लोकसभा चुनाव 2024 का दूसरा चरण 26 अप्रैल को है। 13 राज्यों की 87 सीटों पर मतदान होना है। इसमें मेरठ सहित उत्तर प्रदेश की आठ सीटें भी शामिल हैं। दूसरे चरण के लिए भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जमकर प्रचार किया है।
मेरठ में पिछले छह से ज्यादा चुनावों में कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसी बड़ी पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार न दिया हो। इस बार किसी पार्टी ने मुस्लिम कैंडिडेट नहीं दिया है। बीजेपी ने लगातार तीन बार सांसद रहे राजेंद्र अग्रवाल को हटा कर अभिनेता से नेता बने अरुण गोविल को उतारा है। सपा-कांग्रेस की साझा उम्मीदवार सुनीता वर्मा (सपा) हैं। बसपा ने भी देवव्रत त्यागी को टिकट दिया है।
लोकसभा चुनाव 2019 में बसपा ने (सपा के साथ गठबंधन में) हाजी मोहम्मद को उतारा था। हाजी को भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल से केवल 0.39 प्रतिशत कम (47.78) वोट मिले थे।
इस बार बसपा का अलग उम्मीदवार होने और सपा का कांग्रेस से गठबंधन होने के चलते वोट बंटने की संभावना है। ऐसा हुआ तो जीतने वाले उम्मीदवार का वोट प्रतिशत घट जाएगा। इस लिहाज से देखा जाए तो अगर भाजपा यह सीट बचाने में कामयाब भी हो जाती है तो अरुण गोविल की जीत राजेंद्र अग्रवाल जैसी शानदार नहीं हो सकती है।
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी स्वीकार करते हैं, “जिस निर्वाचन क्षेत्र में उनकी (मुसलमानों) संख्या 36% है, वहां मुस्लिम उम्मीदवार की अनुपस्थिति ने धार्मिक ध्रुवीकरण की संभावना को खत्म कर दिया है। 2009 से भाजपा को धार्मिक ध्रुवीकरण का फायदा मिलता रहा है… इसके अलावा, गोविल पर ‘बाहरी’ होने का भी टैग है।” विस्तार से फोटो पर क्लिक कर पढ़ें:
प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं ने विपक्ष द्वारा राम मंदिर के निमंत्रण को अस्वीकार करने के मुद्दे को जमकर उछाला है। साथ ही कांग्रेस व समाजवादी पार्टी की ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करने का आरोप लगाकर बढ़त बनाने की कोशिश की है।
वहीं INDIA ब्लॉक में शामिल कांग्रेस और सपा का आरोप है कि भाजपा से देश के लोकतंत्र को खतरा है। वे इस चुनाव को देश के संवैधानिक मूल्यों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
यूपी की इन सीटों पर मतदान:
दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश की जिन आठ सीटों पर मतदान होना है, उनमें से सात सीटें पिछले आम चुनाव में भाजपा के खाते में गई थीं। उन सीटों के नाम हैं- अलीगढ़, गाजियाबाद, बागपत, बुलंदशहर, मेरठ, मथुरा और गौतम बुद्ध नगर। एक सीट (अमरोहा) बसपा जीती थी। दानिश अली सांसद बने थे। लेकिन पिछले साल के आखिरी माह में बसपा ने दानिश अली को निलंबित कर दिया था। इस बार वह कांग्रेस की टिकट पर अमरोहा से मैदान में हैं। बसपा ने मुजाहिद हुसैन और भाजपा ने कंवर सिंह तंवर को उतारा है।
पिछले आम चुनाव में इन आठ सीटों में से चार पर बसपा दूसरे नंबर पर रही थी। मेरठ में तो बसपा और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। भाजपा उम्मीदवार राजेंद्र अग्रवाल को 48.2 प्रतिशत वोट मिला था, वहीं बसपा प्रत्याशी हाजी मोहम्मद 47.8 प्रतिशत मत पाने में कामयाब रहे थे। ध्यान रहे पिछला आम चुनाव सपा और बसपा ने मिलकर लड़ा था। इस बार बसपा अकेले मैदान में है।
अमरोहा की सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला बताया जा रहा है। लगभग 40% मुस्लिम मतदाताओं वाले इस सीट पर यह देखना होगा कि अल्पसंख्यक वोट किस ओर झुकेंगे। इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार दानिश अली के लिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव दोनों ने संयुक्त रूप से प्रचार किया है।
नरेंद्र मोदी भी अपनी पार्टी के उम्मीदवार कंवर सिंह तंवर के लिए अमरोहा में प्रचार कर चुके हैं। पीएम ने अमरोहा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए दानिश अली पर ‘भारत माता की जय’ का नारा नहीं लगाने का आरोप लगाया था। मोदी ने सभा में मौजूद लोगों की तरफ हाथ उठाकर पूछा था, “क्या एक व्यक्ति, जो भारत माता की जय स्वीकार नहीं कर सकता, वह संसद में अच्छा लगेगा? क्या ऐसे व्यक्ति को संसद में प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए?”
आठों सीटों का समीकरण जानने के लिए फोटो पर क्लिक करें:
चुनाव आयोग की शुरुआती योजना के मुताबिक, दूसरे चरण में 89 सीटों पर वोटिंग होनी थी, लेकिन मध्य प्रदेश की बैतूल सीट से बसपा प्रत्याशी अशोक भलावी के निधन के बाद, निर्वाचन क्षेत्र में मतदान तीसरे फेज (7 मई) के लिए शिफ्ट कर दिया गया।
दूसरे चरण में मणिपुर आउटर सीट के कुछ हिस्सों में मतदान होना है, इसलिए इसे भी गिना जा रहा। हालांकि मणिपुर की दोनों लोकसभा सीटों पर पहले चरण में मतदान हो चुका है।
