कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के महिलाओं के मंगलसूत्र से जुड़े बयान पर तीखा जवाब दिया है.
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के महिलाओं के मंगलसूत्र से जुड़े बयान पर तीखा जवाब दिया है.
रविवार को, राजस्थान के बांसवाड़ा में चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कांग्रेस महिलाओं के गहने और मंगलसूत्र लेकर पैसा ऐसे लोगों में बांट देगी जिनके अधिक बच्चे हैं, जो घुसपैठिए हैं.
मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का उदाहरण देते हुए कहा था कि कांग्रेस के लिए देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का है.
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर कांग्रेस ने कहा है कि ऐसे बयानों से वे देश में नफ़रत के बीज बो रहे हैं.
वहीं, कर्नाटक में एक रैली को संबोधित करते हुए अब प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर तीख़ा जवाब दिया है.
प्रियंका गांधी ने कहा, “कैसी-कैसी बहकी-बहकी बातें की जा रही हैं. पिछले दो दिनों से कह रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी आपका मंगलसूत्र, आपका सोना छीनना चाहती हैं. 70 सालों से ये देश स्वतंत्र हैं, 55 साल कांग्रेस की सरकार रही है, क्या किसी ने आपका सोना छीना, आपके मंगलसूत्र छीने. इंदिरा गांधी ने जब जंग हुई, अपना सोना इस देश को दिया. मेरी मां का मंगलसूत्र इस देश के लिए क़ुर्बान हुआ है.”
प्रियंका गांधी ने कहा, “मंगलसूत्र का महत्व समझते तो वो ऐसी अनैतिक बातें ना करते. किसान पर क़र्ज़ चढ़ता है तो उसकी पत्नी अपनी मंगलसूत्र को गिरवी रखती है. बच्चों की शादी होती है या दवाई की ज़रूरत होती है तो महिलाएं अपने गहने गिरवी रखती हैं.”
प्रियंका गांधी ने कहा, “ये बात ये लोग नहीं समझते और इसका प्रमाण ये है कि जब नोटबंदी हुई और जब महिलाएं की बचत इन्होंने ली और कहा कि बैंकों में पहुंचाओ, तब मोदी जी कहां थे. वो आपसे आपकी बचत का पैसा ले रहे थे.”
प्रियंका ने कहा, “जब देश में उन्होंने लॉकडाउन किया और सारे मज़दूर देश भर से, बेंगलुरु से, यूपी-बिहार और अलग-अलग स्थानों के लिए पैदल निकले, जब कोई सहारा नहीं मिल रहा था, तब महिलाओं ने अपने गहने गिरवी रखें, तब मोदी जी कहां थे? किसान आंदोलन हुआ, 600 किसान शहीद हुए, उनकी विधवाओं के मंगलसूत्र के बारे में सोचा मोदी जी ने.”
मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान महिलाओं को नग्न करके घुमाने और इस घटना पर प्रधानमंत्री के कोई प्रतिक्रिया ना देने पर सवाल करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, “मणिपुर में एक जवान की बीवी का वस्त्रहरण करके पूरे देश के सामने घुमाया, मोदी जी चुप थे, उसके मंगलसूत्र के बारे में नहीं सोचा उन्होंने.”
प्रियंका ने कहा कि मोदी महिलाओं को डराकर उनका वोट हासिल करना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, “पलक नहीं झपकाई उन्होंने, आज वो चुनाव के लिए, वोटों के लिए, ऐसी बातें कर रहे हैं, डरा रहें हैं महिलाओं को ताकि वो डरकर वोट करें, शर्म आनी चाहिए उन्हें.”
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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सूरत में बीजेपी के उम्मीदवार की निर्विरोध जीत को जनता का अपमान बताया है.
सूरत में कांग्रेस के उम्मीदवार का पर्चा निरस्त हो जाने और अन्य उम्मीदवारों के अपना नाम वापस लेने के बाद बीजेपी उम्मीदवार को विजेता घोषित कर दिया गया है.
