लोकसभा चुनाव में वोटिंग के बाद अब नजर नतीजों पर है। एग्जिट पोल BJP गठबंधन को 350 से ज्यादा सीटें दे रहे हैं। एक एग्जिट पोल सट्टा बाजार का भी है। सट्टा बाजार के मुताबिक, BJP को 303 सीटें मिल रही हैं। कांग्रेस को 64 सीटें मिलने का अनुमान है। मुंबई के स
30 साल से अंडरवर्ल्ड से जुड़ी खबरें कवर कर रहे सीनियर जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल बताते हैं, ‘देश के कई शहरों में अवैध तरीके से सट्टा बाजार चलता है। इनमें सबसे बड़ा बाजार मुंबई का है। देश में 10 और सट्टा बाजार हैं।’
विवेक कहते हैं, ‘2019 के लोकसभा चुनाव में BJP को 303 सीटें मिली थीं। कांग्रेस सिर्फ 52 सीटें जीत पाई थी। मुंबई सट्टा बाजार ने BJP को 300-310 सीटें और कांग्रेस को 50-60 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था। काफी हद तक ये नतीजों के करीब थे। हालांकि, अलायंस को लेकर अनुमान सटीक नहीं बैठे थे।’
फर्स्ट फेज के बाद कांग्रेस-BJP के लिए 1-1 का भाव था
विवेक बताते हैं, ‘लोकसभा चुनाव की तैयारी में सट्टेबाज तीन महीने पहले से ही जुट गए थे। चुनाव शुरू होने से करीब एक महीने पहले सट्टेबाजों ने BJP को 316 सीटें जीतने के लिए एक रुपए का भाव (ईवन मनी) लगाया था। कांग्रेस के लिए 55 सीटें जीतने का अनुमान लगाया था। उसके लिए भी एक रुपए का भाव तय किया था।
दूसरे फेज के बाद BJP को नुकसान का अनुमान
विवेक बताते हैं, ‘लोकसभा चुनाव के दो फेज की वोटिंग के बाद सट्टेबाजों के भाव ऊपर-नीचे होने लगे थे। यानी BJP की जीत की संभावना कम होने लगी। इसी तरह चौथे फेज की वोटिंग के बाद BJP के लिए सट्टा बाजार में फिर उछाल दिखा। अब BJP के खाते में 303 और कांग्रेस को 64 सीटें मिलने का अनुमान है।
BJP-कांग्रेस का मौजूदा भाव
मुंबई सट्टा बाजार के मुताबिक, BJP के लिए 250 सीट जीतने पर 12 पैसे, 275 सीट जीतने पर 27 पैसे, 301 सीट पर एक रुपए, 310 सीट पर 1.65 रुपए और 325 सीट पर 3.50 रुपए का भाव है।
कांग्रेस के 50 सीट जीतने पर 33 पैसे, 60 सीटों पर एक रुपए, 61 सीट पर 1.15 रुपए और 62 सीट पर 1.40 रुपए का भाव चल रहा है। सटोरियों के लिए BJP फेवरेट पार्टी है। मुंबई के बुकीज को भरोसा है कि कांग्रेस 60-62 सीट से ज्यादा नहीं जीत पाएगी।
16 राज्यों में BJP के लिए भाव
मुंबई का सट्टा बाजार इस बार भी BJP को सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर देख रहा है। पहली बार उसने BJP के लिए राज्यवार सीट हासिल करने पर भी सट्टा खोला है। इसके अलावा मुंबई सट्टा बाजार ने VIP सीट, पार्टी वाइज और राज्य के हिसाब से भी सीटों का अनुमान लगाया है।
विवेक के मुताबिक,अलग-अलग सट्टा बाजारों ने अपने अनुमान जारी किए हैं। इनमें BJP, NDA, कांग्रेस और INDIA ब्लॉक की संभावित सीटों की संख्या दी गई है। इसके अलावा मुंबई में फेंसी बाजार के भाव भी खोले जाते है। इसमें किस सीट पर कौन जीतेगा, ये अनुमान भी रहता है।
पिछले दो लोकसभा चुनाव में मुंबई सट्टा बाजार का अनुमान
2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मुंबई सट्टा बाजार का अनुमान था कि NDA को बहुमत मिलेगा। ये अनुमान सही साबित हुआ। हालांकि, कांग्रेस के बारे में बाजार सही अनुमान नहीं लगा पाया।
2019 के चुनाव में मुंबई के सट्टेबाज NDA के साथ थे। उनका मानना था कि NDA आसानी से 300 से ज्यादा सीटें जीत लेगा। 543 सदस्यों वाली लोकसभा में जीत के लिए 272 सीटों की जरूरत है।
