2025 का बिहार विधानसभा चुनाव ‘खटाखट’ नौकरी की गारंटी पर लड़ा जाएगा। लोकसभा चुनाव खत्म होते ही इसके संकेत मिल रहे हैं। बिहार की एनडीए सरकार नौकरी के एजेंडे पर आगे बढ़ चुकी है।
पूरे लोकसभा चुनाव प्रचार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सिर्फ यही कहा है कि मैंने दबाव बनाकर नीतीश सरकार से डेढ़ साल में 5 लाख नौकरियां दिलाई हैं।
अब 83 दिनों की आदर्श आचार संहिता की पाबंदी हटाए जाने के तुरंत बाद ही बिहार में नौकरी का पिटारा खोल दिया गया है। एनडीए सरकार ने खाली पदों को भरे जाने का फैसला लेना शुरू कर दिया है।
लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने नौकरी और रोजगार के नाम पर एनडीए को नुकसान पहुंचाया है। इसलिए बिहार की एनडीए सरकार को आखिर नौकरी की गारंटी देनी पड़ रही है। बीजेपी के लोकसभा में सीट गंवाने और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की घेराबंदी से निकलने का यही तरीका है।
पहले जानिए, 2 दिनों में निकली नौकरियों में पदों की संख्या और विभाग…
बिहार सरकार ने दो दिनों में 59042 पदों का विज्ञापन जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग में 43432 पदों पर नौकरी दी जा रही है तो पंचायती राज विभाग में 15 हजार 610 पदों पर विज्ञापन सामने आए हैं।
पंचायती राज विभाग के 15 हजार 610 नौकरियों में कुल स्थायी पदों की संख्या 4351 होगी। जबकि, अस्थायी पदों की कुल संख्या 11,259 है। स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर 5740 पद पर नियुक्तियां की जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग में 43,432 पोस्ट पर वैकेंसी
स्वास्थ्य विभाग ने आदर्श आचार संहिता हटाए जाने के घंटे भर के भीतर नौकरियां की घोषणा की। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर, नर्स, एएनएम, फार्मासिस्ट जैसे पदों पर नियुक्ति होने जा रही है।
बीजेपी कोटे वाले विभागों में नौकरी देने की जल्दबाजी समझिए…
आदर्श आचार संहिता हटाए जाने के बाद स्वास्थ्य और पंचायती राज विभाग में नौकरियों को लेकर जल्दबाजी दिखाई गई है। यह दोनों विभाग बीजेपी कोटे के मंत्रियों के हैं। दोनों विभागों में कॉन्ट्रैक्ट वाले और परमानेंट नौकरियां दी जा रही हैं। इसके पीछे की वजह साफ है- बीजेपी लोकसभा चुनाव में नौकरी और रोजगार के नाम पर घिर गई थी। रोजगार और नौकरी के नाम पर बीजेपी की सीटें गिरी। पार्टी को बिहार में बड़ा नुकसान हुआ। अब लोकसभा में बीजेपी अपने सहयोगियों के सहारे है।
राजनीतिक पंडितों के नजरिए से जानिए वजह
राजनीतिक जानकार संतोष कुमार बताते हैं कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नौकरी के एजेंडे पर विधानसभा-2025 का चुनाव होगा। वो इसकी वजह भी बताते हैं, कहते हैं –
वहीं, बिहार की राजनीतिक घटनाओं पर गहरी नजर रखने वाले पत्रकार रंजन कहते हैं कि रोजगार देने की शुरुआत लोकसभा चुनाव 2019 में हुई। बीजेपी हर साल दो करोड़ रोजगार देने के वादे के साथ चुनाव जीती, जिसमें वे फेल हुए। नौकरी की असल हवा राजद नेता तेजस्वी यादव ने बिहार विधान सभा चुनाव 2020 में बहाई। दस लाख नौकरी पहली कलम से देने का ऐलान किया था। हालांकि, वह उस वक्त सरकार में नहीं आए। लेकिन, राजनीतिक घटनाक्रम की वजह से 2022 में सीएम नीतीश और तेजस्वी यादव एकसाथ आ गए। 17 महीने सरकार चली। इस दौरान पौने दो लाख शिक्षक बहाल हुए। जिसका क्रेडिट तेजस्वी यादव लेते दिखे। नौकरी देने का फायदा तेजस्वी यादव को हुआ भी। बीजेपी नौकरी के नाम पर घिर गई।
तेजस्वी ने हर चुनावी सभा में नौकरियों की बात की
राष्ट्रीय जनता दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने लोकसभा चुनाव में नौकरी के मुद्दे को हाथ से फिसलने नहीं दिया। पीएम नरेंद्र मोदी हों या बिहार के सीएम नीतीश कुमार, दोनों को नौकरी की गारंटी पर घेरे रखा। बिहार में महागठबंधन की सरकार में शिक्षक नियुक्ति का पूरा क्रेडिट खुद ले उड़े। चुनावी सभाओं में कहते रहे कि इधर-उधर की बातें नहीं करें। नौकरियां और रोजगार कितने दिए?
‘खटाखट’ नौकरी पर बीजेपी मंत्री को सुनिए…
भारतीय जनता पार्टी के कोटे से पंचायती राज मंत्री बने केदार प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा पर हम सब काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार और देश के युवाओं को 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया है। यह नौकरियां इसी की कड़ी हैं। विभाग में नौकरियां दी जा रही हैं।
2025 में कब तक होगा विधानसभा चुनाव
बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल नवंबर 2025 में पूरा हो रहा है। ऐसे में यदि सबकुछ सामान्य रहा तो सितंबर 2025 के दूसरे या फिर तीसरे सप्ताह में नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है।
निर्वाचन आयोग के सूत्रों की मानें तो 2025 में विधानसभा चुनाव का कैलेंडर 2020 विधानसभा चुनाव जैसा ही होगा। नवंबर महीने के तीसरे सप्ताह में चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। आयोग उसी तारीख के लिहाज से तैयारी करेगा।
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