पटना/मुजफ्फरपुर. शंभू गर्ल्स हॉस्टल पटना की एक NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर हमला बोलते हुए इसे ‘नवरुणा कांड’ की याद दिला दी है. तेजस्वी यादव का आरोप है कि जैसे नवरुणा के हत्यारों को सीबीआई नहीं ढूंढ पाई, वैसे ही इस छात्रा के केस को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा. शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रही, बल्कि यह बिहार की पुलिसिंग, जांच एजेंसियों और राजनीतिक इच्छाशक्ति की परीक्षा बन चुकी है. विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा इस मामले की तुलना नवरुणा कांड से किए जाने के बाद बहस और तेज हो गई है. सवाल यह नहीं है कि जांच किस एजेंसी को सौंपी जाएगी, सवाल यह है कि क्या इस बार सच तक पहुंचने की मंशा भी होगी या फिर यह केस भी नवरुणा कांड की तरह ही फाइलों, तारीखों और अंतहीन जांच के भंवर में खो जाएगा? आइए समझते हैं कि आखिर क्या था नवरुणा कांड, जिसने एक दशक तक बिहार की पुलिसिंग और देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की साख पर सवालिया निशान लगा दिए.
18 सितंबर 2012 की वह काली रात!
मुजफ्फरपुर के जवाहरलाल रोड पर रहने वाले अतुल्य चक्रवर्ती के घर में 18 सितंबर 2012 की रात सब कुछ सामान्य था. लेकिन अगली सुबह जब पूरा घर जागा तो उनकी 12 साल की बेटी नवरुणा गायब थी. कमरे की खिड़की की ग्रिल कटी हुई थी. अपहरणकर्ताओं ने बेहद सफाई से इस वारदात को अंजाम दिया था. उस समय मुजफ्फरपुर में जमीन माफियाओं का बोलबाला था और नवरुणा का परिवार अपनी कीमती पैतृक जमीन को बचाने की लड़ाई लड़ रहा था.
कंकाल का रहस्य और डीएनए की उलझन
अपहरण के कुछ महीनों बाद 26 नवंबर 2012 को घर से सटे नाले से उसकी हड्डियां बरामद हुई थीं. नवरुणा के घर के पास वाले नाले की सफाई के दौरान एक मानव कंकाल मिला. पुलिस ने दावा किया कि यह नवरुणा का है. हालांकि, परिजनों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. बाद में जब मामला सीबीआई (CBI) के पास गया तो डीएनए जांच में कंकाल के नवरुणा होने की पुष्टि हुई. लेकिन, चक्रवर्ती परिवार आज भी यह सवाल पूछता है कि अगर वह नवरुणा थी तो उसकी हत्या किसने की और वह नाले तक कैसे पहुंची?
इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था. इसके बाद कई बार गुप्तेश्वर पांडेय की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं.बता दें कि इस केस की जांच करने वाले अधिकारियों में एक गुप्तेश्वर पांडेय भी थे. वो उस समय मुजफ्फरपुर के आईजीपी थे. बाद में यह मामला सीआईडी को दिया गया. राष्ट्रीय सुर्खियों में आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के कहने के बाद 14 फ़रवरी 2014 को केस सीबीआई को ट्रांसफर किया. छह साल से सीबीआई जांच कर रही है, लेकिन उसकी जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी.
इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था. इसके बाद कई बार गुप्तेश्वर पांडेय की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं.बता दें कि इस केस की जांच करने वाले अधिकारियों में एक गुप्तेश्वर पांडेय भी थे. वो उस समय मुजफ्फरपुर के आईजीपी थे. बाद में यह मामला सीआईडी को दिया गया. राष्ट्रीय सुर्खियों में आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के कहने के बाद 14 फ़रवरी 2014 को केस सीबीआई को ट्रांसफर किया. छह साल से सीबीआई जांच कर रही है, लेकिन उसकी जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी.