सट्टेबाज बाकी पार्टियों की जीत और BJP को बहुमत न मिलने पर भी पैसा लगा रहे थे। इसके अलावा राजस्थान और गुजरात के सट्टा बाजार में भी BJP के पक्ष में लहर थी। राजस्थान में BJP को 22-24 सीटें दी गई थीं, जबकि गुजरात में ये संख्या 22-24 थी।
विवेक कहते हैं, ‘मुंबई सट्टा बाजार का 2014 के लिए लोकसभा चुनाव में अनुमान सही था। खासकर BJP की जीत को लेकर तो अनुमान बिल्कुल सटीक था। हालांकि, 2019 के चुनावों में नतीजे, अनुमान के उलट आए। इसमें BJP और NDA की सीटों की असल संख्या सट्टा बाजार के अनुमान से ज्यादा थी।
इससे साफ है कि सट्टा बाजार के अनुमान और असल नतीजों में अंतर हो सकता है। सट्टा बाजार के चुनावी अनुमान की सटीकता और विश्वसनीयता हमेशा एक जैसी नहीं रही। कभी-कभी इनके अनुमान, असल नतीजों से मेल खाते हैं। कई बार भविष्यवाणी गलत भी हो जाती हैं।
सट्टा बाजार काम कैसे करते हैं
विवेक बताते हैं, ‘सिर्फ मुंबई के सट्टा बाजार से 4 हजार से ज्यादा सट्टेबाज जुड़े हुए हैं। ये बहुत ही सिस्टेमैटिक तरीके से कम करते हैं। इसमें से 40 के करीब बड़े सट्टेबाज हैं, जो एक हजार करोड़ से ऊपर का खेल चलाते हैं। ये सट्टेबाजी के पूरे कारोबार को कंट्रोल करते हैं। इनके लोग पूरे देश में फैले हैं।’
विवेक आगे बताते हैं, ‘सट्टेबाज हर पार्टी या गठबंधन की लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सीट का अनुमान लगाते हैं। ये अनुमान राज्य और शहर के हिसाब से अलग-अलग भी हो सकते हैं। इसकी जानकारी टीम के एक या दो लोगों तक पहुंचाई जाती है। इसके बाद एक टीम इन नतीजों का एनालिसिस करती है। फिर इसे चुनाव की तारीख से एक महीने पहले ओपन करते हैं।’
‘चुनाव के एक महीने बाद तक ये खेल चलता रहता है। इसमें कौन PM, कौन CM और कौन मंत्री बनेगा, इसे लेकर भी सट्टा लगता है। जिस दिन फाइनल रिजल्ट रहता है, उस दिन अनुमान बदले नहीं जाते है और फिर रुपए का लेन-देन होता है।’
विवेक आगे बताते हैं कि सट्टा बाजार का अनुमान अलग-अलग फैक्टर्स पर आधारित होता है। जैसे- ओपिनियन पोल, पिछले चुनावों के रुझान और वोटिंग के वक्त का माहौल।
1. ओपिनियन पोल का एनालिसिस: सट्टा बाजार ओपिनियन पोल और चुनावी आंकड़ों का एनालिसिस करता है।
2. जानकारियों का इस्तेमाल: लोकल स्तर पर पॉलिटिकल एक्टिविटीज और उम्मीदवारों की पॉपुलैरिटी देखी जाती है।
3. बाजार का सेंटीमेंट: सट्टा बाजार में पैसों का फ्लो भी एक इंडीकेटर होता है, जो चुनावी रुझानों को प्रभावित करता है।
लोकसभा चुनाव में 6-7 लाख करोड़ का सट्टा लगने की उम्मीद
अनुमान है कि इस लोकसभा चुनाव में 6 से 7 लाख करोड़ रुपए का कारोबार हो सकता है। ये अब तक का रिकॉर्ड है। इसके पहले के चुनावों में ज्यादातर डेढ़ या दो लाख करोड़ रुपए तक का सट्टा लगा था। सोर्सेज के मुताबिक, चुनावी सट्टे में राजनीति से जुड़े लोग भी बड़े पैमाने पर पैसा लगाते हैं।
अब ऑनलाइन हुई सट्टेबाजी
विवेक बताते हैं, ‘अब फोन पर सट्टेबाजी नहीं होती। ये पूरी तरह ऑनलाइन हो गई है। सभी बुकी ऑनलाइन सट्टेबाजी पोर्टल और ऐप्स के सर्वर विदेशों में रखते हैं, ताकि पकड़े जाने के बावजूद उनका काम चलता रहे। ऑनलाइन सट्टेबाजी में पंटर को जितनी लिमिट मिलती है, उसके ऊपर उसे सौदे करने की इजाजत नहीं होती है।
सट्टेबाज बोला- सेंटिमेंट बदलने के लिए पार्टियां अपने हिसाब से रेट खुलवाती हैं
