मुंबई मेयर पद के चुनाव को लेकर सियासी घमासान के बीच एक बड़ा मोड़ सामने आया है. बीएमसी चुनाव में मामूली बहुमत वाली महायुति सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिसे ठाकरे गुट की रणनीति पर सीधा वार माना जा रहा है. दरअसल शिवसेना (यूबीटी) गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पिछले दिनों कहा कहा था कि ‘अगर भगवान की इच्छा होगी तो महापौर भी अपना होगा.’ हालांकि, उनके इस बयान के बाद बीजेपी और शिंदे गुट अलर्ट मोड में आ गया और इस ताजा कदम को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है.
मुंबई महानगरपालिका की सत्ता की लड़ाई में राज्य सरकार ने एक अहम राजनीतिक चाल चली है. आगामी मेयर चुनाव की प्रक्रिया में ‘पीठासीन अधिकारी’ (Presiding Officer) की नियुक्ति से जुड़े पुराने नियम में बदलाव कर दिया गया है. नई अधिसूचना के मुताबिक अब महापौर चुनाव से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का संचालन नगर आयुक्त या सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे. सरकार के इस फैसले के बाद सत्ताधारी और विपक्ष के बीच पहले ही दिन टकराव के संकेत मिल रहे हैं.
अब तक की परंपरा के अनुसार, नई नगर परिषद की पहली बैठक में मेयर के चयन तक कार्यवाही देखने के लिए पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति होती थी. यह जिम्मेदारी या तो निवर्तमान महापौर को या फिर सदन के सबसे वरिष्ठ नगरसेवक को सौंपी जाती थी.
