PM Modi Oath: भाजपा नेता नरेंद्र मोदी आगामी 9 जून को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं. इस संबंध में आज एनडीए सांसदों की एक बैठक भी हुई, जिसमें सर्वसम्मति से पीएम मोदी को एनडीए का नेता चुन लिया गया. जिसके बाद यह संभावना जताई जा रही है कि 9 जून को शाम 6 बजे नरेन्द्र मोदी पीएम पद की शपथ ले सकते हैं. अब देखना यह है कि इस बार पीएम मोदी किस भाषा में शपथ लेते हैं, हालांकि पीएम मोदी पिछले दो बार के शपथ ग्रहण समारोह को देखें तो वर्ष 2014 व 2019 में पीएम मोदी ने अब तक हिन्दी भाषा में ही शपथ ली है.
संस्कृत भाषा में शपथ लेने का प्रस्ताव
वर्ष 2019 में जब पीएम नरेन्द्र मोदी दूसरी बार पीएम पद की शपथ लेने जा रहे थे. उस समय उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी से संस्कृत भाषा में शपथ लेने की मांग उठी थी. वहां की स्थानीय संस्था श्रीकाशी विद्वतपरिषद ने पीएम मोदी को पत्र भेजकर देव भाषा संस्कृत में शपथ लेने का आग्रह किया था. श्रीकाशी विद्वतपरिषद ने अपने खत में लिखा था कि वह काशी के प्रतिनिधि होने के नाते संस्कृत भाषा में शपथ लें. संस्था ने इस संबंध में एक शपथ पत्र वाराणसी के पीएमओ प्रभारी शिवशरण पाठक को मेल भी किया था. बता दें कि पीएम नरेन्द्र मोदी अपनी जनसभाओं में अक्सर स्थानीय भाषाओं में संवाद करते रहते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक होने के कारण उन्हें संस्कृत भाषा का भी अच्छा ज्ञान है. अब देखना यह है कि क्या पीएम मोदी तीसरी बार भी हिन्दी भाषा में ही शपथ लेते हैं या इस बार किसी अन्य भाषा का चुनाव करते हैं.
कितनी भाषाओं में ली जा सकती है शपथ
किसी भी संवैधानिक पद की शपथ संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किसी भी भाषा में शपथ ली जा सकती है. बता दें कि संविधान की 8वीं अनुसूची में कुल 22 भाषाएं शामिल हैं. इन भाषाओं में प्रमुख रूप से अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, उर्दू आदि भाषाएं शामिल हैं. ऐसे में कोई भी व्यक्ति इन 22 भाषाओं में से किसी भाषा में शपथ ले सकता है.
8वीं अनुसूची की 22 भाषाएं
असमिया, उड़िया, उर्दू, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, गुजराती, डोगरी, तमिल, तेलुगू, नेपाली, पंजाबी, बांग्ला, बोड़ो, मणिपुरी, मराठी, मलयालम, मैथिली,संथाली,संस्कृत,सिंधी, हिंदी.
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