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा है, “सूरत में जनता का अपमान हुआ है. वहां वोट ही नहीं डालने दिया गया. हम तो पहले से कह रहे हैं, भाजपा वोट डालने का अधिकार ही छीन लेगी. देखिए वही हुआ है. ये भी संविधान की हत्या है क्योंकि इस तरह धांधली से जीते हुए लोग, जनता के चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हैं.”
अखिलेश ने लिखा, “भाजपा चुनाव आयोग को ठेंगा दिखा रही है. चुनाव आयोग को कम से कम अपनी मानहानि के लिए तो कार्रवाई करनी चाहिए.”
अखिलेश यादव ने चंडीगढ़ के मेयर पद के चुनाव का भी ज़िक्र किया जहां बीजेपी उम्मीदवार की जीत को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था.
अखिलेश ने कहा, “चंडीगढ़ मेयर चुनाव की तरह हमारी एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग से अपील है कि ‘सूरत’ की घटना का स्वत: संज्ञान ले और चुनाव रद्द करके सब षड्यंत्रकारियों को सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाए. सूरत में नये सिरे से चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए.”
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इसराइल की सेना ने ग़ज़ा के ख़ान यूनिस इलाक़े के नासेर अस्पताल में फ़लस्तीनी लोगों को दफ़न करने के आरोपों को ख़ारिज किया है.
इस मेडिकल कांप्लेक्स के आंगन में मिली सामूहिक क़ब्र में दो सौ से अधिक लोगों के शव बरामद हुए हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक़ मारे गए कुछ लोगों के हाथ बांधे गए थे और गोलियां मारी गईं थीं.
एक बयान में इसराइली सैन्य बलों ने फ़लस्तीनी आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हुए इन्हें आधारहीन बताया है.
आरोप हैं कि मारे गए कुछ लोगों का नरसंहार किया गया जबकि अन्य शवों को एक क़ब्रिस्तान से उखाड़कर यहां दफ़नाया गया.
आईडीएफ़ का कहना है कि हमास चरमपंथियों को निशाना बनाकर किए गए हमले सटीक थे.
नासेर अस्पताल को इसराइली सैन्य बलों को ने घेराबंदी के बाद अपने नियंत्रण में ले लिया था.
इसराइली बलों के यहां से जाने के बाद अस्पताल के आंगन में मिली सामूहिक क़ब्र से दो सौ से अधिक शव निकाले गए हैं.
वहीं, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क का कहना है कि वो ग़ज़ा में स्वास्थ्य सेवाओं को बर्बाद किए जाने और अस्पतालों में सामूहिक क़ब्रे मिलने से वे बेहद परेशान हैं.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने हाल ही में ग़ज़ा पर हुए इसराइली हवाई हमलों की भी आलोचना की है.
तुर्क का कहना है कि इन हवाई हमलों में मारे जाने वाले लोगों में अधिकतर महिलाएं और बच्चे हैं.
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ग़ज़ा में इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच युद्ध छिड़े 200 दिन से अधिक हो गए हैं.
हाल के कुछ सप्ताहों में इसराइल ने इस युद्ध के दौरान की सबसे भीषण बमबारी ग़ज़ा पर की है.
अधिकतर बमबारी ग़ज़ा के उत्तरी इलाक़ों में की गई है. इसराइली सेना के एक प्रवक्ता के मुताबिक़ 25 ठिकानों को निशाना बनाया गया है, इनमें दक्षिणी ग़ज़ा की सैन्य निगरानी चौकियां और मिसाइल लांच पोस्ट भी शामिल हैं.
वहीं, हाल के दिनों में इसराइल पर हमले तेज़ करने वाले लेबनान के संगठन हिज़बुल्लाह ने अपने दो सदस्यों की मौत की जानकारी दी है.
