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निर्वाचन आयोग ने देशभर में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है. सात चरणों में मतदान होगा. पहले चरण में 19 अप्रैल, 26 अप्रैल को दूसरे, 7 मई को तीसरे, 13 मई को चौथे, 20 मई को पांचवें, 25 मई को छठे और 1 जून को सातवें चरण में वोटिंग होगी. 4 जून को काउंटिंग होगी.
इसमें यूपी की 80 लोकसभा सीटों में एक सीट घोसी पर सातवें चरण में 1 जून को वोटिंग होगी. इससे पहले नॉमिनेशन के लिए 7 मई को नोटिफिकेशन जारी होगा. 14 मई नामांकन की आखिरी तारीख होगी. नामांकन वापस लेने की तारीख 17 मई और एक जून को वोट डाले जाएंगे.
साथ ही देखिए यूपी की सभी सीटों का चुनावी शेड्यूल…
इस सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं. बीजेपी और सुहेलदेव भारतीय पार्टी के साझा उम्मीदवार अरविंद राजभर हैं, जो कि ओम प्रकाश राजभर के बेटे हैं. राजभर वोट पर ओम प्रकाश की पार्टी की अच्छी पकड़ मानी जाती है. यूपी में करीब चार फीसदी राजभर हैं. पूर्वांचल की लोकसभा सीटों में 18 जिलों में राजभर अच्छी संख्या में हैं.
राजभर मतदाता करीब दर्जनभर लोकसभा सीटों पर जीत-हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में हैं. ओमप्रकाश राजभर की पार्टी ने 2019 के चुनाव में 19 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. सुभासपा को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी लेकिन आठ सीटें ऐसी थीं जहां पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी.
सुभासपा के 19 उम्मीदवारों को कुल मिलाकर तीन लाख से भी कम वोट मिले थे. ये आंकड़ा बताता है कि सुभासपा अकेले दम जीतने की स्थिति में नहीं है लेकिन उसका वोटबैंक अगर बीजेपी जैसी पार्टी के साथ चला जाए तो जीत की राह आसान हो सकती है. राजभर का वोटबैंक भी बसपा की तरह डेडिकेटेड रहा है, ऐसे में बीजेपी को लगता है कि उसके वोट में राजभर वोट भी जुड़ जाएं तो पूर्वांचल का किला फतह किया जा सकता है.
जौनपुर जिले की मछलीशहर और बलिया जैसी लोकसभा सीटों पर बीजेपी को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था. पूर्वांचल की सात सीटों पर बीजेपी की जीत का अंतर 50 हजार वोट से कम का रहा था. जौनपुर जिले की मछलीशहर लोकसभा सीट से बीजेपी के भोलानाथ महज 181 वोट के करीबी अंतर से जीत सके थे. इस सीट पर सुभासपा के राजनाथ 11223 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे. बलिया लोकसभा सीट से बीजेपी के वीरेंद्र सिंह मस्त 15519 वोट से जीत पाए और सुभासपा के उम्मीदवार को यहां 35900 वोट मिले थे.
2014 के चुनाव की तुलना में बीजेपी की सीटें घट गई थीं लेकिन बीजेपी के माथे पर बल लाने का काम किया विधानसभा चुनाव के निराशाजनक प्रदर्शन ने. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव वाले पूर्वांचल में सपा के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन का हावी रहना बीजेपी की चिंता बढ़ा गया. स्थानीय से प्रदेश स्तर तक नेतृत्व के कान खड़े हो गए और 2024 के चुनाव में ऐसी स्थिति का सामना ना करना पड़े, इसपर मंथन शुरू हो गया.
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