लोकसभा चुनाव 2024 पर‍िणाम: बीजेपी की लगातार जीत पर क्‍या कहता है लोकनीत‍ि-सीएसडीएस सर्वे, जान‍िए – Jansatta

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लोकसभा चुनाव 2024 के एग्जिट पोल्‍स नतीजों की मानें तो बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बना रही है। इन नतीजों की असल‍ियत चार जून को सामने होगी, लेकि‍न 2014 और 2019 में लगातार बीजेपी को सत्‍ता द‍िलाने के पीछे क‍िस वर्ग का समर्थन सबसे ज्‍यादा काम आया है? इस सवाल का जवाब सीडीएस-लोकनीति सर्वे के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है।
इसके मुताबिक, भाजपा ने गैर-सवर्ण जातियों में अच्छा समर्थन जुटाया है। 1996 के चुनावों में सवर्ण जातियों के बीच वोट शेयर के मामले में बीजेपी कांग्रेस से आगे निकल गई। लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) मतदाताओं के बीच समर्थन के मामले में कांग्रेस भाजपा से आगे थी। 1996 में, ओबीसी, एससी और एसटी समूहों के बीच भाजपा का वोट शेयर 54%, 40% और गैर एससी-एसटी-ओबीसी मतदाताओं के बीच 60% था।
2014 के चुनावों में हालात काफी हद तक बदल गए जब भाजपा हर सामाजिक वर्ग का समर्थन जुटाने में कांग्रेस से आगे निकल गई। 2019 में बीजेपी की पकड़ और बढ़ गई। 2019 के चुनाव में बीजेपी को सवर्णों का लगभग 60% वोट, ओबीसी का लगभग 45%, एससी का लगभग 35% और एसटी का लगभग 40% वोट शेयर मिला।
एक्सिस माई इंडिया द्वारा प्रकाशित 2019 एग्जिट पोल के आंकड़ों में साफ देखा जा सकता है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए समर्थन विभिन्न आय श्रेणियों में काफी हद तक स्थिर है और भाजपा सभी वर्गों में आगे है। एक्सिस माई इंडिया ने अपने सर्वे में 31,000 रुपये और उससे अधिक के मासिक खर्च को हाई इनकम के रूप में लिया है।
सीएसडीएस-लोकनीति डेटा के मुताबिक भाजपा को अमीर वर्गों के बीच फायदा मिलता दिख रहा है। 2019 के लोकनीति सीएसडीएस नेशनल इलेक्शन स्टडी सर्वे के मुताबिक, बीजेपी को अपर-मिडिल क्लास वर्गके बीच 44% वोट शेयर मिला। वहीं, कांग्रेस के लिए यह आंकड़ा 20% का था।
सीएसडीएस-लोकनीति के मुताबिक विभिन्न आय वर्ग के लोगों के बीच बीजेपी-कांग्रेस का वोट शेयर
मिडिल क्लास आय वर्ग की बात की जाये इनके बीच बीजेपी को 38%, कांग्रेस को 21% वोट शेयर मिला। लोअर क्लास के बीच बीजेपी को 36% और कांग्रेस को 21% वोट शेयर मिला। वहीं, गरीबों के बीच बीजेपी को 36% और कांग्रेस को 17% वोट शेयर मिला।
एक्सिस माई इंडिया पोस्ट पोल सर्वे के मुताबिक विभिन्न आय वर्ग के लोगों के बीच बीजेपी-कांग्रेस का वोट शेयर
मध्य प्रदेश, गुजरात और असम में कुल 69 संसदीय क्षेत्र हैं, जिनमें से वर्तमान में 63 पर भाजपा का कब्जा है और उसका सीट शेयर 91.3% है। इन राज्यों में कुल विधानसभा क्षेत्रों का 70.4% हिस्सा भी बीजेपी के पास है। इन राज्यों पर भाजपा की मजबूत पकड़ का मुख्य कारण मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का कमजोर होना है। हालांकि, एमपी और गुजरात की तुलना में असम पर भाजपा की पकड़ अपेक्षाकृत कमजोर है। 2019 में पार्टी का वोट शेयर गुजरात और मध्य प्रदेश में 62.2% और 58% वहीं, असम में 36.1% था।
80 लोकसभा क्षेत्र वाले उत्तर प्रदेश में 2014 में भाजपा ने 71 क्षेत्रों में जीत हासिल की थी। ​​पार्टी ने 2019 में 62 सीटें जीतीं थी क्योंकि सपा और बसपा गठबंधन से पार्टी को कड़ी चुनौती मिली थी। हालांकि, सपा और बसपा के साथ 2024 में अलग चुनाव लड़ने से भाजपा को इस बार फायदा होने की उम्मीद है।
एग्जिट पोल के अनुमानों से यह उम्मीद है कि बीजेपी पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अपनी सीटों में इजाफा करेगी। पार्टी ने 2019 में इन राज्यों में 105 लोकसभा क्षेत्रों में से 30 (28.6%) जीते। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में, जहां भाजपा प्रमुख विपक्षी दल है, उसे मौजूदा टीएमसी और बीजेडी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर से फायदा मिलने की उम्मीद है।
वहीं, आंध्र प्रदेश में जहां भाजपा ने 2019 में कोई सीट नहीं जीती उसने सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के खिलाफ टीडीपी और जन सेना के साथ गठबंधन किया है। तेलंगाना में, वह सत्तारूढ़ कांग्रेस के हिस्से में सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रही है।
चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान ‘लापता जेंटलमैन’ ट्रेंड पर कहा कि वे गायब नहीं थे, बल्कि प्रेस नोट के जरिए संवाद कर रहे थे। आयोग ने गर्मी में चुनाव कराने की गलती मानी और अगली बार अप्रैल तक चुनाव कराने की घोषणा की।

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