हिज़बुल्लाह का कहना है कि इनमें से एक की मौत लेबनान के टाइर शहर के पास हवाई हमले में हुई है.
इसी बीच, क़तर हमास और इसराइल के बीच संघर्ष-विराम कराने के प्रयासों में लगा है.
क़तर में ही हमास का राजनीतिक दफ़्तर भी है. क़तर ने उन रिपोर्टों को ख़ारिज किया है जिनमें कहा गया था कि क़तर हमास से राजनीतिक मुख्यालय को खाली करा रहा है.
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जर्मनी में पुलिस ने चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में यूरोपीय सांसद के साथ काम करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है.
चीनी मूल के इस जर्मन नागरिक को पूर्वी शहर ड्रेस्डेन से गिरफ़्तार किया गया है.
जियान जी नाम का ये व्यक्ति क़रीब बीस साल पहले एक छात्र के रूप में यहां आया था.
जियान पर आरोप है कि वो यूरोपीय संसद के सदस्य मैक्सिमिलियन क्राह के साथ काम करते हुए चीन को संवेदनशील जानकारियां भेज रहे थे.
जियान दक्षिणपंथी एएफ़डी पार्टी के राजनेता मैक्सिमिलियन क्रास के सहायक के रूप में काम करते थे.
उन पर जर्मनी में चीन विरोधी कार्यकर्ताओं के बारे में जानकारियां जुटाकर चीन को सौंपने के आरोप भी लगाए गए हैं.
एक दिन पहले ही जर्मन पुलिस ने तीन लोगों को चीन के लिए जासूसी करने के शक में गिरफ़्तार किया था.
इन लोगों पर जर्मनी की सैन्य तकनीक से जुड़ी जानकारियां चुराकर चीन को पहुंचाने के आरोप हैं.
वहीं ब्रिटेन में भी दो व्यक्तियों पर चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में मुक़दमा शुरू किया गया है.
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संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क का कहना है कि वो ग़ज़ा में स्वास्थ्य सेवाओं को बर्बाद किए जाने और अस्पतालों में सामूहिक क़ब्रे मिलने से वे बेहद परेशान हैं.
ग़ज़ा के ख़ान यूनिस इलाक़े के नासेर अस्पताल के आंगन से इसराइली क़ब्ज़े के बाद मिली सामूहिक क़ब्र में 200 से अधिक लोगों के शव मिले हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक़ नासेर मेडिकल कॉम्प्लेक्स में मिले इन शवों में से कुछ लोगों को हाथ बांधकर गोलियां मारी गईं थीं.
वहीं, अस्पताल की इसराइली घेराबंदी के दौरान बनाए गए एक क़ब्रिस्तान से उखाड़कर भी शवों को सामूहिक क़ब्र में दफ़नाया गया था.
फ़लस्तीनी समूहों ने इसराइल पर नासेर अस्पताल में नरसंहार करने के आरोप लगाये हैं.
वहीं इन आरोपों पर इसराइल का कहना है कि वो इन रिपोर्टों को देख रहा है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने हाल ही में ग़ज़ा पर हुए इसराइली हवाई हमलों की भी आलोचना की है.
तुर्क का कहना है कि इन हवाई हमलों में मारे जाने वाले लोगों में अधिकतर महिलाएं और बच्चे हैं.
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ग़ज़ा में जंग के ख़िलाफ़ अमेरिका के कोलंबिया से लेकर येल और अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
सोमवार रात पुलिस ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन को रोकने की कोशिश के दौरान कई गिरफ़्तारियां कीं.
इससे पहले दिन में ही येल में भी दर्जनों छात्रों को गिरफ़्तार किया गया था. वहीं, कोलंबिया में क्लासेज़ कैंसिल कर दी गईं.
छात्र बर्कली, एमआईटी और देश के अन्य टॉप कॉलेजों में भी इसी तरह डेरा डालकर बैठे हैं.
