Shaksgam Valley: शक्सगाम वैली के सवाल पर आने से पहले हम आपको आज एक छोटी कहानी सुनाते हैं. हम एक गांव की काल्पनिक तस्वीर खींचते हैं. इस गांव में शंकर, अरुण और साद बिन उमर तीन लोग रहते हैं. शंकर-अरुण एक ही परिवार से हैं लेकिन उनके परिवार के बीच रिश्ते बेहद खराब है. जमीन के बंटवारे से लेकर तमाम चीजों को लेकर उनके बीच विवाद है. कुछ जमीन ऐसी है जो कागजों में शंकर के नाम है लेकिन कब्जा अरुण का है. फिर अरुण ने उस जमीन को साद बिन के हाथों बेच दी. अब आप क्या कहेंगे. कानूनी रूप से यह जमीन किसकी है? कुछ ऐसी ही कहानी है शक्सगाम वैली की. चीन इस इलाके में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्टर के प्रोजेक्ट चला रहा है. इसको लेकर भारत ने आपत्ति जताई है. भारत की इस आपत्ति पर वही सीनाजोरी कर रहा है. वह कह रहा है कि यह उसका इलाका है. उसने पाकिस्तान के साथ सीमा समझौते के तहत यह इलाका हासिल किया था. इस कारण यह जमीन उसकी है और अपनी जमीन पर कुछ भी करने का हक रखता है.
कहां है शक्सगाम वैली?
वर्ष 1947 में देश के बंटवारे से पहले शक्सगाम वैली जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था. 1948 की सर्दियों में जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया. पूरे विवाद की जड़ यही पाकिस्तानी कब्जा है. पाकिस्तान ने फिर 1963 में चीन के साथ एक सीमा समझौता कर लिया. इस समझौते के तहत उसने अवैध कब्जे वाले कश्मीर के इस शक्सगाम वैली वाले इलाके को चीन को सौंप दिया है. इस पूरा इलाका करीब 5180 वर्ग किमी का है. यह सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में स्थित है. यह इलाका रणनीतिक रूप बेहद अहम है. क्योंकि यहां पर भारत, पाकिस्तान, चीन और यहां तक कि अफगानिस्तान और ईरान की सीमा सटती है. भारत ने चीन-पाकिस्तान के बीच 1963 में हुए समझौते को कभी मान्यता नहीं दी.
भारत का तर्क
भारत हमेशा से कहता है कि पाकिस्तान ने इसे अवैध रूप से कब्जाया हुआ है. ऐसे में उसको पास इस क्षेत्र को चीन को सौंपने का कोई अधिकार नहीं है. भारत का दावा है कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है. चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव यानी सीपेक प्रोजेक्ट भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करता है. यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान द्वारा अवैध कब्जे वाले क्षेत्र से गुजरता है.
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल के नौ जनवरी के बयान में इस प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताई थी. इसके बाद चीनी प्रवक्ता ने अपनी बात कही. जायसवाल ने कहा था कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है और 1963 का चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता पूरी तरह अवैध और अमान्य है. जायसवाल ने कहा था कि भारत ने कई बार चीन और पाकिस्तान को स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे संघ राज्य क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं.
भारत की आपत्ति पर चीनी प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि जिस क्षेत्र का आप जिक्र कर रहे हैं, वह चीन का है. अपने क्षेत्र में बुनियादी ढांचा निर्माण करना चीन का पूरा हक है. उन्होंने 1960 के दशक में चीन और पाकिस्तान के बीच हुए सीमा समझौते का हवाला देते हुए कहा कि यह दोनों संप्रभु देशों का अधिकार था. उन्होंने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को आर्थिक सहयोग पहल बताया, जिसका उद्देश्य स्थानीय सामाजिक-आर्थिक विकास और लोगों की आजीविका सुधारना है.
