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Prashant Kishor
Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनावों की शुरुआत से पहले रविवार को चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कई बड़े दावे किए। न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ चर्चा में प्रशांत ने कहा कि विपक्ष ने सत्तारूढ़ बीजेपी का “रथ” रोकने के कई मौके गंवाए। इनकी तुलना क्रिकेट मैच में फील्डर द्वारा किसी बैटर का कैच छोड़ना और बाद में उसी खिलाड़ी के शतक लगाने से की जा सकती है। अगर आप कैच छोड़ते रहेंगे, तो बल्लेबाज शतक बनाएगा, खासकर जब वो अच्छा बल्लेबाज हो। बता दें कि इस बार लोकसभा चुनाव 19 अप्रैल से 1 जून के बीच 7 चरणों में होंगे। सभी 543 सीटों के लिए वोटों की गिनती 4 जून को होगी।
2015-16 में काफी कमजोर थी बीजेपी की स्थिति
नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से अलग हुए प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में बीजेपी की “अजेय” यात्रा सिर्फ एक “धारणा” और एक “बड़ा भ्रम” है। जनता में लोकप्रियता के बावजूद न तो बीजेपी और न ही प्रधानमंत्री मोदी ‘अजेय’ हैं। बीजेपी जब भी बैकफुट पर थी, विपक्ष ने खासकर कांग्रेस इसका फायदा उठाने में नाकाम रही। एनडीए के लिए 2015 और 2016 में एक लंबा चुनावी बंजर दौर था, जब बीजेपी असम को छोड़कर कई असेंबली इलेक्शन हार गई थी। लेकिन कांग्रेस ने उसे वापसी करने का मौका दे दिया।
2019 के आम चुनाव से पहले बीजेपी 3 राज्यों में हारी
प्रशांत ने कहा कि इसके अलावा मार्च 2017 में नोटबंदी के चार महीने बाद बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन वह दिसंबर में गुजरात में हार की कगार पर रही। यह पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का गृह राज्य है। बीजेपी गुजरात में करीब तीन दशकों से सत्ता में है। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव से 4 महीने पहले दिसंबर 2018 में भाजपा को छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस से करारी हार मिली। इसके बाद 2020 के कोविड महामारी आई, अप्रैल-मई 2021 में पश्चिम बंगाल में बीजेपी को तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। लेकिन, विपक्षी नेता अपने घरों में बैठे रहे, जिससे पीएम मोदी को कमबैक का मौका मिलता रहा।
इंडिया ब्लॉक को BJP के गढ़ से निकालनी होंगी 100 सीटें
चुनाव रणनीतिकार ने कहा कि अब 2024 के लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। इस दौरान भाजपा को “गर्मी महसूस” कराने के लिए विपक्ष को पूरी ताकत झोकनी होगी। कांग्रेस की अगुआई वाले I.N.D.I.A ब्लॉक को उत्तर भारत और पश्चिमी राज्यों में बीजेपी के गढ़ में कम से कम 100 सीटें ज्यादा निकालनी होंगी। लेकिन ऐसा होने वाला नहीं है। अगर वह अपनी स्थिति पर भी कायम रहती है तो एनडीए को 370 सीटों का लक्ष्य पूरा करने में मुश्किल होगी। लेकिन उसके पास करीब 300 सीटें होंगी। बीजेपी ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में आगे रहेगी। जहां उसकी स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं रही है या हाल ही में बीजेपी के प्रदर्शन में सुधार आया है।
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