बनारस के मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई की मूर्ति को लेकर विवाद, स्थानीय लोग कैसे देख रहे हैं?- ग्राउंड रिपोर्ट

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उत्तर प्रदेश का वाराणसी शहर इन दिनों सुर्ख़ियों में बना हुआ है.

हिन्दुओं की धार्मिक नगरी के रूप में चर्चित वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है. वह 2024 के लोकसभा चुनाव में यहां से तीसरी बार निर्वाचित हुए हैं.

प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने की वजह से वाराणसी में विकास की कई परियोजनाएं चल रही हैं.

इसी कड़ी में ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट का भी पुनर्विकास किया जा रहा है.

स्थानीय लोगों का दावा है कि इसके लिए पहले पुराने ढांचों को तोड़ा गया है. इस तोड़-फोड़ को लेकर स्थानीय लोग नाराज़ भी हैं.

अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति

कई लोगों का आरोप है कि वहां मौजूद इंदौर के पूर्व राजघराने की अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति भी टूट गई है.

लेकिन वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी इससे इनकार करते हैं. उनका कहना है कि मूर्ति सुरक्षित रखी गई है, जिसे बाद में स्थापित कर दिया जाएगा.

'दोस्त मुल्कों से मांगना पड़ा कर्ज' शहबाज शरीफ ने भावुक होते हुए कहा, 'मैं आपको कैसे बताऊं कि हमने किन-किन दोस्त मुल्कों के दर पर जाकर कर्ज की दरखास्तें दीं. उन मुल्कों ने हमें मायूस तो नहीं किया, लेकिन जो कर्ज लेने जाता है, उसका सिर हमेशा झुका रहता है.' 'कर्ज मांगने पर इज्जत से समझौता करना पड़ता है' शहबाज ने स्पष्ट शब्दों में माना कि जब कोई देश आर्थिक मदद मांगता है, तो उसे अपनी 'इज्जत-ए-नफ्स' (आत्मसम्मान) के साथ समझौता करना पड़ता है और कर्ज देने वालों की ऐसी शर्तें (Obligations) माननी पड़ती हैं, जिनका बोझ उठाना नामुमकिन होता है. यह भी पढ़ें- मुनीर ने ट्रंप को दिखाया ठेंगा! ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका को ही दे डाली नसीहत गौरतलब है कि शहबाज की यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान के आर्थिक हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और पारंपरिक सहयोगी देश भी अब केवल मदद नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और नवाचार आधारित साझेदारी की उम्मीद कर रहे हैं. पहले भी कर चुके ऐसी बातें शरीफ पहले भी कह चुके हैं कि वे दुनिया में भीख का कटोरा लेकर घूमना नहीं चाहते, लेकिन इस बार उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान को जिस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, वह बेहद शर्मनाक और असहज करने वाली है. कर्ज तले दबा पाकिस्तान पाकिस्तान न केवल IMF और विश्व बैंक का कर्जदार है, बल्कि वह चीन और सऊदी अरब से लिए गए भारी कर्ज के बोझ के तले दबा है. दिसंबर 2025 तक पाकिस्तान का कुल विदेशी ऋण लगभग 52.366 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है. Previous post हाथ फैलाया, सिर झुकाया, शर्मिंदगी उठाई.. शहबाज शरीफ का बड़ा कुबूलनामा, खुद बताया- भीख मांगना PAK की मजबूरी
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