योजनाओं पर कमीशन का मकड़ जाल, जनता परेशान: ऋषि 

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देवरिया। आजाद हिन्द सेना के संस्थापक व अध्यक्ष अधिवक्ता ऋषि कुमार पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि जनपद में जनप्रतिनिधियों, अफसरों और ठेकेदारों के नापाक गठजोड़ के मकड़जाल में सरकारी योजनाएं उलझती जा रही हैं। हालात यह हैं कि 100 रुपये के काम में धरातल पर मुश्किल से 40 रुपये ही खर्च होते दिखाई देते हैं। बाकी पैसा कमीशन और बंद कमरों की सौदेबाजी में गुम हो जाता है।
नतीजा साफ है—सड़कें कुछ ही महीनों में उखड़ जाती हैं, नई बनी इमारतों की दीवारें झरने लगती हैं और योजनाएं कागजों में चमकती रहती हैं। जब काम की पोल खुलती है तो जांच का खेल शुरू होता है। समितियां बनती हैं, फाइलें चलती हैं और अंत में जनता के माथे पर ही एक और खर्च का बोझ लाद दिया जाता है। उन्होंने बताया कि अब तो स्थिति यह है कि बड़े बजट के ठेके-पट्टे भी स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि राजधानी से ही तय होकर आते हैं। हाल ही में ठेकेदार संघ के अध्यक्ष ने भी आरोप लगाया था कि कई जगहों पर विधायक बिना कमीशन के काम होने ही नहीं देते। जब विवाद बढ़ा तो कुछ माननीयों ने अपने ही पसंदीदा ठेकेदार खड़े कर दिए, जो हर बड़े काम में नजर आने लगे हैं।
क्षेत्र में चर्चा है कि रुद्रपुर के माननीय से जुड़े ठेकेदारों का कई जगहों पर दबदबा बन गया है। इधर जनता यूजीसी, गैस किल्लत और रोजमर्रा की समस्याओं में उलझी हुई है, उधर सत्ता के आसपास घूमने वाले लोग विकास के नाम पर जनता के पैसों पर हाथ साफ करने में लगे हैं।
सवाल यह है कि जब योजनाएं ही कमीशन के जाल में फंस जाएंगी तो विकास का पहिया कैसे आगे बढ़ेगा। जरूरत इस बात की है कि व्यवस्था में पारदर्शिता आए और जनता के पैसे का हिसाब जनता को मिले।

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