“साल 2004, मैं वाराणसी में STF का प्रभारी था। उस दौरान मुख्तार का रसूख पीक पर चल रहा था। राजनीतिक कद बहुत बड़ा हो चुका था। उसके पास सैकड़ों हथियार, अवैध उगाही, पूर्वांचल में उठने वाला हर ठेका या तो उसके नाम पर था या उसकी हिस्सेदारी थी। कई फर्जी नामों पर हथियारों के लाइसेंस ले लिए गए थे। मुख्तार के खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई नहीं था।
इसी बीच हमने सर्विलांस से पूर्वांचल के बदमाशों की रेकी के
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