PM बोले-2014 में बैंकिंग सिस्टम डूबने की कगार पर था: अब ये प्रॉफिट में, पिछले 10 साल में जो हुआ वो तो सिर्फ… – Dainik Bhaskar

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आज अपनी 90वीं एनिवर्सरी मना रहा है। इस मौके पर मुंबई में आयोजित स्मृति समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, साल 2014 में भारत का पूरा बैंकिंग सेक्टर समस्याओं और चुनौतियों से जूझ रहा था। आज ये बैंकिंग सिस्टम प्रॉफिट में हैं।
पीएम ने ये भी कहा कि हमें देखना होगा कि अलग-अलग सेक्टर्स को फाइनेंशियली सपोर्ट करने के लिए हमारी क्या तैयारी है? अभी 100 दिन मैं चुनाव में बिजी हूं, तो आपके पास भरपूर समय है। आप सोचकर रखिए, क्‍योंकि शपथ लेने के दूसरे दिन ही झमाझम काम आने वाला है।
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ 90 रुपए का स्मारक सिक्का भी लॉन्च किया। ये सिक्का 99.99% शुद्ध चांदी से बना है। इसका वजन 40 ग्राम है। ये सिक्का नौ दशकों के आरबीआई के समृद्ध इतिहास और उपलब्धियों का प्रतीक है।
अब पीएम मोदी के भाषण की 7 बड़ी बातें…
1. शपथ लेने के दूसरे दिन ही झमाझम काम आने वाला है
पीएम मोदी ने कहा- 21वीं सदी में इनोवेशन का बहुत महत्व रहने वाला है। इसलिए हमने अंतरिम बजट में इनोवेशन के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का रिसर्च फंड बनाया है। ‘कटिंग एज टेक्नोलॉजी’ पर जो प्रपोजल आएंगे, जो लोग इस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं, हम उनके लिए कैसे प्रीपेयर हों, ये सोचना बहुत आवश्यक है। और RBI को अभी से सोचना चाहिए कि वो कैसे उनकी मदद करेगा।
इसी तरह स्पेस सेक्टर ओपन हो रहा है, इसमें नए-नए स्टार्टअप आ रहे हैं। भारत में एक सबसे बड़ा क्षेत्र पूरी ताकत के साथ आ रहा है, वो है टूरिज्म सेक्‍टर। हमें देखना होगा कि इन्हें फाइनेंशियली सपोर्ट करने के लिए हमारी क्या तैयारी है? अभी 100 दिन मैं चुनाव में बिजी हूं, तो आपके पास भरपूर समय है। आप सोचकर रखिए, क्‍योंकि शपथ लेने के दूसरे दिन ही झमाझम काम आने वाला है।
2. आज भारत का बैंकिंग सिस्टम एक मजबूत और टिकाऊ प्रणाली
प्रधानमंत्री ने कहा- ‘मैं जब 2014 में रिजर्व बैंक के 80 वें वर्ष के कार्यक्रम में आया था, तब हालात एकदम अलग थे। भारत का पूरा बैंकिंग सेक्टर समस्याओं और चुनौतियों से जूझ रहा था। NPA को लेकर भारत के बैंकिंग सिस्टम की स्थिरता और उसके भविष्य को लेकर हर कोई आशंका से भरा हुआ था।
हालात इतनी खराब थी कि देश के पब्लिक सेक्टर बैंक देश की आर्थिक प्रगति को जरूरी गति नहीं दे पा रहे थे। हम सभी ने वहां से शुरुआत की और आज भारत के बैंकिंग सिस्टम को दुनिया में एक मजबूत और टिकाऊ प्रणाली माना जा रहा है। जो बैंकिंग सिस्टम कभी डूबने की कगार पर था, वो बैंकिंग सिस्टम अब प्रॉफिट में आ गया है और क्रेडिट में रिकॉर्ड ग्रोथ दिखा रहा है।’
3. नीति, नियति और निर्णयों से बैंकिग सेक्टर में इतना बदलाव आया
पीएम ने कहा, ‘सिर्फ 10 सालों में इतना बड़ा बदलाव इसलिए आया क्योंकि हमारी नीति, नियति और निर्णयों में स्पष्टता थी। यह बदलाव इसलिए आया क्योंकि हमारे प्रयासों में दृढ़ता और ईमानदारी थी। आज देश देख रहा है जब नियति सही होती है तो नीति सही होती है। जब नीति सही होती है तो निर्णय सही होते हैं और जब निर्णय सही होते हैं तो नतीजे सही मिलते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘कैसे बैंकिग सिस्टम मजबूत हुआ यह एक का स्टडी का विषय है। हमने कोई भी सिरा ऐसा नहीं था, जिसे ऐसे ही छोड़ दिया हो। पब्लिक सेक्टर बैंक की स्थिति सुधारने के लिए हमने करीब साढ़े 3 लाख करोड़ का कैपिटल इन्फ्यूजन किया और साथ ही गवर्नेंस से संबंधी कई रिफॉर्म भी किए।’
4. RBI गवर्नर शक्तिकांत दास आउट ऑफ द बॉक्स सोचने में माहिर
पीएम ने कहा- MSME पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की बैकबोन जैसी है। ऐसे सारे सेक्टर में अलग अलग कर्ज की जरूरत होती है। कोरोना के समय हमने MSME के लिए जो क्रेडिट गारंटी स्कीम चलाई थी उसने इस सेक्टर को मजबूती दी है। RBI को भी आगे आउट ऑफ द बॉक्स पॉलिसी के बारे में सोचना होगा… और मैं देखता हूं, शक्तिकांत दास आउट ऑफ द बॉक्स सोचने में माहिर हैं।
5. पिछले 10 साल में जो हुआ वो तो सिर्फ ट्रेलर है
सरकार की उपलब्धियों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा- बीते 10 सालों में हमने सेंट्रल बैंकिग सिस्टम और अंतिम पायदान के बीच खड़े व्यक्ति के कनेक्ट को हाइलाइट किया है। गरीबों का फाइनेंशियल इंक्लूजन आज इसका बहुत बड़ा उदाहरण है। आज देश में 52 करोड़ जन-धन अकाउंट हैं, इनमें 55% से ज्यादा खाते महिलाओं के नाम पर हैं।
इसी फाइनेंशियल इंक्लूजन का प्रभाव एग्रीकल्चर जैसे सेक्टर में देख सकते हैं। आज 7 करोड़ से ज्यादा किसान और मछली से जुड़े बिजनेस वाले लोगों और पशुपालक के पास किसान क्रेडिट कार्ड हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में जो हुआ वो तो सिर्फ ट्रेलर है। अभी तो बहुत कुछ करना है, अभी तो हमें देश को बहुत आगे लेकर जाना है।
6. अगले 10 साल में भारत की आर्थिक आत्म निर्भरता को बढ़ानी है
डिजिटल पेमेंट से छोटे बिजनेस की और रेहड़ी-पटरी वालों की इनकम भी अब ट्रांसपेरेंटली दिखाई देने लगी है। अब इस जानकारी का इस्तेमाल करते हुए हमें उन्हें फाइनेंशिली एमपावर करना है। हमें मिल कर अगले 10 साल में एक और काम करना है।
हमे भारत की आर्थिक आत्म निर्भरता को बढ़ानी है। हमें कोशिश करनी है, देश की पॉलिसी किसी भी ग्लोबल संकट से प्रभावित ना हो। आज भारत ग्लोबल GDP ग्रोथ में 15% के साथ ग्लोबल ग्रोथ का इंजन बन रहा है। इसलिए हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि हमारा रुपया ग्लोबली एक्सेसिबल भी और ग्लोबली एक्सेप्टेबल भी हो।
7. कई देशों का प्राइवेट सेक्टर कर्ज उनकी GDP का दोगुना पहुंचा
आज दुनिया भर में एक नया ट्रेंड देखने को मिला है- बहुत ज्यादा आर्थिक विस्तार और बहुत ज्यादा कर्ज। कई देशों का प्राइवेट सेक्टर कर्ज तो उनकी GDP के दोगुने तक पहुंच गया है। कई देश ऐसे हैं जिनके कर्ज का लेवल तो पूरी दुनिया को प्रभावित करता है।
रिजर्व बैंक को इस पर भी एक स्टडी करनी चाहिए। भारत के ग्रोथ के जितने प्रॉस्पेक्ट्स और पोटेंशियल हैं, उसको ध्यान में रखते हुए क्रेडिट की अवेलेबिलिटी कितनी होनी चाहिए और उसे कैसे सस्टेनेबल तरीके से मैनेज करना चहिए इसे मॉडर्न सिनारियो में सोचना बहुत जरूरी है।
RBI गवर्नर बोले – स्ट्रक्चरल रिफॉर्म से चुनौतियों से निपटने में मदद मिली
इससे पहले RBI गवर्नर ने कहा, ‘एक संस्था के रूप में RBI का विकास भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्टसी कोड के अधिनियमन जैसे पाथ ब्रेकिंग स्ट्रक्चरल रिफॉर्म और हाल के वर्षों में फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन टारगेटिंग को अपनाने से हमें बैंकिंग सिस्टम में चुनौतियों से निपटने और प्राइस स्टेबिलिटी को अधिक प्रभावी ढंग से बनाए रखने में मदद मिली है।
आज की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलावों को देखते हुए रिजर्व बैंक लगातार उभरते रुझानों का एनालिसिस कर रहा है और बदलते समय के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए जरूरी पॉलिसी के लिए कदम उठा रहा है।’
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