मोमोज की लत बनी बड़ी भूल, नाबालिग ने 80 लाख के जेवर दुकानदार को सौंपे

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देवरिया। जनपद के रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मोमोज खाने की आदत एक नाबालिग के लिए भारी पड़ गई। ग्राम भगवानपुर तिवारी निवासी विमलेश मिश्रा ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उनके नाबालिग बेटे ने मोमोज खाने के लिए घर में सुरक्षित रखे सोने-चांदी के कई आभूषण मोमोज बेचने वाले दुकानदार को दे दिए। आभूषणों की कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है।
जब परिजनों को जेवरात गायब होने की जानकारी हुई तो खोजबीन शुरू की गई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और संबंधित दुकानदार समेत दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।
क्षेत्राधिकारी नगर संजय कुमार रेड्डी ने बताया कि तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की गहन जांच की जा रही है। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।

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बिहार का आदमी कैसे समझेगा? CJI ने आगे कहा कि आप यहां सर्विस देने के लिए हैं, डेटा इकट्ठा कर शेयर करने के लिए नहीं. कभी‑कभी हमें भी आपकी पॉलिसी समझने में दिक्कत होती है- तो बिहार के ग्रामीण हिस्सों में रहने वाले लोग क्या समझेंगे? CJI ने स्पष्ट किया कि अदालत यूज़र्स की निजता (Privacy) और सूचित सहमति (Informed Consent) पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेगी. डेटा‑विज्ञापन पर अदालत की चिंता: ‘दवा पूछते ही दवाओं के विज्ञापन आ जाते हैं' सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने एक व्यक्तिगत उदाहरण देते हुए कहा, 'डॉक्टर व्हाट्सऐप पर तीन दवाइयां भेजते हैं और पांच मिनट के भीतर उसी दवा से जुड़े विज्ञापनों की बाढ़ आ जाती है.' यह भी पढ़ें- दिल्ली मेट्रो के 6 नए कॉरिडोर, 84 नए स्टेशनों से चमकेगी राजधानी, गोल्डन-ग्रीन लाइन से जुड़ेगा शहर का हर कोना जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी गंभीर चिंता जताई इस मामले पर सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि DPDP Act सिर्फ प्राइवेसी की बात करता है, लेकिन हम यहां यूज़र्स की बिहेवियरल टेंडेंसीज को लेकर चिंतित हैं. आप लोगों के डिजिटल फुटप्रिंट का इस्तेमाल ऑनलाइन विज्ञापन के लिए कर रहे हैं. दुनिया भर में ऐसी कंपनियों पर गहन और इनोवेटिव निगरानी की ज़रूरत है. व्हाट्सऐप का पक्ष व्हाट्सऐप के वकील ने अदालत को बताया कि कंपनी ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को अन्य देशों के अनुरूप कर दिया है. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया. केस को तीन‑जजों की बेंच के सामने सुनवाई के लिए भेजने का आदेश दिया. जुर्माना और कानूनी लड़ाई दरअसल CCI ने नवंबर 2024 में व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन मानते हुए ₹213 करोड़ का जुर्माना लगाया था. आरोप लगा कि व्हाट्सऐप ने डॉमिनेंट पोज़िशन का दुरुपयोग किया और यूज़र्स को नई पॉलिसी स्वीकार करने के लिए मजबूर किया. NCLAT (जनवरी 2025) ने ‘डॉमिनेंस दुरुपयोग' वाला निष्कर्ष तो हटाया, लेकिन 213 करोड़ का जुर्माना बरकरार रखा. इसी विरोधाभास को चुनौती देते हुए मेटा सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. Next post आपकी पॉलिसी गुमराह करने वाली, हमें दिक्कत होती है तो बिहार का आदमी कैसे समझेगा…’ WhatsApp को SC की फटकार

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