Loksabha Election 2024: AAP से क्यों छिटक रहे दलित नेता, लोकसभा चुनाव से पहले इस नई टेंशन से कैसे पार पाएगी पार्टी? – मनी कंट्रोल

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Loksabha Election 2024: आम आदमी पार्टी (AAP) को बुधवार को उस वक्त एक तगड़ा झटका लगा, जब उसके एक मंत्री राज कुमार आनंद (Raj Kumar Anand) ने बुधवार को सभी पदों से इस्तीफा दे दिया और पार्टी भी छोड़ दी। आनंद ने कहा, “आज मैं अपने सभी पदों और AAP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं और इसके बाद मैं हल्का महसूस कर रहा हूं।” पटेल नगर विधायक ने AAP पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मैं मंत्री बना। मैं जो कुछ भी बना, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के कारण और समाज का कर्ज चुकाने के लिए बना…अगर कोई पार्टी दलितों के प्रतिनिधित्व की बात पर पीछे हट जाती है, तो मुझे नहीं लगता कि मेरे लिए उस पार्टी में रहना सही है।” राजकुमार आनंद जाटव हैं और उन्होंने ये भी साफ किया कि फिलहाल वो किसी भी दूसरे दल में शामिल नहीं हो रहे हैं।

राजकुमार आनंद के इस्तीफे के बाद दिल्ली में AAP के सामने अब कई चुनौतियां आ गई हैं, खासकर दलित समुदाय के वोटर्स को लेकर। AAP की चुनौतियों में सबसे बड़ी बात यह है कि राज कुमार आनंद अरविंद केजरीवाल कैबिनेट का दलित चेहरा थे। उनके पास समाज कल्याण, SC और ST, गुरुद्वारा चुनाव आदि विभाग थे।

AAP के सामने अब ये चुनौतियां

आनंद का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ है, जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) न्यायिक हिरासत में हैं, जिससे दिल्ली कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या सात से घटकर पांच हो गई है और एक नए व्यक्ति को शामिल करना पड़ सकता है।

प्रवर्तन निदेशालय ने हिरासत में रहते हुए CM की तरफ से निर्देश जारी करने पर आपत्ति जताई है, तो ऐसे में केजरीवाल किसी और के नाम की सिफारिश कैसे कर पाएंगे? ये सवाल भी आम आदमी पार्टी को दुविधा में डाल सकता है।

दूसरी ओर, दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले पटेल नगर सीट पर उपचुनाव होगा। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना ​​है कि आनंद के जाने से इस विधानसभा क्षेत्र में AAP के प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ेगा।

AAP के दूसरे नेता भी उठा सकते हैं ऐसा कदम!

News18 के मुताबिक, AAP के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, “यह एक अशुभ संकेत है कि जिस व्यक्ति को पहली बार विधायक चुनने के बावजूद पार्टी ने मंत्री बनाया, वो ही चला गया। दरअसल, राजेंद्र पाल गौतम को हटाए जाने के बाद राजकुमार को पहली बार विधायक चुनने के बावजूद मंत्री बनाए जाने पर AAP के दलित विधायकों में थोड़ी नाराजगी थी। क्योंकि उनसे भी ज्यादा योग्य उम्मीदवार मौजूद थे।”

तीसरा, पार्टी को यह भी डर है कि दिल्ली में दूसरे पदाधिकारी भी ऐसा कदम उठा सकते हैं, क्योंकि उन्होंने मंत्री पद मिलने के बावजूद इस्तीफा दे दिया है। पंजाब में AAP सांसद सुशील कुमार रिंकू और विधायक शीतल अंगुराल ने हाल ही में पार्टी छोड़ दी और BJP में शामिल हो गए। रिंकू को आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पहले ही जालंधर से AAP का उम्मीदवार घोषित किया जा चुका था।

राज कुमार आनंद करीब चार साल पहले ही AAP में शामिल हुए थे। दरअसल, उनकी पत्नी वीणा आनंद ने 2013 में AAP के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था और 2015 में वह बाहर हो गईं।

राज कुमार आनंद (Raj Kumar Anand) को 2020 में टिकट मिला और उन्होंने जीत हासिल की। ​​नवंबर 2023 में, कस्टम एक्ट की धाराओं के तहत कथित अपराधों के लिए DRI की एक शिकायत के बाद ED के अधिकारियों ने PMLA केस की जांच के तहत उनके दफ्तरों पर छापा मारा था।

लोकसभा और विधानसभा सीटों पर दलितों का असर

इसके अलावा, दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में से 12 SC उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। 2013 में, AAP ने 12 रिजर्व सीटों में से आठ पर जीत हासिल की और 2015 और 2020 में, उसने ये सभी सीटें हासिल कीं। दिल्ली के मतदाताओं में दलित 20% हैं और 2013 में, वे निर्णायक रूप से कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी से छिटक कर AAP की ओर शिफ्ट हो गए।

राजधानी के सात लोकसभा सीटों में से, उत्तर पश्चिम दिल्ली एक रिजर्व सीट है, जिसे BJP ने 2014 और 2019 में जीता था। AAP के गुगन सिंह 2019 में 21% वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थे, जबकि बीजेपी के हंस राज हंस ने 60% वोटों से भारी जीत हासिल की थी।

2014 में भी AAP की राखी बिड़ला दूसरे नंबर पर थीं, जबकि बीजेपी के उदित राज एक लाख से ज्यादा वोटों से जीते थे। 2019 में, AAP उत्तर पश्चिम दिल्ली और दक्षिण दिल्ली सीटों पर उपविजेता रही, जबकि कांग्रेस बाकी सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। BJP ने 50% से ज्यादा वोट शेयर के साथ सभी सात लोकसभा सीटें जीतीं।

दलित वोटर्स को क्या लभा पाएगी AAP?

लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने दलित समुदाय के सदस्य कुलदीप कुमार को पूर्वी दिल्ली से टिकट देने का बड़ा शोर मचाया है, जो एक अनारक्षित निर्वाचन क्षेत्र है।

पार्टी का चिन्ह् झाड़ू की पहचान वाल्मिकियों से है और इसे दिल्ली के वाल्मिकी मंदिर में अरविंद केजरीवाल ने लॉन्च किया था। जबकि AAP दिल्ली और पंजाब में इस वोटर बेस को लुभाने में कामयाब रही है, लेकिन दलित नेताओं आनंद, रिंकू और अंगुरल के पार्टी छोड़ने के बाद चिंता बढ़ गई है।

पंजाब की आबादी में 32 प्रतिशत दलित हैं और पंजाब के 117 विधानसभा सीट में से 34 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में AAP ने इन 34 रिजर्व सीट में से 29 पर जीत हासिल की।
Tags: #elections #India Elections #Indian general election #Loksabha elections 2024
First Published: Apr 11, 2024 1:12 PM
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