लोकसभा चुनाव 2024 में मुस्लिम लीग के बाद पीएम ने मुगलों को घसीटा, पर मंदिर तो हिंदू राजा भी तोड़ते थे – Jansatta

Spread the love

लोकसभा चुनाव के बीच उठे नॉनवेज पर विवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 12 अप्रैल को कूद गए। इस दौरान पीएम मोदी ने ऊधमपुर में अपने भाषण में यह भी कहा कि किसी राजा को हरा कर भी मुगलों को संतोष नहीं होता, जब तक वह मंदिर नहीं तोड़ लेते थे।
पीएम ने अपने बयान में ख़ाली मुगलों का नाम लिया, लेकिन इतिहास बताता है कि अन्य साम्राज्यों या रियासतों के राजा भी युद्ध के दौरान अपने प्रतिद्वंदी की महत्वपूर्ण इमारतों (जैसे- मंदिर, मस्जिद, स्तूप) को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखते थे। इतिहास में कई हिंदू राजाओं द्वारा भी हिंदू, जैन और बौद्ध मंदिरों को तोड़े और लूटे जाने की दास्तान दर्ज है।
उदाहरण के लिए सातवीं शताब्दी में हिंदू पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम ने चालुक्य साम्राज्य की राजधानी वातापी से गणेश की एक मूर्ति को लूट लिया था।
पहले लोहारा राजवंश के राजा हर्ष (1089 ईस्वी से 1101 ईस्वी) एक एक हिंदू राजा था, जिसे मंदिरों को नष्ट करने और अपवित्र करने के लिए जाना जाता था। मंदिरों के खिलाफ हर्ष के कार्यों का धर्म से कोई लेना-देना नहीं था – वह केवल एक अय्याश राजा था जिसके पास पैसा खत्म हो गया था और उसने खजाने और धातु की कीमती मूर्तियों के लिए मंदिरों को लूटना शुरू कर दिया था।
दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास पढ़ने वालीं इतिहासकार रुचिका शर्मा अपने एक यूट्यूब वीडियो में बताती हैं कि हर्ष ने मंदिरों को तोड़ने के लिए बकायदा एक अफसर को नियुक्त किया था, जिसे उन्होंने ‘देव उत्पात नायक’ का टाइटल दिया था।
1042 ईसा पश्चात के करीब चोल साम्राज्य के प्रसिद्ध राजा राजेंद्र चोल ने चालुक्य राजा सोमेश्वर प्रथम के साम्राज्य में घुसपैठ की थी। राजेंद्र चोल के बेटे ने इस घुसपैठ का प्रतिनिधित्व किया था। एक शहर को जलाने, औरतों को अगवा करने अलावा चोल सेना ने एक जैन मंदिर को भी तहस-नहस कर दिया था।
ज्यादातर इतिहासकार यह मानते हैं कि युद्ध के दौरान किसी धार्मिक इमारत को तोड़ने या लूटने के पीछे हमेशा धार्मिक कारण नहीं होते थे। ऐसा अपनी विजय को स्थापित करने और सोना, हीरा, जवाहरात आदि हासिल करना भी किया जाता था।
इन उदाहरणों से यह साबित होता है कि मंदिर तोड़ने को मुगल मानसिकता कहना गलत है क्योंकि मुगलों-तुर्कों के आने से पहले भी भारत में ये सब चल रहा था। जहां तक मुगलों की बात है तो उन्होंने अपने शासन काल में मंदिर तोड़ने के अलावा उसके रखरखाव के भी काम किए थे। विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे दिए फोटो पर क्लिक करें:
इसी साल जनवरी में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए ज्योतिर्मठ (उत्तराखंड) के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नरेंद्र मोदी पर मंदिर तुड़वाने आरोप लगाया था। उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा था, “विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर करीब 150 मंदिर तोड़ दिए गए। कोई 2 हजार साल पुराना था, तो कोई 1 हजार साल पुराना… औरंगजेब से हम इसी कारण से नफरत करते थे और अब अगर यही काम कोई हमारा भाई या बहन करेगी तो उसे हम कैसे बख्श दें…।”
नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब गुजरात की राजधानी गांधीनगर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर 80 मंदिरों को जमींदोज दिया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया के 18 नवंबर, 2008 की एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, “गांधीनगर कलेक्टरेट के अधिकारियों, पुलिस और वन अधिकारियों की एक टीम विध्वंस अभियान में भाग लिया था। गांधीनगर कलेक्टरेट अधिकारियों द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि 107 मंदिर मुख्य सड़कों के किनारे और लगभग 312 मंदिर विभिन्न सेक्टरों के आंतरिक क्षेत्रों में अवैध रूप से बने हुए हैं।” योजना के मुताबिक इन सभी मंदिर तो तोड़ा जाना था। लेकिन जब मंदिर तोड़ने की खबर अखबारों में प्राथमिकता से छपी छपी और विश्व हिंदू परिषद ने विरोध शुरू किया, तो मंदिर तोड़ने का काम रोक दिया गया।
कुछ दिन पहले भाजपा नेता और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा था कि कांग्रेस की घोषणापत्र पर मुस्लिम लीग की छाप है। अब उन्होंने कहा है कि विपक्षी नेताओं की मानसिकता मुगलों जैसी है। शुक्रवार (12 अप्रैल) को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने राहुल गांधी और लालू परिवार पर बिना नाम लिए निशाना साधा।
पीएम ने कहा, “देश का कानून किसी को भी कुछ भी खाने से नहीं रोकता, ना ही ये मोदी किसी को नहीं रोकता है। सबकी स्वतंत्रता है, वेज खाएं या नॉन वेज खाएं। लेकिन ये लोग वीडियो जारी कर देश के लोगों को चिढ़ाते हैं। …इन लोगों की मनसा दूसरी होती है। जब मुगल का शासन था वो आक्रमण करते थे, तो राजा को हरा कर भी संतोष नहीं होता था। जब तक मंदिर तोड़ नहीं लेते थे, उन्हें संतोष नहीं होता था। इनकी मानसिकता भी उन मुगलों जैसी है। …नवरात्रि के दिनों में मछली का वीडियो दिखाकर ये किसको खुश करने की कोशिश करते हैं। ये देश की मान्यताओं पर हमला है।”
#WATCH | J&K: Addressing a public rally in Udhampur, PM Modi says, "The people of Congress and INDI alliance do not care about the sentiments of the majority of the people of the country. They enjoy playing with the sentiments of the people. A person who has been sentenced by the… pic.twitter.com/5HIWCsu5xk
बता दें कि राजद नेता तेजस्वी यादव ने हाल में मछली खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था। तेजस्वी के मुताबिक, वीडियो नवरात्रि से एक दिन पहले का था, जिसे उन्होंने नवरात्रि के पहले दिन ‘भाजपा वालों का आईक्यू टेस्ट करने के लिए’ शेयर किया था। इस बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए फोटो पर क्लिक करें:
जहां तक मुस्लिम लीग की बात है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणास्त्रोत विनायक दामोदर सावरकर के नेतृत्व में हिंदू महासभा, मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकार चला चुकी है। उस दौरान जिन्ना की तरह सावरकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भी भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था। विस्तार से पढ़ने के लिए फोटो पर क्लिक करें:
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि देश का कानून किसी को भी कुछ भी खाने से नहीं रोकता, लोग अपनी मर्जी और इच्छा के अनुसार शाकाहारी या मांसाहारी भोजन कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने विपक्षी नेताओं द्वारा सावन और नवरात्रि के दौरान क्रमश: मटन और मछली खाने का वीडियो शेयर करने पर आपत्ति जताई।
