नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पंजाब सरकार का रोज 100 स्ट्रे डॉग्स की नसबंदी करना नाकाफी है, यह ऐसा है जैसे भूसे के ढेर में सुई को खोजना। जस्टिस विक्रम नाथ की अगुआई वाली बेंच ने डॉग्स के पुनर्वास और नसबंदी से जुड़े 7 नवंबर के आदेश में संशोधन की मांग वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया। साथ ही पंजाब, राजस्थान , उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु द्वारा अदालत के निर्देशों के पालन को लेकर नाराजगी जताई। अदालत ने नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से कहा कि वह हाइवे निर्माण से जुड़े ठेकेदारों से हर 50 किलोमीटर पर गौशालाएं बनाने पर विचार कर सकता है।
Supreme Court ने दिया ये निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से पेश वकील से यह भी कहा कि एक ऐसा मोबाइल ऐप बनाएं, जिसके जरिए लोग NH पर आवारा पशुओं की मौजूदगी की सूचना दे सकें। कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को स्टेट हाइवे, नैशनल हाइवे और एक्सप्रेसवे से सभी आवारा जानवरों को हटाने के निर्देश दिए थे।
DOGS को लेकर एक्शन पर असंतोष
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पी. बी. पारदीवाला की बेंच ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने NHAI से एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित करने को भी कहा है, ताकि आम लोग हाइवे पर आवारा पशुओं की मौजूदगी की सूचना दे सकें और दुर्घटनाओं को रोका जा सके। सुनवाई के दौरान बेंच ने पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया।