सात अक्टूबर को हमास के इसराइल पर हमले के बाद से ग़ज़ा में शुरू हुई जंग के साथ ही अमेरिका के कॉलेज-यूनिवर्सिटियों में इन पर तीखी बहस और प्रदर्शन हो रहे हैं.
कुछ छात्र इसराइल के पक्ष में हैं तो वहीं कुछ ग़ज़ा में उसकी कार्रवाई के विरुद्ध हैं. कुछ का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ही यहूदी विरोधी और इस्लामोफ़ोबिक दोनों तरह के मामले बढ़े हैं.
कैंपसों में हो रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह यहूदी विरोधी और उन लोगों की भी निंदा करते हैं जो ये नहीं समझ पा रहे कि फ़लस्तीनियों पर क्या गुज़र रही है.
अमेरिकी विश्वविद्यालयों में हो रहे प्रदर्शन तब खबरों में आए जब बीते सप्ताह न्यूयॉर्क सिटी पुलिस ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी कैंपस में 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी सभा में एक बार फिर मुसलमानों पर टिप्पणी करते हुए विपक्षी कांग्रेस और इंडिया अलायंस पर निशाना साधा है.
पीएम मोदी ने मंगलवार को राजस्थान के टोंक में अपने भाषण में आरोप लगाया है कि कांग्रेस पार्टी दलितों और पिछड़ों का आरक्षण छीनकर मुसलमानों को देना चाहती है.
इससे पहले नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बांसवाड़ा में कहा था कि कांग्रेस पार्टी देश के लोगों की संपत्ति लेकर ऐसे लोगों में बांटना चाहती है जो अधिक बच्चे पैदा करते हैं और जो घुसपैठिए हैं.
प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर साल 2006 में दिया मनमोहन सिंह का बयान दोहराया.
इस बयान में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला 'दावा' दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों का है.
प्रधानमंत्री अपने चुनावी भाषणें में बार-बार ये कह रहे हैं कि मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला 'हक़' मुसलमानों का है.
हालांकि, तत्कालीन सरकार और कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस आरोप को खारिज किया है.
टोंक की सभा में मोदी ने कहा, “इस देश में जब संविधान बना था तब धर्म के आधार पर आरक्षण का घोर विरोध हुआ था ताकि हमारे एससी-एसटी, ओबीसी समुदायों को सुरक्षा मिलती रहे, लेकिन मनमोहन सिंह जी ने भाषण दिया था और उस सभा में मैं मुख्यमंत्री होने के नाते मौजूद था."
"मनमोहन सिंह ने कहा था कि मुस्लिमों का देश के संसाधनों पर पहला हक़ है, ये मनमोहन जी का बयान हैं. ये संयोग नहीं था, ये अकेला बयान नहीं था. कांग्रेस पार्टी की सोच हमेशा तुष्टीकरण की रही है, वोट बैंक की राजनीति की रही है.”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “2004 में जैसे ही कांग्रेस की केंद्र में सरकार बनीं, उसके सबसे पहले किए गए कामों में था- आंध्र प्रदेश में एससी- एसटी के आरक्षण में कमी करके मुसलमानों को आरक्षण देने का प्रयास. ये एक पायलट प्रोजेक्ट था जिसे कांग्रेस पूरे देश में आज़माना चाहती थी."
"2004 से 2010 के बीच कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश में चार बार मुसलमानों के लिए आरक्षण लागू करने की कोशिश की, लेकिन कानूनी अड़चनों की वजह से, सुप्रीम कोर्ट की जागरूकता के कारण वो अपना मंसूबा पूरा नहीं कर पाये. 2011 में कांग्रेस ने इसे देश में लागू करने की कोशिश की, एससी-एसटी और ओबीसी को मिला हुआ अधिकार छीनकर दूसरों को देने का खेल किया. कांग्रेस ने इतने प्रयास ये जानते-बूझते किए कि ये सब संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ था. लेकिन कांग्रेस ने संविधान की परवाह नहीं की, बाबा साहेब अंबेडकर की परवाह नहीं की.”
