उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक स्थलों के विकास को लेकर एक बड़ी मांग देश की संसद में उठी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर ने लोकसभा में उत्तर प्रदेश में 76वें जिले के गठन की मांग कर दी है। उन्होंने मांग की कि आगरा जनपद के बाह-बटेश्वर क्षेत्र को काटकर ‘अटल नगर’ के नाम से एक नया जिला घोषित किया जाए।
सांसद राजकुमार चाहर ने सदन में तर्क दिया कि बाह-बटेश्वर केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक गांव है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को नया जिला बनाना अटल जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इसके अलावा, बटेश्वर का धार्मिक महत्व भी वैश्विक स्तर पर सर्वोपरि है। यह जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी की तपोस्थली ‘सोरीपुर-बटेश्वर’ के रूप में विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित 101 शिव मंदिरों की श्रृंखला और यमुना का उल्टा प्रवाह इसे आध्यात्मिक रूप से अद्वितीय बनाता है।
सांसद ने जिले की मांग के पीछे व्यावहारिक कारणों को भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि बाह और बटेश्वर क्षेत्र आगरा जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। इतनी अधिक दूरी के कारण स्थानीय निवासियों को छोटे-मोटे प्रशासनिक कार्यों, तहसील संबंधी विवादों और पुलिस मुख्यालय तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आगरा जैसे विशाल जिले के अंतिम छोर पर होने के कारण सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन भी उस गति से नहीं हो पाता, जितनी आवश्यकता है।
राजकुमार चाहर ने जोर देते हुए कहा कि बाह-बटेश्वर में पर्यटन की अपार संभावनाएं छिपी हुई हैं। यदि इसे जिला घोषित किया जाता है, तो यहाँ प्रशासनिक संसाधन और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विकास होगा। इससे न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे। वर्तमान में संसाधनों के अभाव के कारण यह क्षेत्र अपनी उस पहचान से वंचित है, जिसका वह वास्तव में हकदार है।
लोकसभा में उठी इस मांग के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यदि केंद्र और राज्य सरकार इस दिशा में कदम उठाती हैं, तो आगरा का विभाजन कर ‘अटल नगर’ का गठन यूपी के नक्शे पर एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। स्थानीय जनता लंबे समय से बाह को जिला बनाने की मांग करती रही है, जिसे अब संसद के पटल पर मजबूती से रखा गया है। मांग सत्ताधारी दल की तरफ से ही उठी है और अटल जी का नाम जुड़ा है ऐसे में मांग के पूरा होने की संभावना भी लोगों को दिखाई दे रही है।
