Lok Sabha Election 2024 चीनी मूल के लोग लोकसभा चुनाव 2024 में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के गवाह बनेंगे। कोलकाता में स्थित चाइना टाउन में चीनी मूल के नागरिकों की आबादी है। यहां रहने वाले चीनी मूल के लोग अपने आपको भारतीय नागरिक होने पर खुशनसीब मानते हैं। ये लोग यहां कई पीढ़ियों से रह रहे हैं।
राजीव कुमार झा, कोलकाता। चीन में न लोकतंत्र है और न वोट देने का अधिकार, परंतु भारत में रहने वाले चीनी मूल के लोग स्वयं को खुशनसीब मानते हैं कि वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रिक देश में रहते हैं। चाइनीज होते हुए भी यहां उन्हें सभी नागरिक अधिकार हैं। यहां तक कि वोट देने का भी अधिकार प्राप्त है। कोलकाता में कई पीढ़ियों से रहते आ रहे चीनी मूल के लोगों में आम भारतीयों की तरह ही लोकसभा चुनाव को लेकर उत्सुकता है।
चीन में लोकतंत्र होता तो अच्छा होता
कोलकाता के टेंगरा इलाके के चाइना टाउन में सबसे ज्यादा चीनी रहते हैं। वहां की निवासी 70 वर्षीय मोनिका लियू कहती हैं- भले ही हमारी जड़ें चीन में रही हों, लेकिन खुशनसीब हूं कि आज भारतीय नागरिक के तौर पर अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाती हूं। हम लोग भारत में भले अल्पसंख्यक हैं, पर सरकार चुनने में मेरी भी भूमिका होती है, इससे गर्व होता है। चीन में भी लोकतंत्र होता तो अच्छा होता।
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यह जानकार बहुत बुरा लगता है कि जिस देश में हमारी जड़ है, वहां के लोगों को सरकार चुनने का अधिकार नहीं है। लियू महिला उद्यमी हैं और यहां पांच-सात रेस्टोरेंट की मालकिन हैं, जिसमें मशहूर बीजिंग रेस्तरां भी हैं। कोलकाता में रहने वाले चीनी मूल के लोगों की मदद और समाजसेवा के कार्यों में भी वह सक्रिय रहती हैं। लियू का परिवार तीन पीढ़ियों से यहां रह रहा है।
चाइनीज की जुबान पर भी मोदी
यह पूछे जाने पर कि चुनाव में उन लोगों का क्या मुद्दा होगा, इस पर ज्यादातर चीनी ने भी विकास को ही प्रमुख मुद्दा बताया। लियू सहित कई ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी तारीफ की। लियू ने कहा कि पीएम मोदी देश को आगे बढ़ाने के लिए दिन- रात काम कर रहे हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि मोदी अगर और 10-15 साल पहले आ गए होते तो आज देश का नक्शा ही बदल गया होता। उन्होंने नोटबंदी को छोड़कर बाकी फैसलों की तारीफ की।
मुंबई के बाद कोलकाता में सबसे ज्यादा चीनी
पहले कोलकाता में 50 हजार से ज्यादा चीनी थे। इनमें चाइना टाउन के अलावा मध्य कोलकाता के टेरिटरी बाजार में उनकी सबसे बड़ी आबादी थी। चाइना टाउन में 20 हजार से अधिक चीनी रहते थे, पर अब संख्या घटकर दो हजार रह गई है। कुछ दशक में ज्यादातर चीनी कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया व अन्य देशों में चले गए हैं।
अधिकांश रेस्टोरेंट उद्योग से जुड़े
ज्यादातर चीनी चमड़ा उद्योग से जुड़े थे, किंतु जब ढाई दशक पहले प्रदूषण पैदा करने वाले सैकड़ों टेनरियों को बंद कर कोलकाता से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया तो आजीविका के नुकसान के कारण बेहतर अवसरों की तलाश में वे लोग विदेश का रूख करने लगे। अब बुजुर्ग और स्थापित उद्यमी ही यहां रहते हैं, जिनमें अधिकांश रेस्टोरेंट उद्योग से जुड़े हैं। लियू के अनुसार, ज्यादातर चीनी यहां द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद रोजगार की तलाश में आए थे और यहीं होकर रह गए।
चीन में मिलिट्री शासन
कोलकाता के चाइन टाउन में रेस्टोरेंट चलाने वाले हेनदुई का कहना है कि चीन में लोकतंत्र नहीं है। वहां मिलिट्री शासन है। वहां और यहां में बहुत फर्क है। चीन में जनता सरकार से डरती है। भारत में जनता से सरकार डरती है। पूरा उल्टा है। गर्व होता है कि मैं भारत का नागरिक हूं। चुनाव में विकास ही मुद्दा होना चाहिए।
भारत में बहुत आजादी
चाइना टाउन की रहने वाली मार्गरेट ने कहा कि पीएम मोदी मजबूत नेता हैं। दुनिया में नाम है। देश को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। चीन में लोगों को आजादी नहीं है लेकिन भारत में बहुत आजादी है। हमारे बहुत से लोग यहां से चले गए। इसलिए पीएम को चाइना टाउन और बंगाल पर भी ध्यान देना चाहिए।
रोजगार की तरफ ध्यान दे सरकार
चाइना टाउन निवासी यू सिन लिआऊ का कहना है कि टेनरी उद्योग बंद होने से हमारे बहुत लोग यहां से चले गए। अब बहुत कम बचे हैं। धीरे- धीरे सब निकाल रहे हैं। इसलिए सरकार को चीनी नागरिकों के रोजगार व व्यवसाय की तरफ भी ध्यान देना चाहिए।
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