यूपी: Farzi वेबसीरीज देख प्रिंटर से छापने लगे नकली नोट, इंस्टाग्राम-फेसबुक के जरिए इन राज्यों में करते थे सप्लाई! 5 गिरफ्तार

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राजधानी लखनऊ में बड़े पैमाने पर नकली नोट पकड़े गए हैं। मड़ियांव पुलिस ने नोटों के साथ ही तीन तस्करों को दबोचा है। मामला देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है ऐसे में आला अफसरों को तुरंत जानकारी दे दी गई। इसके बाद एटीएस, आईबी, एलआईयू और अन्य एजेंसियों ने थाने में तस्करों से घंटों पूछताछ की है। एजेंसियों के साथ पुलिस टीम गिरोह के मास्टरमाइंड भाइयों की तलाश में लग गई। तस्करों से पूछताछ में नकली करंसी का नेपाल, खाड़ी देश और अंडरवर्ल्ड से कनेक्शन का शक है।

पुलिस उपायुक्त उत्तरी गोपाल कृष्ण चौधरी के मुताबिक, तस्करों को मड़ियांव पुलिस ने घैला पुल के पास मैदान में टिन शेड के नीचे से गिरफ्तार किया है। तस्करों की पहचान आजमगढ़ के गम्भीरवन निवासी आलोक सिंह, मुबारक पट्टी रामपुर का सोनू गौड़ उर्फ गोलू और सिधारी इलाके के सारगढ़ का बृजेश विश्वकर्मा के रूप में हुई है। मुखबिर की सूचना पर अपर पुलिस उपायुक्त ट्विंकल जैन और एसीपी अलीगंज शशि प्रकाश मिश्र के निर्देशन में मड़ियांव पुलिस और क्राइम टीम को लगाया गया था।

इंस्पेक्टर मड़ियांव शिवानंद मिश्रा और उनकी टीम ने तीनों संदिग्धों को धर दबोचा। उनके पास से बैग में भारी मात्रा में रुपये मिले। पूछताछ में पता चला कि तीनों नकली नोटों की तस्करी करते हैं। आजमगढ़ से यहां डिलीवरी देने के लिए आए थे। तस्करों के पास से 500 के नोटों की 14 गड्डियां यानी कुल 1402 नोट पकड़े गए हैं। 100 के नोटों की 70 गड्डियां मिली हैं। सौ के कुल 6946 नोट हैं। इस तरह कुल 13 लाख 95 हजार 600 रुपये बरामद हुए हैं।

अंडरवर्ल्ड, नेपाल कनेक्शन की जांच

एसीपी अलीगंज शशि प्रकाश मिश्र के मुताबिक, गिरोह के पास से मिले नोटों की फिनिशिंग इतनी अच्छी है कि अच्छे खासे लोग उसे पहचान न पाएं। नोटों का प्रिंट, आकार और कटिंग असली जैसी है। गिरोह से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। सरगना भाइयों की तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं। गिरोह के अंडरवर्ल्ड, नेपाल और खाड़ी देश करनेक्शन की भी पुलिस तफ्तीश कर रही है। इसके अलावा नोटों की तस्करी से जुड़े आजमगढ़, बनारस में भी जांच की जा रही है। बीते मार्च माह में आजमगढ़ में एक गिरोह पकड़ा गया था। वह खुद ही प्रिंटिंग मशीन लगाकर नोट छापता था। इस बिंदु पर भी जांच की जा रही है। कहीं गिरोह खुद ही तो नोटों की छपाई नहीं करता है।

तीन लाख नकली करंसी के बदले लेते थे एक लाख रुपये

इंस्पेक्टर मड़ियांव शिवानंद मिश्रा के मुताबिक तस्करों से पूछताछ में पता चला है कि यह तीनों कैरियर हैं। नकली नोटों की डिलीवरी देने का काम करते थे। यह लोग करीब एक साल से कर रहे थे। गिरोह का सरगना आजमगढ़ निवासी मंजीत प्रधान और उसका भाई संतोष है। उसी के इशारे पर तीनों काम करते थे। एक लाख रुपये के असली नोट लेकर तीन लाख नकली देते थे।

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