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Lok sabha Election 2024 इस चुनाव में एक बार फिर रीजनल पार्टियों ने अपना दमखम दिखाया है। यही कारण है कि अब सरकार बनाने में क्षेत्रीय दलों की भूमिका अहम हो गई है। जेडीयू टीडीपी रालोद लोजपा (रामविलास) जैसी क्षेत्रीय पार्टियां किंगमेकर की भूमिका में आ गई हैं। वहीं रसातल में जा रही कांग्रेस को नया जीवनदान मिला है। पढ़िए क्या रहे समीकरण?
Lok sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं। बीजेपी इस बार स्पष्ट बहुमत नहीं ला सकी है। इस कारण एक बार फिर गठबंधन वाली सरकार देश पर सत्तासीन होगी। इस चुनाव में एक बार फिर रीजनल पार्टियों ने अपना दमखम दिखाया है। यही कारण है कि अब सरकार बनाने में क्षेत्रीय दलों की भूमिका अहम हो गई है। जेडीयू, टीडीपी, रालोद, लोजपा (रामविलास) जैसी क्षेत्रीय पार्टियां ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गई हैं। वहीं रसातल में जा रही कांग्रेस को नया ‘जीवनदान’ मिला है। उधर, भाजपा के ताकतवर मुद्दे भी असरदार नहीं हो पाए। पढ़िए क्या रहे समीकरण?
रीजनल पार्टियों की भूमिका बढ़ी
चुनाव परिणामों से क्षेत्रीय दलों के देश की राजनीति में फिर प्रभावी होने के संकेत मिल रहे हैं। इन चुनावों में कम से कम पांच राज्यों में क्षेत्रीय दल मजबूत हुए हैं। हिंदी पट्टी के राज्यों में भी भाजपा को धक्का लगा है। इन राज्यों की 225 सीटों में से भाजपा को 2019 में 176 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार उसे सिर्फ 127 सीटें मिलती दिख रही हैं।
कभी बीजेपी कहा ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की दुहाई दिया करती थी। लेकिन भाजपा का कांग्रेस मुक्त भारत का लक्ष्य अब दूर की कौड़ी लगता है क्योंकि पिछली बार की 54 सीटों के मुकाबले पार्टी को इस बार 100 के आसपास सीटें मिलती दिख रही हैं। साथ ही ऐसा लगता है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा एवं भारत जोड़ो न्याय यात्रा का कांग्रेस के चुनावी परिणाम पर सकारात्मक असर पड़ा है।
बीजेपी का वोट प्रतिशत हुआ प्रभावित
बीजेपी इस बार अकेले दम पर बहुमत साबित नहीं कर पाई है। फिर भी भाजपा भले ही 2019 में मिलीं 303 सीटों के मुकाबले 240 सीटों के आसपास सिमट गई हो, लेकिन उसे मिले मत प्रतिशत में मामूली गिरावट ही आई है। 2019 में पार्टी को 37.36 प्रतिशत मत मिले थे, जबकि इस बार उसे 36.98 प्रतिशत के आसपास मत मिलते दिख रहे हैं।
मुस्लिमों बहुल सीटों पर बीजेपी को हुआ घाटा
लोकसभा चुनाव 2024 जो परिणाम आए, उन नतीजों से स्पष्ट है कि कई मुस्लिम बहुल सीटें भाजपा के हाथ से निकल गई हैं। 2019 के चुनावों में पार्टी ने मुस्लिम बहुल 103 सीटों में से 45 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार पार्टी सिर्फ 35 सीटें जीतती दिख रही है। हालांकि ये सीटें कांग्रेस के खाते में भी नहीं गई हैं, क्योंकि पिछली बार पार्टी को ऐसी 11 सीटें मिली थीं।
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बीजेपी के लिए राम मंदिर का मुद्दा भी नहीं रहा अहम फैक्टर
अयोध्या इस बार पूरी दुनिया की नजर में रही। यहां रामलला का भव्य मंदिर बनने के बाद रामलला विराजित हुए। लेकिन राम मंदिर का मुद्दा भी बीजेपी के लिहाज से कोई खास नहीं रहा। अयोध्या में बीजेपी की हार हुई। चुनाव परिणाम यह भी बताते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का भाजपा को कोई लाभ नहीं मिला है। जबकि बसपा ने पिछले चुनाव में बनाई जमीन गवां दी है। 2019 के चुनाव में बसपा को 10 सीटें मिली थीं।
सीधे मुकाबले वाली सीटों पर कांग्रेस के स्ट्राइक रेट में 20% की वृद्धि
2024 लोकसभा चुनाव भाजपा से सीधे मुकाबले वाली सीटों पर कांग्रेस का प्रदर्शन सुधरा है। 2014 और 2019 के चुनावों में जीत का यह प्रतिशत क्रमशः 9.7 और 8.3 था जो अब 20 फीसद बढ़कर 29 फीसदी जा पहुंचा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर भाजपा कांग्रेस के बीच सौ सीटों पर सीधा मुकाबला हुआ है तो 2024 में इनमें से 29 सीट कांग्रेस की झोली में आई है।
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