राम मंदिर के बाद अयोध्या में बनेगा 8 एकड़ में कैंसर अस्पताल

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राम नगरी में दो सौ बेड का सुपर स्पेशियलिटी कैंसर अस्पताल बनाने का रास्ता साफ हो गया है। यह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल उपचार की सभी एडवांस मेडिकल डिवाइस से लैस रहेगा। अयोध्या के आसपास के जनपदों में इसकी शाखाएं होंगी, जहां जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर मरीजों को यहां रेफर किया जाएगा। इस अस्पताल के निर्माण का काम श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की पहल पर प्रतिष्ठित उद्योगपति रतन टाटा की प्रेरणा से गठित नमो फाउंडेशन बार कैंसर संस्थान के द्वारा किया जाएगा। इस अस्पताल के लिए आठ एकड़ जमीन का नि:शुल्क दान करने के लिए अयोध्या राज परिवार ने सहमति जता दी है।

इस अस्पताल के निर्माण के लिए जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ने भी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) दे दी है। निजी क्षेत्र के इस कैंसर अस्पताल के बारे में आवश्यक जानकारी देते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पदेन सदस्य व भवन-निर्माण समिति चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र ने बताया कि उम्मीद की जानी चाहिए कि यह अस्पताल दो वर्ष में पूर्ण हो जाए और ओपीडी यहां तत्काल शुरू हो जाएगा। बताया गया कि इस अस्पताल मरीजों का न्यूनतम दर पर इलाज संभव हो सकेगा। इसकी पूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हो गयी है। सभी औपचारिकताओं के पूरा होते ही नमो फाउंडेशन की ओर से मेडिकल डिवाइसों की खरीददारी शुरू करा दी जाएगी। बताया गया कि अधिकांश मेडिकल डिवाइसेज विदेशों से मंगाई जानी है।

अयोध्या राज परिवार व नमो फाउंडेशन के बीच शीघ्र होगा एमओयू पर हस्ताक्षर

अयोध्या राज परिवार के वरिष्ठ सदस्य डा. शैलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र व युवा साहित्यकार यतीन्द्र मिश्र ने बताया कि दो सौ बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए आवश्यक भूमि देने पर सहमति बन गई है। इसकी औपचारिकताओं को पूरा कराने के लिए वह दिल्ली में स्थित नमो फाउंडेशन के मुख्यालय पहुंचे है। बताया गया कि शीघ्र ही एमओयू के जरिए उभयपक्षों के मध्य अनुबंध पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। इसके उपरांत अवशेष कार्यवाही शुरू हो जाएगी।

कैंसर अस्पताल की भूमि का सर्वेक्षण करेगी एएसआई

नमो फाउंडेशन बार कैंसर संस्थान के लिए अयोध्या राज परिवार की ओर से सूर्य कुंड दर्शन नगर के निकट जमीन चिह्नित की गई है। इसके अलावा दूसरी साईट भी दिखाई गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पदेन सदस्य व भवन-निर्माण समिति चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र के अनुसार इस भूमि का सर्वेक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के द्वारा किया जाएगा। उन्होंने आशा जताई है कि एएसआई की ओर से सर्वेक्षण रिपोर्ट इसी जनवरी माह में प्रदान कर दी जाएगी।

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