पुष्पेंद्र सरोज इस लोकसभा चुनाव में देश के सबसे युवा सांसद बन गए हैं। उन्होंने यह रिकॉर्ड 25 साल, 3 महीने और 3 दिन की उम्र में बनाया। सबसे कम उम्र के सांसद ने संसद के इतिहास में चंद्रानी मुर्मू का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
यूपी की कौशांबी सीट से सपा के पुष्पेंद्र सरोज ने भाजपा प्रत्याशी विनोद कुमार सोनकर को 103944 वोटों से हराया। लंदन से पढ़कर लौटे पुष्पेंद्र ने पिता की सियासी जमीन पर अपना पहला चुनाव जीता।
युवा सांसद का विजन कैसा है? उन्होंने संसद भवन जाने से पहले क्या कुछ मुद्दे कलेक्ट किए हैं? चुनाव जीतने के लिए क्या रणनीति बनाई? यूथ पॉलिटिक्स पर क्या कुछ सोचते हैं? इन सवालों के साथ दैनिक भास्कर ने उनसे खास बातचीत की।
सवाल : आपने जीत के लिए क्या कुछ तैयारी की, कैसे कौशांबी जीते?
जवाब : जनता ने मन बना लिया था कि बदलाव करना है। भाजपा ने मंच से जो भाषण दिए, उसमें और जमीनी हकीकत में बहुत फर्क था। उनकी यही हवाबाजी नहीं चली। यूपी में लोगों ने मुद्दों को लेकर वोटिंग करने का मन बनाया था। यकीन के साथ कह सकता हूं कि पेपर लीक, बेरोजगारी और महंगाई समेत कई मुद्दों को लेकर जनता ने वोट किया। कौशांबी में यही मुद्दा हावी हुआ। मुझे जनता ने इसी के आधार पर जिताया। मेरे लोगों ने दिन-रात मेहनत की। हमने मान-सम्मान की लड़ाई लड़ी।
सवाल : कौशांबी आपके पिता जी की सीट है, किस कैडर ने आपकी जीत पक्की की?
जवाब : कौशांबी लोकसभा में हमारा कैडर बहुत मजबूत है। यहां कोई जाति और धर्म का समीकरण नहीं था। लोग हमारे साथ थे। मुद्दे की राजनीति की गई। चुनाव के पहले दिन से लेकर प्रचार के अंतिम दिन तक मैं मुद्दों के साथ जनता के बीच गया। मैंने मंच से भी यही बात कही। मुद्दों पर लड़ा और उसी से जीत दर्ज की।
सवाल : जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा भैया का इस चुनाव में क्या रोल रहा?
जवाब : उन्होंने समर्थकों से कहा कि आप अपने विवेक के आधार पर जिसे वोट देना चाहें, दे सकते हैं। हमारे लोकसभा में सीधी फाइट सपा और भाजपा में थी। हम जनता के बीच गए। उनको अपना विजन बताया। जनता ने एक नए चेहरे को चुनने का काम किया। हमको भरपूर आशीर्वाद दिया। यह पहली बार था कि सपा ने कौशांबी की सभी पांच विधानसभा में जीत दर्ज की।
सवाल: चुनाव जीतने के बाद आप राजा भैया के पास गए, क्या बात हुई?
जवाब : उन्होंने मुझे बधाई दी। मैंने उनका धन्यवाद किया। मुझे वहां कई लोग मिले, जिन्होंने मुझे समर्थन दिया था। सभी ने मुझे बधाई दी। वो चाहते थे कि 10 साल से जो भाजपा के सांसद रहे। वो इस बार न जीतें। इसके पीछे की वजह ये थी कि लोगों ने उनका चेहरा तक नहीं देखा था।
कुंडा और बाबागंज की जनता जानती थी कि पिछले सांसद ने कोई काम नहीं किया है। हमें यही समस्याएं सुनने को मिलीं। इसलिए जनता ने युवा चेहरा चुना। जो उनकी बातों को संसद में रख सके।
सवाल: किन मुद्दों को लेकर आप संसद में जाएंगे?
