Lok sabha Election 2024: सीमांचल की चार लोकसभा सीटों पर राजनीतिक सरगर्मी तेज, यहां जीत हार में मुस्ल.. – दैनिक जागरण (Dainik Jagran)

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Lok sabha Election 2024 सीमांचल की चारों सीटों पर राजनीतिक दलों की निगाह है। यहां की सीटों पर मुस्लिम वोटरों की भूमिका सबसे अहम होती है। भाजपा की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन ने चुनावी मोर्चा संभाल रखा है। उधर तेजस्वी यादव के बयान के बाद राजद के पारंपरिक वोटराें में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। जानिए चारों सीटों का समीकरण…।
संजय सिंह, भागलपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुस्लिम संबंधी बयान के बाद सियासी पारा परवान पर है। पक्ष-विपक्ष दोनों इसे भुनाने की कोशिश में जुट गए हैं। देशभर में छिड़ी बहस के साथ ही सीमांचल में भी लोकसभा की चार सीटों पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी इस बयान को माध्यम बना मुस्लिम मतदाताओं को गोलबंद करने में पीछे नहीं दिख रहे। सीमांचल की चार सीटों में सबसे अधिक मुस्लिम वोटरों की संख्या किशनगंज में 65 प्रतिशत है।

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इस चुनावी दंगल में यहां तीनों उम्मीदवार सूर्यापुरी बिरादरी के हैं। तीनों ने चुनावी रण जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस सीट से एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं पार्टी प्रमुख ओवैसी लगातार अपने तीखे भाषणों से वोटरों को लामबंद करने में लगे हैं। जबकि भाजपा ने ओवैसी की राजनितिक शक्ति को कमजोर करने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री शहनवाज हुसैन को मैदान में उतारा है।

कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. जावेद के समर्थन में वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान वोटरों को साधने में लगे हैं। इनके लिए आरजेडी विधायक इजहार स्फी, अंजार नईमी और सऊद आलम भी प्रचार-जनसंपर्क में जुटे हैं। वहीं जदयू प्रत्याशी को जिताने की जिम्मेदारी राज्य सरकार के मंत्री जमा खान ने उठा रखी है। चुनाव कैम्पेन में वह सधे तरीके से वोटरों को समझा-मना रहे हैं।

कटिहार में ​ये हैं कांग्रेस का बड़ा चेहरा

सीमांचल में कटिहार की स्थिति थोड़ी अलग है, कांग्रेस प्रत्याशी तारिक अनवर बड़े चेहरे माने जाते हैं। यहां कांग्रेस का कोई बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा उनके प्रचार में सामने नहीं आया। वे अपनी बिरादरी के स्थानीय नेताओं पर ही भरोसा करते दिख रहे हैं। मुस्लिम वोट की गोलबंदी को लेकर जहां वे निश्चिंत हैं। वहीं हिन्दू वोट में सेंधमारी की तैयारी भी दिख रही है। इसके लिए राजद नेता तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी ने कटिहार में रह कर बेहतर फील्डिंग की है। यहां जदयू प्रत्याशी दुलाल चंद गोस्वामी के पक्ष में जदयू के कुछ अल्पसंख्यक नेता मुस्लिम वोट में सेंधमारी करने की जुगत लगातार लगा रहे हैं।
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किशनगंज, अररिया में कितने फीसदी मुस्लिम वोटर

ये नेता अल्पसंख्यक वोटरों को राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सहूलियतों का पाठ पढ़ा रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो किशनगंज में अल्पसंख्यक वोटरों की संख्या 65.08 प्रतिशत है। अररिया में यह संख्या 41.83 प्रतिशत है। कटिहार में 42.73 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं, जबकि पूर्णिया में महज 24.27 फीसद अल्पसंख्यक वोटर हैं। वर्तमान राजनितिक परिवेश में 2019 के मुकाबले इस बार मुसलामानों के गोलबंद होकर मतदान करने की संभावना अधिक दिख रही है। अबकी बार मुस्लिम समुदाय में जाति या उपजातियों का राजनितिक महत्व बढ़ गया है। भाजपा द्वारा पसमांदा की लामबंदी जोर पकड़ने से विपक्षी खेमे में अपने वोटरों को एकजुट रखने का दबाव बढ़ गया है।

अररिया में राजद-भाजपा में टक्कर

अररिया में राजद और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है। सीमांचल के गांधी कहे जाने वाले तस्लीमुद्दीन के पुत्र शाहनवाज यहां से राजद प्रत्यशी हैं। वे राज्य सरकार में मंत्री भी रहे हैं। तस्लीमुद्दीन सीमांचल की राजनीति का एक बड़ा चेहरा थे। उनकी सीमांचल की राजनीति पर मजबूत पकड़ थी। इधर, भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में शाहनवाज हुसैन मुस्लिम वोटों में सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं। जनमत जुटाने को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 26 अप्रैल को अररिया के फारबिसगंज में चुनावी सभा करेंगे।

पूर्णिया में पप्पू यादव ने बनाया मुकाबला दिलचस्प

उधर, पूर्णिया में संघर्ष दिलचस्प होता दिख रहा है। तेजस्वी यादव के बयान के बाद राजद के पारंपरिक वोटरों में ऊहापोह की स्थति है। निर्दलीय प्रत्याशी पप्पू यादव की मजबूत पकड़ मुस्लिम वोटरों पर रही है। पप्पू कांग्रेस के टिकट के प्रबल दावेदार थे, पर राजनीतिक दांव-पेंच के कारण उन्हें बेटिकट कर दिया गया। अल्पसंख्यक बिरादरी के लोग यह मानते हैं कि भाजपा प्रत्याशी संतोष कुशवाहा को पप्पू यादव ही चुनौती दे सकते हैं। ऐसे में राजद प्रत्याशी बीमा भारती लगातार कोशिश के वाबजूद अपना ग्राफ ऊपर नहीं चढ़ा पा रहीं। बहरहाल भाजपा की पुरजोर कोशिश है कि राजद के परंपरागत वोट में सेंधमारी की जाए।
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