जबकि यह कोई रहस्य की बात नहीं हैं कि भारत में बड़ी मात्रा में मांसाहारी भोजन खाया जाता है। हिंदुओं में भी नवरात्रि और सावन को अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। बंगाल में नवरात्रि में मांसाहार का चलन है, वहीं बिहार में सावन के अंतिम शुक्रवार को जानवरों की बलि की प्रथा है।
मासांहारी थाली की तुलना में शाकाहारी थाली महंगी हुई है। मार्च 2024 में थाली की कीमत सात प्रतिशत बढ़कर 27.3 रुपये हो गई थी, जबकि मार्च 2023 में यह 25.5 रुपये की थी। दूसरी ओर इसी अवधि में मांसाहारी थाली की कीमत 59.2 रुपये से 7% कम होकर 54.9 रुपये हो गई। विस्तार से पढ़ने के लिए फोटो पर क्लिक करें:
भारत के रज‍िस्‍ट्रार जनरल – Registrar General of India (RGI) द्वारा साल 2014 में प्रकाशित सर्वे के आंकड़ों से पता चला था कि देश की 71 प्रतिशत आबादी मांसाहारी है। मोदी के जिस गृह राज्य गुजरात को लेकर आम धारणा रही है कि वह एक शाकाहारी स्टेट है, वहां के हर पांच से दो लोग मांसाहारी हैं। राज्य की करीब 40 प्रतिशत जनता मांसाहारी है। यहां तक कि गुजरात में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की तुलना में अधिक लोग मांसाहारी भोजन करते हैं। गुजरात में लगभग बराबर संख्या में पुरुष (39.90%) और महिलाएं (38.20%) स्वीकार करती हैं कि वे मांसाहारी हैं।
ऐतिहासिक रूप से भी शाकाहार भारत में एक रिजेक्टेड आइडिया साबित हुआ है। फूड हिस्टोरियन और चिकित्सक मनोशी भट्टाचार्य ने अंग्रेजी पत्रिका डाउन टू अर्थ से बातचीत में बताया था कि, “हमारे पूर्वजों ने बड़े पैमाने पर उन भोजनों पर खाया, जो आसानी से उपलब्ध थे, जिसमें सब्जियां और मांस दोनों शामिल थे। 500 ईसा पूर्व में जब जैन धर्म का उदय हुआ, तो इसके अनुयायी शाकाहारी बन गए। यह अमीरों और संभ्रांत लोगों की पसंद थी जो पौधों का आहार बना सकते थे। हालांकि, यह लोकप्रिय नहीं था। आज भी जैन एक अल्पसंख्यक समुदाय हैं। …बौद्ध धर्म में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। बुद्ध मांस खाते थे। दुनिया भर के बौद्ध आज भी मांस खाते हैं। लेकिन जब ह्वेन त्सांग (एक चीनी बौद्ध भिक्षु और विद्वान) 630 ईस्वी में भारत आए, तो उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि भारतीय बौद्ध शाकाहारी बन गए थे। 600 ईसा पूर्व में हरियाणा पर शासन करने वाले सम्राट हर्षवर्द्धन ने शाकाहार लागू करने का प्रयास किया। वह सफल नहीं हुआ। उसी अवधि में कश्मीर पर शासन करने वाले गांधार (अब अफगानिस्तान) के राजा मेघवाहन ने भी शाकाहार को लागू करने का असफल प्रयास किया।”
भारत के पहले कानून मंत्री डॉ. भीमराव अंबेडकर और इतिहासकार प्रोफेसर द्विजेंद्र नारायण झा (D.N. Jha) दोनों ने अपनी-अपनी किताब में लिखा है कि प्राचीन भारत में हिंदुओं द्वारा गोमांस खाया जाता था। डीएन झा ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि वैदिक काल में ब्राह्मण गाय का मांस खाते थे।
डॉ. अंडेबकर ने अपनी किताब ‘The Untouchables: Who Were They and Why They Became Untouchables?’ में लिखा है, “एक वक्त था जब ब्राह्मण सबसे अधिक गोमांस खाया करते थे। …ब्राह्मणों का यज्ञ और कुछ नहीं बल्कि गोमांस के लिए धर्म के नाम पर धूमधाम और समारोह के साथ किए गए निर्दोष जानवरों की हत्या थी।” विस्तार से पढ़ने के लिए फोटो पर क्लिक करे:

source

Previous post आज की ताजा खबर LIVE: थोड़ी देर में जारी होगा BJP का संकल्प पत्र, पार्टी ऑफिस पहुंचे PM मोदी – TV9 Bharatvarsh
Next post मोदी बोले-इंडी गठबंधन वाले परमाणु हथियार खत्म करना चाहते हैं: कहा-लिखकर रख लो, अंबेडकर खुद भी आ जाएं तो संव… – Dainik Bhaskar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *