बिहार की 40 सीटों पर 7 चरणों में वोटिंग: पटना की दोनों सीटों पर 1 जून, मुजफ्फरपुर में 20 मई और भागलपुर में … – Dainik Bhaskar

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बिहार में लोकसभा की 40 लोकसभा सीटों पर सात चरणों में चुनाव होगा। पिछली बार सात चरणों में ही वोटिंग हुई थी। इस बार सिर्फ तारीखें बदली हैं, हर फेज की सीटें वही हैं। चार जून को रिजल्ट आएगा।
पहले फेज में 19 अप्रैल को औरंगाबाद, गया, नवादा और जमुई में वोटिंग होगी। दूसरे फेज में किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर और बांका में 26 अप्रैल को मतदान होगा। सबसे आखिरी फेज 1 जून को नालंदा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम, काराकाट, जहानाबाद में वोट डाले जाएंगे।
ग्राफिक्स से जानिए किस सीट पर कब वोटिंग होगी…
छठवे-सातवें फेज में 8-8 सीटों पर वोटिंग
छठवें और सातवें फेज में 8-8 सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें फेज में 5-5 सीटों पर वोट होंगे। सबसे कम 4 सीटों पर पहले फेज पर वोटिंग होगी।
इस विधानसभा सीट पर भी उप चुनाव
भोजपुर की अगिआंव विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा। वोटिंग सातवें फेज में होगी। यह सीट माले विधायक मनोज मंजिल को हत्या मामले में सजा होने की वजह से खाली हुई है।
15 सालों में 2.2 करोड़ वोटर्स
साल 2009 में बिहार में वोटर्स की कुल संख्या करीब 5.45 करोड़ (5,45,05,246) थी। अब 2024 में यह बढ़कर करीब 7.64 करोड़ (7,64,33,329) हो गई है। इस तरह बीते 15 सालों में करीब 2.2 करोड़ (2,19,28,083) वोटर्स की संख्या बढ़ी है। 2019 में हुए पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले यह संख्या करीब 52 लाख (52,17,039) बढ़ी है। वहीं 2014 के लोकसभा चुनावों के मुकाबले यह संख्या करीब 1.26 करोड़ (1,26,33,169) बढ़ी है।
पिछले तीन लोकसभा चुनाव में बिहार में कितने फेज में कब-कहां वोटिंग हुई, इसे जानिए..
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चुनाव आयोग की घोषणा के साथ ही बिहार में 2024 के रण का आगाज हो गया है। यहां मुकाबला एक बार फिर से दो महागठबंधन के बीच होना है। एक तरफ जहां पिछले तीन चुनाव से लगातार जीत के नए रिकॉर्ड बनाने वाली एनडीए है तो दूसरी तरफ लगातार तीन चुनाव में सिमटता महागठबंधन।
एनडीए मोदी सरकार के दो कार्यकाल में तो बिहार में अपना परचम लहराया ही है, मनमोहन सिंह सरकार के आखिरी कार्यकाल 2009 में भी गठबंधन 32 सीटें जीतने में सफल रहा था।
इस बार चुनाव शुरू होने से पहले ही जहां जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन का साथ छोड़ एनडीए के कुनबे में शामिल हो गए हैं तो वहीं महागठबंधन का आकार सिमट कर केवल कांग्रेस और राजद के साथ लेफ्ट की तीन पार्टियों तक सीमित हो गया है। दैनिक भास्कर के इस स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए मनमोहन सिंह सरकार के आखिरी कार्यकाल से मोदी सरकार के दो कार्यकाल में कैसे सियासी समीकरण बदलते चला गया। पूरी रिपोर्ट पढ़िए
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