पीएम मोदी ने कहा, “जब हमें मौका मिला तो हमने पहला काम किया, उन्होंने जो एससी-एसटी से छीनकर मुस्लिम कोटा निकाला था, उसे ख़त्म किया. जिनका हित था, उसे सुरक्षित किया. मोदी संविधान को समझता है, मोदी संविधान को समर्पित है, मोदी बाबा साहेब अंबेडकर की पूजा करने वाला व्यक्ति है.”
कांग्रेस पर मुसलमानों के तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए मोदी ने कहा, “ये लोग दलितों-पिछड़ों के आरक्षण में सेंधमारी करके, वोट बैंक पॉलिटिक्स के लिए, अपनी ख़ास जमात को अलग से आरक्षण देना चाहते थे, जबकि संविधान इसके बिलकुल ख़िलाफ़ है. कांग्रेस और इंडी अलायंस वाले मज़हब के आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देना चाहते थे.”
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भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामले में योग गुरु रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर बालकृष्ण ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उन्होंने अख़बारों में माफ़ीनामा छपवाया है.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद से सवाल किया कि कल के अख़बारों में छपे ये माफ़ीनामे क्या उतने ही बड़े थे, जितने उनके उत्पादों के विज्ञापन थे?
रामदेव और बालकृष्ण को सुप्रीम कोर्ट में आज खुद भी पेश होना था.
पिछली सुनवाई में रामदेव और बालकृष्ण दोनों ने सुप्रीम कोर्ट से माफ़ी मांगी थी और सार्वजनिक रूप से माफ़ीनामा छापने का भी प्रस्ताव दिया था.
जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच पतंजलि आयुर्वेद, इसके मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण और सह-संस्थापक रामदेव के ख़िलाफ़ भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े केस की सुनवाई कर रही है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, रामदेव और बालकृष्ण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि सोमवार को 67 अख़बारों में माफ़ीनामा छपवाया गया था.
इस मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल तक के लिए टल गई है. जस्टिस कोहली ने इसके बाद पतंजलि आयुर्वेद को आदेश दिया है कि वे अख़बारों में छपे विज्ञापन को काटकर रिकॉर्ड पर रखें. अगर इसकी फ़ोटोकॉपी कर के, इसे बड़ा कर के दिखाया गया तो ये सुप्रीम कोर्ट को अच्छा नहीं लगेगा.
जस्टिस कोहली ने कहा कि वह ये देखना चाहती हैं कि विज्ञापन कितना बड़ा छपा था.
कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में हुई सुनवाई में रामदेव, बालकृष्ण और पतंजलि आयुर्वेद की बिना शर्त वाली माफ़ी को ये कहते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया था कि माफ़ी 'गलती पकड़े जाने पर' मांगी गई है.
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ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स के मालिक एलन मस्क के बीच ज़ुबानी जंग जारी है.
ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने अब एलन मस्क को एक "घमंडी अरबपति" बताया है. दोनों के बीच बीते सप्ताह सिडनी के चर्च में एक बिशप पर चाकू से हुए हमले के फुटेज को लेकर वाद-विवाद हो रहा है.
सोमवार को ऑस्ट्रेलिया की एक कोर्ट ने एलन मस्क की एक्स को सिडनी हमले के वीडियो हटाने का आदेश दिया था.
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ का बयान एलन मस्क के एक मीम शेयर करने के बाद आया था. इसके ज़रिए मस्क ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार पर सेंसरशिप का आरोप लगाया था.
बिशप पर हमले का वीडियो ऑस्ट्रेलियाई यूज़र्स के लिए हटा दिया गया है लेकिन इसे दुनिया के बाकी हिस्सों में नहीं हटाया गया है.
