देवरिया। पशुधन प्रसार अधिकारी निशाकांत तिवारी ने कहा कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में घरेलू ईंधन की पूर्ति के लिए पशुपालन एक प्रभावी और टिकाऊ विकल्प बन सकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में एलपीजी गैस पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन स्रोतों पर ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि गांवों में पशुओं के गोबर का उपयोग लंबे समय से उपले बनाकर ईंधन के रूप में किया जाता रहा है, जो खाना पकाने के लिए सस्ता और सहज उपलब्ध साधन है। इसके अलावा गोबर से बायोगैस प्लांट के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा भी प्राप्त की जा सकती है।
निशाकांत तिवारी ने बताया कि बायोगैस से रसोई तक पाइप के माध्यम से ईंधन पहुंचाया जा सकता है, जिससे धुआं नहीं होता और गैस सिलेंडर पर होने वाला खर्च भी कम होता है। यह पशु अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन के साथ पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी सहायक है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस प्लांट को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है, ताकि घरेलू ईंधन की समस्या का समाधान हो सके और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके।
