लखनऊ विश्वविद्यालय: 25 कॉलेजों के 45 कोर्सों को मिली संबद्धता, 169 शिक्षकों का प्रमोशन

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लखनऊ विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए संबद्ध 25 कॉलेजों में संचालित 45 पाठ्यक्रमों को अस्थायी संबद्धता प्रदान कर दी है। इनमें खुन खुन जी गर्ल्स डिग्री कॉलेज और कालीचरण पीजी कॉलेज समेत कई संस्थान शामिल हैं। यह निर्णय शुक्रवार को कुलपति प्रो. जेपी सैनी की अध्यक्षता में मंथन हाल में आयोजित कार्य परिषद की बैठक में लिया गया।

45 पाठ्यक्रमों को मिली अस्थायी संबद्धता

बैठक में विभिन्न कॉलेजों में संचालित 45 पाठ्यक्रमों की अस्थायी संबद्धता के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इससे विद्यार्थियों को आगामी सत्र में बिना किसी बाधा के अध्ययन का अवसर मिलेगा।

169 शिक्षकों की पदोन्नति को मिली स्वीकृति

कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय के 169 शिक्षकों की पदोन्नति को भी मंजूरी प्रदान की। इनमें 56 वरिष्ठ आचार्य, 54 आचार्य, 15 सह आचार्य तथा 44 सहायक आचार्य पदों पर पदोन्नति शामिल है। इसके साथ ही शोध एवं संस्थागत परियोजनाओं के बेहतर संचालन के लिए परियोजना क्रियान्वयन एवं निधि प्रबंधन संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने का निर्णय भी लिया गया।

पाठ्यक्रम निर्माण में पूर्व छात्र और उद्योग जगत की भागीदारी

विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता, उपयोगिता और प्रासंगिकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभागीय अध्ययन मंडलों में दो पूर्व छात्रों, दो वर्तमान विद्यार्थियों और एक उद्योग प्रतिनिधि को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल करने का फैसला किया है।

विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे पाठ्यक्रम निर्माण में पूर्व विद्यार्थियों के अनुभव, वर्तमान विद्यार्थियों की अपेक्षाएं और उद्योग जगत की जरूरतों को शामिल किया जा सकेगा। उद्योग प्रतिनिधि रोजगार बाजार, कौशल विकास और व्यावसायिक अवसरों से जुड़े सुझाव देंगे।

CSR सहयोग से छात्रवृत्ति और फेलोशिप को बढ़ावा

लखनऊ विश्वविद्यालय ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) सहयोग के लिए नए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इसके तहत मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति एवं फेलोशिप, शोध एवं विकास परियोजनाएं, उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना, आधारभूत संरचना विकास, स्टार्टअप एवं नवाचार सहयोग, संकाय विकास और चेयर प्रोफेसरशिप जैसे क्षेत्रों में सहयोग लिया जाएगा।

विश्वविद्यालय के अनुसार, CSR के तहत सहयोग करने वाली कंपनियां पार्ट-टाइम पीएचडी, उद्योग-प्रायोजित प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, शोध परियोजनाओं, नवाचार, पेटेंट, तकनीकी समाधान और कुशल मानव संसाधन विकास जैसे कार्यक्रमों से जुड़ सकेंगी।

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