मंगलवार को पीएम अल्बनीज़ ने एबीसी न्यूज़ से कहा, "एलन मस्क को लगता है कि वह क़ानून ही नहीं बल्कि शालीनता से भी ऊपर हैं."
पिछले सप्ताह ऑस्ट्रेलिया के स्वतंत्र नियामक ई-सेफ़्टी कमिश्नर ने एक्स और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने गुड शेफर्ड चर्च में हुए हमले के वीडियो नहीं हटाए, तो भारी जुर्माना भरना पड़ेगा.
अल्बनीज़ ने कहा, "मुझे ये असामान्य लगता है कि एक्स ने आदेश का पालन करने की बजाय अपने केस में जिरह करने का फ़ैसला किया है."
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन में हनुमान चालीसा सुनना भी गुनाह हो जाता है.
पीएम मोदी ने कर्नाटक के एक मामले का ज़िक्र करते हुए ये बात कही. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है.
उन्होंने कहा, "आज हनुमान जयंती पर मुझे कुछ दिन पहले की एक तस्वीर याद आ रही है. हो सकता है आप लोगों में से कई के पास ये ख़बर नहीं पहुंची होगी. मीडिया का काम था ये ख़बर पहुंचाए लेकिन नहीं पहुंचाई होगी. वो तस्वीर है कांग्रेस के शासन वाले कर्नाटक की."
पीएम मोदी ने कहा, "कुछ दिन पहले वहां एक छोटे दुकानदार को सिर्फ़ इसलिए बुरी तरह से पीटा गया, लहूलुहान कर दिया गया क्योंकि वह अपनी दुकान में बैठे-बैठे हनुमान चालीसा सुन रहा था."
"कांग्रेस की कर्नाटक सरकार का काम देखिए. अपनी छोटी सी दुकान में एक गरीब आदमी, भक्ति भाव से हनुमान जी का स्मरण करते हुए हनुमान चालीसा सुन रहा था, उसको लहूलुहान कर दिया गया."
"आप कल्पना कर सकते हैं कि कांग्रेस के राज में हनुमान चालीसा सुनना भी गुनाह हो जाता है, अपनी आस्था का पालन करना भी मुश्किल हो जाता है."
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कथित शराब घोटाले में तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जेल में पहली बार इंसुलिन मुहैया कराई गई है.
केजरीवाल के शुगर और इंसुलिन की ज़रूरत को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच जमकर बयानबाज़ी हो रही है.
आम आदमी पार्टी के विधायक और दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट कर के इसकी जानकारी दी है.
उन्होंने कहा, "ख़बर आ रही है अंततः जेल प्रशासन ने मुख्यमंत्री जी को बढ़ती हुई शुगर के लिए इंसुलिन दी. आज देश की राजधानी के मुख्यमंत्री को एक इंसुलिन के लिए भी कोर्ट जाना पड़ रहा है."
"भाजपा और केंद्र सरकार के अधीन अफ़सर कहते हैं सभी क़ैदी एक समान हैं. क्या इंसुलिन के लिए सभी तिहाड़ के क़ैदी कोर्ट जाते हैं? क्या सभी क़ैदियों को बीमारी की दवाई के लिए कोर्ट जाना पड़ता है? क्या सभी क़ैदियों को इंसुलिन के लिए एक हफ़्ता टीवी और अख़बार में बहस करनी पड़ती है?"
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सौरभ भारद्वाज ने एक अन्य ट्वीट में कहा, "आज साफ़ हो गया मुख्यमंत्री सही थे, उन्हें इंसुलिन की ज़रूरत थी. मगर भाजपा की केंद्र सरकार के अधीन अधिकारी जानबूझकर उनका इलाज नहीं कर रहे थे. बताओ भाजपा वालों! अगर इंसुलिन की ज़रूरत ही नहीं है तो अब क्यों दे रहे हैं?"
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तिहाड़ के जेल के अधिकारियों के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया है कि केजरीवाल को एम्स के डॉक्टरों की सलाह पर सोमवार शाम लो डोज़ की दो यूनिट इंसुलिन दी गई है.
