प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नए ऑफिस का उद्धाटन किया। इसके बाद उन्होंने संबोधन भी दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ क्यों रखा गया। इसके साथ ही उन्होंने इसके पीछे के दर्शन और संकल्प के बारे में भी बताया। पीएम मोदी ने कहाकि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है। नाम बदलने के पीछे स्वतंत्र भारत की पहचान है। उन्होंने आगे कहाकि सेवा की भावना ही भारत की पहचान है। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक निर्णय, नीतियां बनी लेकिन यह भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थी। इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आज जब भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, आज जब भारत अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की नई गाथा लिख रहा है, आज जब भारत नए-नए ट्रेड समझौते कर संभावनाओं के नए दरवाजे खुल रहे हैं। जब देश संतृप्ति के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है तो सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों में आप सबके काम की नई गति और आपका नया आत्मविश्वास देश के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें जहां ब्रिटिश हुकूमत की सोच को लागू करने के लिए बनी थीं। वहीं, आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे वह किसी महाराजा की सोच को नहीं 140 करोड़ देशवासियों की सोच को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। प्रधानमंत्री ने आगे कहाकि इस बदलाव के बीच निश्चित तौर पर पुराने भवन में बिताए गए वर्षों की स्मृतियां हमारे साथ रहेंगी। अलग-अलग समय पर वहां से कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए, वहां से देश को नई दिशा मिली है। वह परिसर, वह इमारत भारत के इतिहास का अमर हिस्सा है इसलिए हमने उस भवन को देश के लिए समर्पित म्यूजियम बनाने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि 2014 में देश ने तय किया कि गुलामी की मानसिकता अब और नहीं चलेगी। हमने गुलामी की इस मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया, हमने वीरों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया। हमने पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया। रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था, यह सत्ता के मिजाज़ को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था।
