नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ देश पर एक भाषा थोपने की इच्छा रखने और सत्तारूढ़ दल संविधान बदल देगा जैसे ‘निराधार’ आरोप लगाने के लिए राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सोमवार को निर्वाचन आयोग का रुख किया. राहुल गांधी पर ‘लगातार झूठ बोलने और आदतन अपराधी’ होने का आरोप लगाते हुए भाजपा ने आयोग से ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उनसे सख्ती से निपटने’ का आग्रह किया.
महासचिव तरुण चुघ, प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी और ओम पाठक सहित एक पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को शिकायत सौंपी. इसमें कहा गया कि गांधी निर्वाचन आयोग द्वारा पहले नोटिस दिए जाने के बावजूद झूठे और घोर दुर्भावनापूर्ण आरोप लगा रहे हैं.
भाजपा ने उनके उस आरोप का भी हवाला दिया कि पार्टी सत्ता में आने पर संविधान को बदलना चाहती है. पार्टी ने दावा किया कि इस तरह के ‘निराधार’ बयान न केवल लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करते हैं, बल्कि नागरिक अशांति और कलह को भड़काने की भी क्षमता रखते हैं.
राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के कुछ पदाधिकारियों की टिप्पणियों का लाभ उठाते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल संविधान को बदलना चाहता है. भाजपा ने कहा कि गांधी ने कोयंबटूर में अपनी रैली में यह आरोप लगाकर तमिलों और अन्य लोगों के बीच भाषाई और सांस्कृतिक विभाजन पैदा करने की कोशिश की कि मोदी भारत में केवल एक भाषा चाहते हैं, जिसका अर्थ है कि प्रधानमंत्री उनकी भाषा के खिलाफ हैं.
उसने राहुल के भाषणों के ‘लिंक’ साझा करते हुए आरोप लगाया, “यह झूठा, अप्रामाणित, असत्यापित और निराधार आरोप लगाकर उन्होंने प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता पर प्रहार किया है, साथ ही तमिलनाडु के लोगों के मन में उनके खिलाफ पूर्वाग्रह पैदा किया है. उन्होंने चुनावी लाभ के लिए भारत को भाषाई और सांस्कृतिक रूप से विभाजित करने का नापाक प्रयास किया है.”
भाजपा ने कहा कि पीएम मोदी ने तमिल संस्कृति के प्रति अपना अत्यंत सम्मान प्रदर्शित किया है और इसे एक अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में विकसित करने की इच्छा व्यक्त की है. इसमें कहा गया, गांधी को फटकार लगाई जानी चाहिए और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए. बैंकों द्वारा वाणिज्यिक ऋण माफ करने को लेकर कांग्रेस नेताओं द्वारा पीएम मोदी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का हवाला देते हुए भाजपा ने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री की कोई भूमिका नहीं है और ऐसे फैसलों की निगरानी आरबीआई द्वारा की जाती है.
पार्टी ने कहा, राहुल गांधी खुद को निर्वाचन आयोग की पहुंच से परे मानते हैं क्योंकि पिछले साल नवंबर में उन्हें जारी नोटिस में इस मामले को विशेष रूप से उजागर किया गया था. अपनी शिकायत में, पार्टी ने राहुल गांधी को आदतन झूठ बोलने वाला साबित करने के लिए उन्हें सांसद के रूप में अयोग्य ठहराये जाने के मामले में उनके द्वारा प्रधानमंत्री पर बोले गये हमले का हवाला दिया. यद्यपि उच्चतम न्यायालय ने उन्हें अयोग्य ठहराये जाने के निर्णय पर रोक लगा दी थी.
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