चुनाव पर सट्टेबाजी का खेल किस तरह चल रहा है, इसे लेकर दैनिक भास्कर ने एक सट्टेबाज से बात की। पहचान सामने न लाने की शर्त पर सट्टेबाज ने बताया कि किसी भी सट्टेबाजी में पैसा YES या NO दोनों पर लगता है।
हर राज्य के अनुमान अलग-अलग होते हैं। आप दो-चार पेटी (2-4 लाख) या दो-चार खोखा (2-4 करोड़) लगा सकते हैं। इसमें आप 50 खोखा (50 करोड़) भी लगा सकते हैं। पैसे को घर तक पहुंचाने की गारंटी हमारी रहती है।
शुरू में पार्टियां भी अपने हिसाब से रेट खुलवाती हैं, ताकि पब्लिक का सेंटिमेंट उनकी ओर जा सके। हालांकि, वोटिंग प्रोसेस खत्म होने के बाद रेट फेयर रहता है।
दिल्ली में कांग्रेस, बंगाल में INDIA ब्लॉक आगे
सट्टेबाज ने कुछ राज्यों के नतीजे हमसे साझा किए। उसने बताया कि दिल्ली की 7 सीटों में BJP को 3 और कांग्रेस को 4 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, पश्चिम बंगाल की कुल 42 सीटों में से BJP को 12 और INDIA ब्लॉक को 30 सीटें, 7 सीटों वाले मुंबई रीजन में NDA को 4 और INDIA ब्लॉक को 3 सीटें मिल सकती हैं।
आंध्र प्रदेश में BJP गठबंधन को 3, INDIA ब्लॉक को 10 और अन्य को 12 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, केरल में BJP का खाता नहीं खुलने वाला है। यहां 20 की 20 सीटें INDIA ब्लॉक के पास जाती दिख रही हैं। छत्तीसगढ़ में NDA को 4 और INDIA ब्लॉक को 7, जम्मू कश्मीर में BJP को 1 और INDIA ब्लॉक को 5 सीटें मिलती नजर आ रही हैं।
40-40 बुकीज ने हर शहर में किया चुनावी सर्वे
बुकी ने बताया कि रेट खोलने से पहले हमारी टीम हर लोकसभा सीट पर एक सर्वे करती है। सर्वे के बाद उसके नतीजे सट्टा चलाने वाली एजेंसियों को भेजे जाते हैं। इसी आधार पर वे अपना रेट ओपन करते हैं। सर्वे के आधार पर ही तय होता है कि वे 1 का 10 (एक रुपए लगाने पर 10 रुपए) या 1 का 15 भाव दे रहे हैं।
12 दिन पहले ही इन्वेस्ट हुए 15 हजार करोड़ रुपए
बुकी ने हमें बताया कि हर शहर में 40-40 लोग चुनाव से पहले का अनुमान लगाने के लिए काम कर रहे हैं। ये न सिर्फ सीटों का रुझान बताते हैं, बल्कि वहां से पैसे उठाकर केरल, मुंबई और दिल्ली के सट्टा बाजार में लगाते हैं। इन चुनावों में कुल कितना पैसा लगा है, इसकी कोई गिनती नहीं है। हालांकि, 12 दिन पहले तक 15 हजार करोड़ रुपए लग चुके थे।
ऑनलाइन बेटिंग में सरकार को जाता है 30% कमीशन
अगर जीत गए तो पैसा घर तक कैसे पहुंचेगा? बुकी ने जवाब दिया कि अब पैसा ऑनलाइन सीधे खाते में पहुंचता है। पहले हवाला का इस्तेमाल किया जाता था। सरकार इन्हें ट्रेस नहीं कर पाती है। अब तो सरकार भी इसमें शामिल है। ऑनलाइन बेटिंग साइट्स के जरिए सरकार 30% कमीशन लेती है।
IPL में सट्टेबाजी का जिक्र करते हुए बुकी ने बताया, ‘हमें TV पर टेलीकास्ट होने से एक बॉल पहले ही पता चल जाता है कि मैच में क्या हुआ है। उसी के हिसाब से ऑनलाइन बेटिंग के लिए रेट खोला जाता है। हमें सिर्फ कमीशन से मतलब होता है। कोई जीते या हारे, दोनों ओर से फायदा हमारा होता है। हमें 20% का कमीशन मिलता ही है।’
क्या देश में फिर से मोदी सरकार आ रही है या इस बार INDIA ब्लॉक की सरकार बनेगी? बुकी ने जवाब दिया, मुझे पता है, लेकिन बता नहीं सकता। रिजल्ट लीक होने पर हमें बड़ा नुकसान हो सकता है।
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