर बच्चों का भविष्य ख़राब करके आपको ख़ुशी मिल रही है तो फोड़िए पटाखे.”

अब्दुल्ला ने कहा, “बाक़ी देश में लोग मेडिकल कॉलेज लाने के लिए लड़ते हैं, यहां मेडिकल कॉलेज को बंद करने की लड़ाई लड़ी गई, आपने जम्मू-कश्मीर के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया. अगर जम्मू-कश्मीर के बच्चों का भविष्य ख़राब करने पर आपको ख़ुशी मिल रही है तो फोड़िए पटाखे. ”

अब्दुल्ला ने कहा, “इस बार 50 में से 40 कश्मीर में आए, एक दो साल बाद ये पचास सीटें चार सौ सीटें बन जाती, मुमकिन है, उनमें दो-ढाई सौ बच्चे जम्मू के होते, अब मेडिकल कॉलेज की सीट उन्हें मिलेगी नहीं क्योंकि मज़हब के नाम पर आपने पूरा कॉलेज बंद करा दिया है.”

पिछले साल जून की इस तस्वीर में मेडिकल कॉलेज की लैब का निरीक्षण करते कॉलेज के पदाधिकारी

मापदंड पूरे नहीं हुएः बीजेपी

जम्मू-कश्मीर के बीजेपी नेताओं ने भी इस निर्णय का समर्थन किया है. जम्मू-कश्मीर बीजेपी के अध्यक्ष सत शर्मा ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का धन्यवाद देते हुए कहा कि एनएमसी का निर्णय स्वागत योग्य है.

उन्होंने कहा, “हम अपने राष्ट्रीय नेतृत्व का धन्यवाद करना चाहते हैं, जेपी नड्डा का भी धन्यवाद करते हैं. एनएमसी के मापदंड होते हैं, उन मापदंडों पर अगर कोई संस्थान खरा नहीं उतरता है तो उसकी मान्यता रद्द होती है.”

वहीं एक बयान में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधायक आरएस पथानिया ने भी संस्थान की कथित ख़ामियों पर ज़ोर देते हुए कहा, “गुणवत्ता संख्या से ऊपर है. एनएमसी ने आवश्यक मानकों पर खरा न उतरने के कारण एसएमवीडीआईएमई की 50 एमबीबीएस सीटों की अनुमति रद्द की है. यह गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराता है. सभी प्रभावित छात्रों को अन्य केंद्र शाषित कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों पर स्थानांतरित किया जाएगा.”

वहीं गुरुवार को जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह से पूछा कि बीजेपी नेता कह रहे हैं कि यूनिवर्सिटी ने मानक पूरे नहीं किए हैं तब उमर अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का नाम लिए बिना कहा, “तब तो यह और भी गंभीर मसला है. यूनिवर्सिटी का नेतृत्व कौन कर रहा है और चांसलर कौन है? आपको उनसे भी कुछ सवाल पूछने चाहिए.” उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ही यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं.

उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य मंत्री सकीना मसूद इटू से कहा है कि वह इस मामले में तुरंत दख़ल दें और प्रभावित छात्रों के दाख़िले सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करवाएं.

प्रदर्शन करते लोग

‘मुद्दा ही ख़त्म कर दिया’

एनएमसी मेडिकल कॉलेजों की गुणवत्ता की निगरानी करती है और किसी भी कॉलेज को मेडिकल कोर्स शुरू करने से पहले निरीक्षण की जटिल और लंबी प्रक्रिया से गुज़रना होता है और तय मानकों पर खरा उतरना होता है.

कोर्स शुरू करने की अनुमति देने से पहले भी मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया जाता है.

देश में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहाँ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लिनिकल एक्सपोज़र की कमी के चलते एमबीबीएस कोर्स की अनुमति रद्द की है.

हालांकि, जम्मू का मामला कोई अपवाद नहीं लेकिन इसका राजनीतिक और सांप्रदायिक संदर्भ इसे असाधारण बनाता है.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एनएमसी पर निशाना साधते हुए कहा, “कॉलेज को कोर्स की अनुमति देने के पत्र जारी करने से पहले किसने जांच की थी?”

वहीं, उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी अध्यक्ष सत शर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी ने एनएमसी के निर्णय पर कोई जश्न नहीं मनाया है, उन्होंने कहा कि एनएमसी ने इंफ्रास्ट्रक्चर में ख़ामिया मिलने के बाद ही यह फ़ैसला लिया है.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मेडिकल कॉलेज में दाख़िलों को सांप्रदायिक रंग देकर इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा, “माता वैष्णो देवी के नाम पर खुले मेडिकल कॉलेज के बंद होने से जम्मू को क्या हासिल हुआ?”

Previous post राहुल गांधी का अंकिता भंडारी हत्या मामले में बीजेपी पर निशाना
Next post Russia Ukraine War: रूस ने हाइपरसोनिक मिसाइल से किया हमला, पोलैंड के पास यूक्रेनी शहर में मचाई तबाही

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *