महाराष्ट्र की इन नौ सीटों पर इंडिया गठबंधन को लग सकता है झटका, जानिए VBA के साथ न आने से विपक्ष को कितना नुकसान – Jansatta

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प्रकाश अंबेडकर की अगुवाई वाली वंचित बहुजन अघाडी (VBA) इस लोकसभा चुनाव में भी महाराष्ट्र में अहम भूमिका निभा सकती है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में वीबीए को 6.7 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे, हालांकि सीट एक भी नहीं मिली थी।
बावजूद इसके अंबेडकर की पार्टी नौ सीटों पर यूपीए की हार की वजह बनी थी।
इन सीटों में नांदेड़, सोलापुर, सांगली, बुलढाणा, परभणी, गढ़चिरौली, हिंगोली, अकोला और हातकणंगले सीट शामिल हैं। अकोला को छोड़ बाकी सभी सीटों पर यूपीए के उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे थे और बीजेपी-शिवसेना के उम्मीदवारों को जीत मिलने का रास्ता साफ हुआ था।
अकोला पर तो वीबीए ने यूपीए के उम्मीदवार को तीसरे नंबर पर धकेल दिया था। महाराष्ट्र में लोकसभा की कुल 48 सीटें हैं। बता दें कि प्रकाश अंबेडकर संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के पड़पोते हैं।
यह जानने के लिए कि महाराष्ट्र की सियासत में वीबीए की क्या हैसियत है, इन सीटों के आंकड़ों पर नजर डालनी होगी। नांदेड़ सीट पर बीजेपी को 4.87 लाख और कांग्रेस को 4.47 लाख वोट मिले थे जबकि यहां वीबीए ने 1.66 लाख वोट हासिल किए थे। सोलापुर में बीजेपी ने 5.25 लाख वोट हासिल किए थे जबकि कांग्रेस को 3.66 लाख वोट और वीबीए को 1.7 लाख वोट मिले थे। सांगली में बीजेपी को 5.09 लाख, स्वाभिमानी पक्ष को 3.45 लाख और वीबीए को 3 लाख वोट मिले थे।
बुलढाणा में शिवसेना उम्मीदवार को 5.22 लाख, एनसीपी को 3.89 लाख और वीबीए को 1.73 लाख वोट मिले थे। परभणी में शिवसेना को 5.39 लाख, एनसीपी को 4.97 लाख और वीबीए को 1.5 लाख वोट मिले थे।
गढ़चिरौली में बीजेपी को 5.2 लाख, कांग्रेस को 4.42 लाख और वीबीए को 1.11 लाख वोट मिले थे। इसी तरह हिंगोली में शिवसेना उम्मीदवार को 5.86 लाख, कांग्रेस उम्मीदवार को 3.08 लाख और वीबीए के उम्मीदवार को 1.74 लाख वोट मिले थे। हातकणंगले सीट पर शिवसेना को 5.86 लाख, स्वाभिमानी पक्ष को 4.9 लाख और वीबीए के उम्मीदवार को 1.23 लाख वोट मिले थे।
अकोला में तो वीबीए के उम्मीदवार ने 2.79 लाख वोट हासिल किए थे। यहां बीजेपी को 5.54 लाख और कांग्रेस को 2.54 लाख वोट मिले थे।
इसके अलावा वीबीए की वजह से कांग्रेस नेताओं और दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को हार का मुंह भी देखना पड़ा था। इनके नाम अशोक चव्हाण और सुशील कुमार शिंदे हैं।
प्रकाश अंबेडकर ने ऐलान किया है कि वह 2024 के लोकसभा चुनाव में भी अकोला सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। अकोला सीट पर बीजेपी 2004 से लगातार चुनाव जीत रही है। साल 2019 में अंबेडकर ने अकोला और सोलापुर सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें दोनों ही जगह पर हार मिली थी। अंबेडकर साल 1998 में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के उम्मीदवार के तौर पर और साल 1999 में भी भारिप बहुजन महासंघ के टिकट पर अकोला सीट से चुनाव जीत चुके हैं।
यहां बताना जरूरी होगा कि महाराष्ट्र में साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, एनसीपी और स्वाभिमानी पक्ष एक साथ थे जबकि इनके सामने बीजेपी और शिवेसना थे। लेकिन नवंबर, 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी और इसे महाविकास अघाडी का नाम दिया था। महाविकास अघाडी के दल अब इंडिया गठबंधन में शामिल हैं।
बता दें कि जून, 2022 में शिवसेना में टूट हुई थी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के विधायकों ने बगावत कर दी थी। इस वजह से राज्य की महा विकास अघाडी सरकार गिर गई थी और बीजेपी ने शिंदे गुट के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। लेकिन बीते साल एनसीपी में भी टूट हुई और अजीत पवार के नेतृत्व में एनसीपी के विधायकों ने पार्टी से विद्रोह कर दिया। बाद में अजीत पवार को शिंदे-बीजेपी सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाया गया। इस तरह वर्तमान में महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना(शिंदे गुट) और एनसीपी साथ-साथ हैं।
साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वीबीए ने असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया था। वीबीए का मुख्य आधार महाराष्ट्र के दलित और मुस्लिम समुदाय में है।
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रकाश अंबेडकर के साथ मिलकर भीम शक्ति-शिव शक्ति गठबंधन बनाया था। वंचित बहुजन अघाडी की लंबे समय तक इंडिया गठबंधन में शामिल शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी से सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चली लेकिन बात नहीं बन सकी। अब 2024 के लोकसभा चुनाव में वीबीए ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
खबरों के मुताबिक, महा विकास अघाडी में शामिल दल वीबीए को चार सीटें देना चाहते थे जबकि वीबीए 8 सीटों की मांग कर रही थी।
चुनावी आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि अगर इंडिया गठबंधन प्रकाश अंबेडकर को अपने साथ लाने में सफल हो गया होता तो निश्चित रूप से उसे कई सीटों पर इसका फायदा मिल सकता था। लेकिन चूंकि ऐसा नहीं हो सका। इसलिए साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तरह ही इस बार भी प्रकाश अंबेडकर की पार्टी इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के वोटों में सेंधमारी कर सकती है और इससे एनडीए के उम्मीदवारों को फायदा हो सकता है।

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