देवरिया । केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाले केंद्रीय बजट 2026 से करदाताओं, निवेशकों और व्यापारिक वर्ग को बड़ी उम्मीदें हैं। चार्टर्ड एकाउंटेंट रूपक अग्रवाल ने देश की अर्थव्यवस्था और कर प्रणाली को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं पर अपना विश्लेषण साझा किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष कर सुधार के तहत मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी, न्यू टैक्स रिजीम को और सरल बनाने तथा 80सी व 80डी की सीमाओं पर पुनर्विचार आवश्यक है।
सोने-चांदी के बाजार पर टिप्पणी करते हुए सीए अग्रवाल ने बताया कि बजट से पहले कीमती धातुओं में अस्थिरता का प्रमुख कारण कस्टम्स ड्यूटी में संभावित कटौती की उम्मीद, निवेशकों की प्रॉफिट बुकिंग, डॉलर की मजबूती और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव हैं, जिनका असर एम सी एक्स पर देखने को मिला है।
उन्होंने आर्थिक विकास के लिए एल टी सी जी सीमा बढ़ाने और एम एस एम ई सेक्टर को प्रोत्साहन देने की वकालत की, जिससे मेक इन इंडिया और शेयर बाजार को मजबूती मिलेगी। साथ ही व्यापारिक सुगमता पर जोर देते हुए कर प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता बताई। आगे कहा कि सरल कर व्यवस्था और सुगम व्यापारिक नीतियां ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं।
