पैसों के चलते चुनाव लड़ने से इनकार करने वालीं न‍िर्मला सीतारमण पर 41.5 लाख का कर्ज – Jansatta

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संपत्ति के मामले में देश की सबसे अमीर पार्टी की नेता निर्मला सीतामरण ने पैसों की कमी के कारण चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चुनाव लड़ने की अटकलों को विराम देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेगी क्योंकि उनके पास चुनाव लड़ने लायक पैसे नहीं हैं। Times Now Summit 2024 में बातचीत के दौरान सीतारमण ने बताया कि उन्हें भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आंध्र प्रदेश या तमिलनाडु से चुनाव लड़ने का विकल्प दिया था।
सीतारमण ने कहा कि “पार्टी ने मुझसे पूछा था… एक सप्ताह या दस दिन तक सोचने के बाद, मैंने मना कर दिया। मेरे पास चुनाव लड़ने के लिए उतने पैसे नहीं हैं। मुझे भी परेशानी होगी, चाहे वो आंध्र प्रदेश हो या तमिलनाडु। जीतने सुनिश्चित करने वाले अलग-अलग मानदंडों का भी प्रश्न है… क्या आप इस समुदाय से हैं या आप उस धर्म से हैं? क्या आप यहीं से हैं? मैंने कहा नहीं, मुझे नहीं लगता कि मैं ऐसा कर पाऊंगी।”
जब उनसे पूछा गया कि देश के वित्त मंत्री के पास लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त धन कैसे नहीं है, तो उन्होंने कहा, “मेरा वेतन, मेरी कमाई, मेरी बचत मेरी है, भारत की संचित निधि नहीं…”
भाजपा नेता निर्मला सीतारमण राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल जुलाई 2016 में शुरू हुआ था। निर्मला सीतारमण द्वारा दाखिल हलफनामे के मुताबिक, उनके पास तेलंगाना में 99 लाख 36 हजार रुपये का एक मकान है। तेलंगाना में ही 16 लाख रुपये से ज्यादा की गैर कृषि भूमि है। मकान को सीतारमण और उनके पति पराकाला प्रभाकर, दोनों ने मिलकर खरीदा था। वहीं जमीन का मालिकाना हक सिर्फ सीतारमण के पास है।
सीतारमण के मुताबिक, उनके पास 28 हजार रुपये का एक स्कूटर है। 7 लाख 87 हजार 500 रुपये के गहने हैं, जिसमें 315 ग्राम सोना और दो किलो चांदी शामिल है। वित्तमंत्री ने हलफनामें में बताया था कि उनके बैंक में 34,585 रुपये हैं, कैश 20,100 रुपये है।
निर्मला सीताराम और उनके पति पराकला प्रभाकर पर 8 लाख 48 हजार 100 का होम लोन है। सीतारमण पर 10 लाख से ज्यादा का ओवरड्राफ्ट और 22 लाख 85 हजार 100 का मॉर्गेज लोन है।
निर्मला सीतारमण के पति पराकला प्रभाकर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं। हाल में उन्होंने चुनावी बॉन्ड को भारत का ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला बताया था। प्रभाकर का अनुमान है कि ‘चुनावी बांड का मुद्दा’ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को भारी पड़ेगा।

‘रिपोर्टर टीवी’ नाम के न्यूज चैनल से बातचीत में प्रभाकर ने कहा, “चुनावी बांड का मुद्दा आज जितना है उससे कहीं ज़्यादा तेजी से बढ़ेगा। हर कोई अब यह समझ रहा है कि यह न सिर्फ भारत का बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला है। इस मुद्दे के कारण जनता इस सरकार को कड़ी सजा देंगी।” चुनाव आयोग (ECI) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा के अनुसार, चुनावी बांड का सबसे ज्यादा लाभ भाजपा को ही मिला है।
12 अप्रैल, 2019 से 15 फरवरी, 2024 के बीच भाजपा को चुनावी बांड के जरिए 6,986.5 करोड़ रुपये मिले, इसके बाद पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (1,397 करोड़ रुपये), कांग्रेस (1,334 करोड़ रुपये) और भारत राष्ट्र समिति (1,322 करोड़ रुपये) का नंबर आता है।
देखें, टॉप-3 पार्टियों के टॉप-5 डोनर कौन हैं:
बॉन्ड के अलावा चुनावी ट्रस्ट और दूसरे माध्यम से मिलने वाले चंदे के मामले में भी भाजपा ही अव्वल है। संपत्ति के मामले में भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे अमीर पार्टी है। 2023 तक उसके पास 70.4 अरब रुपए की नकदी और संपत्ति थी। (विस्तार से पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें) 
निर्मला सीतारमण की बेटी परकला वांगमयी जर्नलिस्ट हैं। उन्‍होंने विदेश से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और देश-विदेश के कई मीडिया संस्थानों के लिए काम कर चुकी हैं। पिछले साल जून में परकला वांगमयी ने बेंगलुरु स्थित अपने घर से शादी की थी। समारोह बहुत ही सादा था। सिर्फ परिवार के लोग और करीबी दोस्त ही शादी में शामिल हुए थे। वांगमयी के पति का नाम प्रतीक है।
राजनीतिक दल चुनाव पर कितना खर्च करेंगे इसे लेकर कोई सीमा तय नहीं है। लेकिन चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के खर्च करने की सीमा तय की है। लोकसभा चुनाव में कोई उम्मीदवार 50 लाख से 70 लाख रुपये के बीच खर्च कर सकती है। अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम को छोड़कर, सभी राज्यों के उम्मीदवार चुनाव प्रचार पर अधिकतम 70 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं।

अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम के लिए 54 लाख रुपये का कैप रखा गया है। वहीं दिल्ली से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार 70 लाख रुपये और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के उम्मीदवार 54 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं।

चुनाव खर्च के लिए उम्मीदवारों को अलग से एक खाता रखना होता है। कानून के तहत चुनाव में कितना खर्च हुआ इसकी जानकारी देनी होती है। Representation of the People Act, 1951 की धारा 10A के तहत खर्च का हिसाब न रखने या कैप से अधिक खर्च करने पर तीन साल तक के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। सभी उम्मीदवारों को चुनाव समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर अपना खर्च विवरण चुनाव आयोग को जमा करना होता।

वहीं सभी पंजीकृत राजनीतिक दलों को लोकसभा चुनाव समाप्त होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव आयोग को अपने चुनाव खर्च का ब्यौरा जमा करना होता।

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