देवरिया। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में समानता और न्याय की बात तो हमेशा की जाती रही, लेकिन राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लंबे समय तक सीमित रही। अब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ इस स्थिति को बदलने की दिशा में बड़ा और निर्णायक कदम साबित हो रहा है। समाजसेवी रजनी के अनुसार, यह कानून महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व ही नहीं, बल्कि निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति भी देगा।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देकर उन्हें नीति निर्माण में सक्रिय भागीदारी दिलाना है। अब महिलाएं केवल दर्शक नहीं रहेंगी, बल्कि देश की नीतियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
रजनी ने बताया कि आरक्षण लागू होने से महिलाओं को चुनाव लड़ने के अधिक अवसर मिलेंगे और राजनीतिक दलों में उनका महत्व बढ़ेगा। इससे नीतियों में महिला दृष्टिकोण शामिल होगा, जो समाज को अधिक संतुलित और समावेशी बनाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं अब राजनीति को अपने अधिकार और कर्तव्य के रूप में देखेंगी। शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक भागीदारी के जरिए वे स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर तक नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं।
रजनी के अनुसार, पंचायत और नगर निकाय से शुरुआत कर, सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहकर और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर महिलाएं अपनी पहचान मजबूत कर सकती हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से समाज में सकारात्मक बदलाव आएंगे और देश विकास की नई दिशा में आगे बढ़ेगा।
