लोकसभा चुनाव 2024: क्या 'मोदी मैजिक' के आगे उत्तराखंड में खुल पाएगा कांग्रेस का खाता? – India.com हिंदी

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Updated: March 26, 2024 11:51 AM IST
By Lalit Fulara
उत्तराखंड में 19 अप्रैल को पहले चरण में लोकसभा की पांचों सीटों के लिए मतदान होगा. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने सभी सीटों पर प्रत्याशी उतार दिए हैं. कांग्रेस की दो सीटों नैनीताल और हरिद्वार पर आखिरी वक्त तक खींचतान बनी रही जिस कारण पार्टी सूबे में प्रचार में पहले ही पिछड़ती हुई दिख रही है. वहीं, लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सूबे में कई बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस को चुनाव से पहले ही बड़ा झटका दे दिया है. टिहरी लोकसभा के अंतर्गत आने वाले गंगोत्री विधानसभा के पूर्व विधायक विजयपाल सिंह सजवाण और पुरोला के पूर्व विधायक मालचंद बीजेपी में शामिल हुए हैं. बदरीनाथ के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भंडारी ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया है. साफ तौर पर दिख रहा है कि वरिष्ठ नेताओं के बीजेपी में शामिल होने का खामियाजा कांग्रेस को इस लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा.

वैसे भी साल 2014  की मोदी लहर के बाद से ही कांग्रेस सूबे में लोकसभा चुनावों में अपना खाता भी नहीं खोल पा रही है. उत्तराखंड पहाड़ी सूबा है और सैनिकों की धरती है. सूबे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इतना जबरदस्त प्रभाव है कि जानकार मानते हैं कि इस लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के लिए खाता खोलना असंभव है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के पीजीडीएवी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर और पहाड़ के मसलों पर मुखर रहने वाले डॉक्टर प्रकाश उप्रेती मानते हैं कि साल 2014 और साल 2019 के लोकसभा चुनावों की तरह ही इस बार भी सूबे में मोदी मैजिक फेक्टर पूरी तरह से काम करेगा और वोट मोदी के नाम पर ही पड़ेंगे. उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद सूबे में यह पांचवां लोकसभा चुनाव है. 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर देवभूमि उत्तराखंड का गठन हुआ था.
सूबे में पहला लोकसभा चुनाव साल 2004 में हुआ. उस समय प्रदेश की सत्ता पर कांग्रेस काबिज थी. सूबे के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी थे. उस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ नैनीताल सीट पर ही संतोष करना पड़ा और बाकी की चार सीटें पार्टी हार गई थी. साल 2009 में उत्तराखंड दूसरे लोकसभा चुनाव का गवाह बना. उस दौरान इस पहाड़ी सूबे में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी. मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जनरल बीसी खंडूड़ी काबिज थे. लोकसभा चुनाव में बीजेपी पांचों सीटें हार गईं. फिर आया साल 2014 का लोकसभा चुनाव, जिसमें बीजेपी ने सूबे की पांच की पांच लोकसभा सीटें जीतीं. उस समय सूबे में सत्ता पर कांग्रेस काबिज थी. मोदी लहर उठने लगी थी और तीसरे लोकसभा चुनाव का गवाह बने सूबे में इस लहर का ऐसा जादू चला कि कांग्रेस शून्य पर सिमट गई. इसके बाद सूबे के चौथे लोकसभा चुनाव में भी मोदी लहर का जादू ऐसा बरकरार रहा कि भारतीय जनता पार्टी के खाते में पांच की पांच लोकसभा सीटें आसानी से आ गईं. इसके साथ ही काफी लंबे वक्त से सूबे में चला आ रहा मिथक ‘जिसकी सरकार, लोकसभा में उसकी हार’ भी टूट गया, बीजेपी ने 2017 और 2022 का विधानसभा चुनाव भी मोदी लहर की वजह से ही जीता.


अब 2024 का लोकसभा चुनाव है और मोदी लहर का जादू सूबे में छाया हुआ है. भारतीय जनता पार्टी भी नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के संकल्प के साथ मैदान में उतरी हुई है. इस बार बीजेपी ने सूबे में 75 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करने का लक्ष्य रखा है. भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर सूबे में पिछले दस सालों में 27.37 फीसदी बढ़ा है. जहां 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 33.8 फीसदी वोट मिले थे, वहीं 2019 में यह वोट फीसदी 61.66 प्रतिशत पर पहुंचा था. अगर साल 2014 के लोकसभा चुनावों को देखें तो बीजेपी को सूबे में 55.9 फीसदी वोट मिले थे और कांग्रेस के खाते में 34.4 फीसदी वोट पड़े थे. वहीं, बीएसपी को 4.8 फीसदी और सपा को 0.4 फीसदी वोट मिले थे. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सूबे में 61.7 फीसदी वोट मिले थे और कांग्रेस का वोट पर्सेंटेज 31.7 फीसदी था. वहीं, बीएसपी को 4.5 फीसदी वोट मिले थे और यूकेडी 0.2 फीसदी वोट पर्सेटेंज पर सिमट गई थी.
बीजेपी को साल 2009 के लोकसभा चुनाव में 33.8 फीसदी वोट मिले थे और कांग्रेस का वोट पर्सेंटेज 43.1 फीसदी था. इस चुनाव में पांचों सीटें कांग्रेस ने जीती थी. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी का वोट पर्सेंटेज सूबे में 15.2 फीसदी था. वहीं, क्षेत्रीय पार्टी यूकेकेडी को 1.2 फीसदी वोट मिले थे.
अल्मोड़ा लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी अजय टम्टा हैं. पहले उनका टिकट काटे जाने की चर्चाएं जोरों पर थी लेकिन फिर पार्टी ने उनपर अपना विश्वास दिखाया. हरिद्वार लोकसभा सीट से बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को टिकट दिया है. पौड़ी गढ़वाल सीट से बीजेपी उम्मीदवार अनिल बलूनी हैं. टिहरी सीट से बीजेपी प्रत्याशी माला राज्यलक्ष्मी हैं. नैनीताल सीट से बीजेपी प्रत्याशी अजय भट्ट हैं. कांग्रेस ने गढ़वाल सीट से गणेश गोदियाल, टिहरी सीट से जोत सिंह गुनसोला और अल्मोड़ा सीट से प्रदीप टम्टा को चुनाव मैदान में उतारा है. हरिद्वार सीट से कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत को टिकट दिया है और नैनीताल सीट से प्रकाश जोशी को प्रत्याशी बनाया है. इन दोनों ही सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की आपसी खींचतान चल रही थी और आखिर में हरीश रावत अपने बेटे को टिकट दिलवाने में कामयाब रहे. हरिद्वार सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प होने जा रहा है क्योंकि यहां से निर्दलीय उमेश कुमार मैदान में हैं और उनको त्रिवेंद्र रावत का धुर-विरोधी माना जाता है. इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने भावना पांडेय को मैदान में उतारा है.

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