क्या निर्मला सीतारमण ने AI ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर को किया प्रमोट, जानें वायरल दावे का सच

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों एक वायरल वीडियो तेजी से फैल रहा है, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को AI आधारित ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर का प्रमोशन करते और आम नागरिकों को निवेश करने की सलाह देते दिखाया गया है। वीडियो में मंत्री जी की आवाज और चेहरा इस्तेमाल कर एक नकली ऐप या सॉफ्टवेयर को प्रमोट किया गया है, जिसमें भारी मुनाफे का लालच दिया जा रहा है। लाखों यूजर्स ने इसे शेयर किया है और कई लोग इस पर भरोसा कर लिंक पर क्लिक करने की सोच रहे हैं। इस वीडियो की शुरुआत फेसबुक और एक्स पर हुई थी, जहां इसे असली सरकारी प्रमोशन के रूप में पेश किया जा रहा था।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाले पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट ने इस वीडियो की गहन जांच के बाद इसे पूरी तरह फर्जी करार दिया है। PIB ने कहा कि यह वीडियो डिजिटली अल्टर्ड यानी मॉर्फ्ड है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मंत्री जी की छवि और आवाज को मिलाया गया है। असल में वित्त मंत्री ने कभी भी किसी AI ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर का समर्थन नहीं किया है और न ही कोई निवेश सलाह दी है। पीआईबी फैक्ट चेक ने अपने आधिकारिक अकाउंट से पोस्ट कर चेतावनी जारी की कि यह एक स्कैम का हिस्सा है।

फैक्ट चेक में पाया गया कि वीडियो की लंबाई लगभग 27 सेकंड है और इसमें इस्तेमाल की गई क्लिप पुरानी इंटरव्यू या भाषण से ली गई है, जिसे एआई टूल्स से बदल दिया गया। इस फर्जीवाड़े का मकसद लोगों को फिशिंग लिंक्स पर ले जाना और उनके बैंक डिटेल्स चुराना है। पीआईबी ने जनता से अपील की है कि ऐसे वीडियो पर भरोसा न करें और तुरंत रिपोर्ट करें। वित्त मंत्रालय और PIB दोनों ने साफ किया कि सरकार किसी भी प्राइवेट ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को प्रमोट नहीं करती। अगर कोई वीडियो-मैसेज मंत्री या किसी सरकारी अधिकारी के नाम से निवेश की बात करे तो उसे तुरंत नजरअंदाज करें।

साथ ही, सलाह दी गई है कि संदिग्ध लिंक्स पर कभी क्लिक न करें। इससे फिशिंग अटैक हो सकता है और पर्सनल डेटा चोरी होने का खतरा है। पीआईबी ने याद दिलाया कि पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई फर्जी वीडियो सामने आए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों को गलत तरीके से दिखाया गया। सरकार ने साइबर क्राइम के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है और नागरिकों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रही है। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से डीपफेक वीडियो का खतरा बढ़ गया है। आम नागरिकों को सलाह है कि सरकारी जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट्स पर ही चेक करें। अगर कोई शक हो तो फैक्ट चेक पोर्टल पर रिपोर्ट करें। वित्त मंत्रालय ने भी सभी को सतर्क रहने की अपील की है।

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