अधिकारियों ने बताया कि केजरीवाल का ब्लड शुगर लेवल सोमवार शाम सात बजे 217 था, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें इंसुलिन देने का निर्णय किया.
इससे पहले सीएम केजरीवाल ने तिहाड़ जेल सुपरिटेंडेंट को चिट्ठी लिखकर कहा था कि हाई शुगर होने के बावजूद उन्हें इंसुलिन नहीं मिल रही है.
अरविंद केजरीवाल को बीती 21 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय ने शराब नीति में कथित घोटाले से जुड़े केस में गिरफ़्तार किया गया था. वह एक अप्रैल से तिहाड़ जेल में हैं.
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सैन्य अभ्यास के दौरान मलेशियाई नौसेना के दो हेलीकॉप्टर के आपस में टकराने से 10 लोगों की मौत हो गई है.
नीचे स्टेडियम में गिरने से पहले हेलीकॉप्टर एक-दूसरे से टकराए. ये हादसा मलेशिया के लुमुत में हुआ, जहाँ नौसेना का अड्डा है.
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अभी तक हादसे में किसी के भी बचने की जानकारी नहीं मिली है.
क्रैश हुए एक हेलीकॉप्टर में सात लोग सवार थे जबकि दूसरे में तीन लोग थे.
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मलेशिया में नौसेना के एक समारोह के प्रशिक्षण के दौरान हवा में दो हेलीकॉप्टर टकराकर क्रैश हो गए.
मलेशियाई नौसेना के ये हेलीकॉप्टर रॉयल मलेशियन नेवी सेलिब्रेशन के लिए ट्रेनिंग कर रहे थे.
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि दोनों हेलीकॉप्टर में कम से कम 10 क्रू मेंबर सवार थे.
कुछ रिपोर्टों में ये भी कहा जा रहा है कि हादसे में जान-माल का नुकसान हुआ है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है.
स्थानीय मीडिया में आई फुटेज के अनुसार एक स्टेडियम में क्रैश होकर गिरने से पहले दोनों हेलीकॉप्टर आपस में टकराए.
इस हादसे की अधिक जानकारी के लिए बीबीसी मलेशियाई प्रशासन से संपर्क कर रहा है.
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आईपीएल में मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ शतक बनाने वाले राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ी यशस्वी जायसवाल ने अपनी लय वापस पाने को लेकर प्रतिक्रिया दी है. अभी तक यशस्वी अच्छी लय में नहीं दिख रहे थे.
मैच के बाद यशस्वी ने कहा कि बुनियादी चीज़ों पर ध्यान लगाने और मुश्किल घड़ी में ज़्यादा न सोचने से ही उन्हें फॉर्म में वापस लौटने में मदद मिली है.
जायसवाल के शतक की बदौलत राजस्थान रॉयल्स ने मुंबई इंडियंस को नौ विकेट से शिकस्त दी.
बाएं हाथ के बल्लेबाज़ यशस्वी जायसवाल आईपीएल के इस सीज़न की अपनी सात पारियों में से किसी में बड़ा कमाल नहीं दिखा पाए थे.
लेकिन बीती रात मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ उन्होंने अपनी पारी में 60 गेंदों पर नाबाद रहते हुए 104 रन बनाए.
मैच के बाद उन्होंने ब्रॉडकास्टर्स से कहा, "मैंने शुरुआत से ही आनंद लिया और ये सुनिश्चित किया कि मैं हर बॉल को ध्यान से देखूं और उस पर अच्छे क्रिकेटिंग शॉर्ट्स खेलूं. मैं वह करने की कोशिश कर रहा हूं, जिसमें मैं अच्छा हूं और कुछ दिन अच्छे और कुछ बुरे होते हैं लेकिन मैं ज़्यादा नहीं सोच रहा."