जवाब : देखिए, मुद्दे अभी भी वही हैं, क्योंकि सरकार अभी भी NDA की बनने जा रही है। सबसे बड़ा युवाओं का मुद्दा है। पेपरलीक और बेरोजगारी बहुत बड़ा मुद्दा है। महंगाई से लोग त्रस्त हैं। किसानों की समस्याएं हैं। खेतों को आवारा पशुओं से बचाने का इश्यू है। बहुत मुद्दे हैं। अब बदलाव हुआ है। इस बार संसद भवन में मुद्दों को रखने के लिए बड़ी संख्या में सपा के सांसद होंगे।
10 साल बाद मजबूत विपक्ष होगा। हमारी बैठक में यही निर्देश दिया गया है कि आप उत्तर प्रदेश के मान-सम्मान और गौरव की लड़ाई लड़ेंगे। सभी मुद्दों को संसद भवन में संवाद के माध्यम से रखेंगे।
सवाल : अयोध्या में भाजपा के हारने पर सोशल मीडिया पर रिएक्शन आए, क्या कहेंगे?
जवाब : सोशल मीडिया में क्या होता है। उस पर मैं ज्यादा फोकस नहीं करता। वहां ज्यादातर फेक अकाउंट होते हैं। ट्रोलर्स होते हैं। लेकिन, असल में जब वोटिंग होती है। तब रिजल्ट पता चलता है। हमारे नेताओं ने मुद्दों की राजनीति की है। राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर स्थानीय नेताओं ने जन-जन को सिर्फ मुद्दों के आधार पर प्रभावित किया। वही यूपी के रिजल्ट में दिखा।
सवाल : भाजपा अयोध्या में राम मंदिर बनवाने के बाद भी क्यों हार गई?
जवाब : अयोध्या में बहुत सारे घर तोड़े गए, लोगों के रोजगार को उजाड़ दिया गया। उनका रहन-सहन प्रभावित हुआ। युवाओं ने बढ़-चढ़कर हमारा सहयोग किया, क्योंकि उनकी समस्याएं हावी रहीं। बेरोजगारी-महंगाई जैसे इश्यू थे। युवा सपोर्ट हमें मिला।
सवाल : बसपा ने अपने यूथ चेहरे आकाश आनंद पर क्यों रोक लगा दी?
जवाब : मैं बसपा की नीति और आकाश आनंद की प्रतिक्रिया पर कमेंट नहीं कर सकता। अपनी लोकसभा सीट और पार्टी के बारे में बता सकता हूं। सपा को देखिए। हमारी नीति में यूथ को प्रमोट किया गया। अखिलेश जी ने नए चेहरों पर भरोसा किया। अब यही यंग चेहरे, युवाओं की बात सदन में उठाएंगे। हमारी पार्टी की नीति युवा विजन को आगे बढ़ाने की है।
सवाल : भाजपा के 400 पार और संविधान बदलने वाली बात का ग्राउंड पर क्या असर दिखा?
जवाब : भाजपा ने जब 400 पार का नारा दिया, तब उनके नेता सामने आए। भाजपा के कुछ नेताओं ने खुले मंच से चैलेंज दिया कि वो संविधान में संशोधन करेंगे। कुछ ने कहा कि वो संविधान बदल देंगे। कोई बोला कि इसके बाद चुनाव होंगे ही नहीं। मोदी जी ही रहेंगे। इसका खासकर पिछड़े वर्ग में संदेश गया कि बाबा साहब भीम राव आंबेडकर ने जो संविधान बनाया। मान-सम्मान की लड़ाई लड़ी। वोट देने का अधिकार दिया। उसे लेकर भाजपा के लोग ऐसा कह रहे हैं। खुले मंच से ऐसा कहा गया, तो यही बात लोगों के मन को लग गई। फिर संविधान बचाने की बात हुई और सभी ने अपना वोट किया।
सवाल : यूथ पॉलिटिक्स के बारे में आप क्या कहना चाहते हैं?
जवाब : यूथ पॉलिटिक्स एज से डिफाइन होती है, लेकिन बहुत से एक्सपीरियंस नेता भी हैं। वो अपने लोगों के लिए बहुत अच्छी बात करते हैं और लड़ते हैं। पॉलिटिक्स की परिभाषा एक ही है कि अपने लोगों के साथ रहें और उनके लिए जो काम कर सकते हैं, वो करें। सभी का काम करने का अलग तरीका होता है। कुछ नेता नौजवानों की बात अच्छे से उठाते हैं। कुछ किसानों के मुद्दों को अच्छे से उठाते हैं। अगर महिला नेता है, तो वो महिलाओं की बात अच्छे से उठाती हैं। हम मिलकर उत्तर प्रदेश की आवाज उठाएंगे।
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