खाड़ी देशों में बमबारी, तेल के लिए हो सकती है मारामारी; पर भारत ने कर ली रूस वाली तैयारी

Spread the love

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के साथ आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। सोमवार को वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमत 504 रुपए उछलकर 6,596 रुपए प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। वहीं, फारस की खाड़ी के संकरे प्रवेश मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे जहाजों पर हमले से आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है।

भारत के कच्चे तेल आयात का करीब 50 फीसदी और एपीजी का हिस्सा हर दिन होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। इसमें ज्यादातर इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत का कच्चा तेल होता है। क्षेत्र में तनाव ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। जानकार मानते हैं कि भारत रूस और दूसरे देशों से आयात बढ़ाकर कच्चे तेल की आपूर्ति को बरकरार रख सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव ज्यादा दिन बरकरार रहता है, तो इसका असर हमारी गैस आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार दूसरी संभावनाएं भी तलाश रही है।

बढ़ सकती है रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति

पेट्रोलियम मंत्रालय का केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया है। मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इसके साथ सरकार वैकल्पिक संभावनाओं को भी खंगाल रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए सुरक्षित मार्ग को तरजीह दे सकती है। ऐसे में रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है।

अमेरिका से समझौते के बाद रूस से तेल आयात में मई 2022 के बाद भारत के तेल आयात में रूस का हिस्सा 20 फीसदी से कम हो गया है। इसके साथ भारत के पास करीब 74 दिन का कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है। ऐसे में सरकार के लिए शुरुआती तौर पर तो कोई चिंता नहीं है, पर तनाव लंबा होता है, तो रणनीतिक भंडार पर दबाव आ सकता है। इसलिए, सरकार एहतियाती तौर पर कुछ कदम उठा सकती है। ताकि, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति को बरकरार रखा जाए।

दरअसल, जनवरी 2026 से भारत से खाड़ी देशों और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया था। इसका सीधा असर रूस से कच्चे तेल के आयात पर पड़ा। रूस से आयात कम हो गया। इसी तरह खाड़ी देशों से एलपीजी आयात भी बढ़ गया। फरवरी 2026 में 2.03 मिलियन टन एलपीजी आयात की, इसमें से 1.66 मिलियन टन गैस खाड़ी देशों से ली गई थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि गैस आपूर्ति को बरकरार रखने के लिए भी सुरक्षित मार्ग से गैस आपूर्ति की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ कीमत भी बड़ा मुद्दा है। ईरान ने कुवैत और सऊदी अरब की कई बड़ी कंपनियों पर हमला किया है। ऐसी खबर है कि सऊदी की अरामको पर हमला किया है। इससे रिफाइनरी का कामकाज प्रभावित हो सकता है।

वहीं, ईरान प्रतिदिन लगभग 16 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा चीन को जाता है। ईरान का यह निर्यात बाधित होता है तो चीन को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।

करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीदता है भारत

भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कीमतों में उछाल से जहां आयात बिल बढ़ेगा, वहीं ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा। इस बीच, आठ पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह ओपेक प्लस ने अप्रैल में अपना उत्पादन 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत इस वक्त करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीदता है। वर्ष 2022 से पहले भारत सिर्फ 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था।

Previous post अमेरिका-ईरान वॉर के बीच सोने-चांदी ने मचाया तांडव, कीमतों ने उड़ाए होश!
Next post Chandra grahan kab lagega: आज चंद्रग्रहण दोपहर में होगा शुरू, चंद्रग्रहण के दौरान क्या करें और क्या नहीं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *