देवरिया। मैं यहां सिर्फ एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीद बनकर खड़ी हूं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पारित होना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ है, जिसका इंतजार दशकों से किया जा रहा था। यह कानून केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने का नहीं, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने की मुख्यधारा में लाने का सशक्त माध्यम है। उक्त बातें शहर के लोक निर्माण विभाग में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में बीआरडीपीजी कालेज की सहायक प्राध्यापक डा भावना सिन्हा ने कहीं।
उन्होंने कहा कि अक्सर महिलाओं की राजनीति में भागीदारी को प्रतीकात्मक माना जाता रहा है, लेकिन अब यह सोच बदलने वाली है। पंचायत से लेकर संसद तक जब महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तो नीतियों में संवेदनशीलता और समावेशिता स्वतः आएगी। महिलाएं अब केवल वोटर नहीं, बल्कि नीति निर्धारक की भूमिका में दिखेंगी।
वंदन शब्द अपने आप में सम्मान और अधिकार का प्रतीक है। यह कोई दान नहीं, बल्कि वह हक है जो लंबे समय से लंबित था। यह अधिनियम देश की बेटियों को यह विश्वास दिलाता है कि अब उनके लिए संसद के दरवाजे पूरी तरह खुले हैं।
आज की युवतियां जब संसद में महिलाओं की मजबूत उपस्थिति देखेंगी, तो उनके सपने भी बड़े होंगे। वे नेतृत्व की ओर कदम बढ़ाएंगी और ग्लास सीलिंग को तोड़ेंगी।
अब समय आ गया है बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के साथ महिलाओं को राजनीति में लाओ और संसद बचाओ का नारा बुलंद करने का। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष अलका सिंह, स्वेता जायसवाल सहित अन्य महिलाएं उपस्थित रहे।