यशस्वी जायसवाल ने 2020 में आईपीएल में डेब्यू किया था. उन्होंने आईपीएल के 45 मुक़ाबलों में अभी तक दो सेंचुरी जड़ी हैं.
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के महत्वाकांक्षी रवांडा बिल को औपचारिक तौर पर मंज़ूरी मिल गई है.
ये बिल ब्रिटेन के निचले सदन यानी हाउस ऑफ़ कॉमन्स में पास हो गया था लेकिन ऊपरी सदन (हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स) में अटका हुआ था. अब हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स ने भी विधेयक को पास कर दिया है. शाही परिवार की मंज़ूरी के बाद ये विधेयक क़ानून बन जाएगा.
रवांडा क़ानून के ज़रिए ब्रिटेन सरकार अपने यहां शरण लेने वाले कुछ लोगों को मध्य अफ़्रीकी देश रवांडा भेजेगी.
इस विधेयक की विपक्षी पार्टियों ने जमकर आलोचना की लेकिन कई दौर की बहस के बाद आख़िरकार सोमवार रात विपक्ष ने अपनी आपत्तियां वापस ले लीं और बिल पास हो गया.
पीएम सुनक ने कहा कि रवांडा के लिए पहली उड़ान 10 से 12 सप्ताह के भीतर रवाना की जाएगा.
ब्रिटेन सरकार का कहना है कि रवांडा विधेयक का उद्देश्य ब्रिटेन में इंग्लिश चैनल के रास्ते अवैध रूप से आने वाले शरणार्थियों को रोकना है.
गृह मंत्री जेम्स क्लेवरली ने कहा कि विधेयक पास होना "शरणार्थियों को रोकने की हमारी योजना में ऐतिहासिक क्षण है."
ब्रिटेन सरकार की इस योजना पर नवंबर 2023 में उस समय रोक लगी जब यूके की सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से रवांडा योजना को ग़ैर-काननी बताया था.
इसके बाद ब्रिटेन की सरकार ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए नया विधेयक संसद में रखा था.
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ग़ज़ा में जारी जंग के विरोध में दर्जनों नॉमिनेटेड लेखकों के नाम वापस लेने के बाद साहित्य से जुड़े समूह पेन अमेरिका ने अपने सालाना पुरस्कार समारोह को रद्द कर दिया है.
अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए प्रतिबद्ध इस समूह ने सोमवार को अगले सप्ताह होने वाले समारोह को रद्द किए जाने का एलान किया है.
पेन अमेरिका के लिए नामांकित 10 में से नौ लेखकों ने इस प्रतियोगिता से अपना नाम वापस ले लिया था. इन लेखकों का कहना है कि समूह फ़लस्तीनी लेखकों को कथित तौर पर उचित मदद नहीं दे पा रहा है.
ये मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में ग़ज़ा के समर्थन में आंदोलन तेज़ हो रहे हैं.
समूह की ओर से बताया गया है कि पुरस्कार के लिए नामांकित 61 लेखकों और अनुवादकों में से 28 ने अपनी किताबों के नाम वापस ले लिए हैं.
पेन ग्रुप की सीईओ सुज़ैन नोसेल ने कहा, "ये एक प्रिय कार्यक्रम है और इसमें बहुत ज़्यादा काम किया गया है. इसलिए हम सभी को इस नतीजे पर अफसोस है. लेकिन आख़िरकार यही फ़ैसला हुआ है कि जिस तरह से उम्मीद और योजना बनाई गई थी, उस तरह से उत्सव मनाना संभव नहीं हो पाया.
पेन अमेरिका के लिटररी प्रोग्रामिंग चीफ़ ऑफ़िसर क्लारिस रोसाज़ शारीफ़ ने कहा, "हम इस बात का बहुत सम्मान करते हैं कि लेखकों ने अपने मन की आवाज़ सुनी है कि उन्हें नॉमिनेशन में बने रहना है या नहीं."
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