राजस्थान में दूसरे चरण की 13 सीटों पर मतदान पूरा हो गया है। दूसरे चरण की 13 सीटों पर 64.56 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो पहले चरण की तुलना में 6.69 फीसदी अधिक है। 13 लोकसभा सीटों पर आने वाली 104 विधानसभा सीटों में से भाजपा के कब्जे वाली 35 सीटों पर मतदान पिछले लोकसभा चुनाव से 5 प्रतिशत से ज्यादा घटा है। इनमें करीब 3 से 4 सीटों पर वोटिंग 10 प्रतिशत से ज्यादा घटी है।
वहीं, कांग्रेस के कब्जे वाली 8 सीटों पर मतदान पांच प्रतिशत से ज्यादा घटा है। इसके अलावा भारतीय आदिवासी पार्टी की एक सीट पर भी वोटिंग कम हुई है।
पहले चरण में कम वोटिंग के बाद राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग ने वोटिंग बढ़ाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया, उसमें वे काफी हद तक कामयाब भी हुए हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, दूसरे चरण में अच्छी वोटिंग ने खास तौर पर भाजपा को काफी राहत दी है।
वहीं, कांग्रेस खेमे में कुछ तनाव है। माना जा रहा है कि भाजपा का प्रदर्शन पहले चरण के मुकाबले दूसरे चरण वाली सीटों पर ज्यादा बेहतर हो सकता है। पहले चरण की कम वोटिंग से आलाकमान ने प्रदेश संगठन को दूसरे चरण की वोटिंग बढ़ाने को कहा था। हालांकि इस वोटिंग के संकेतों को दोनों ही पार्टियां डीकोड करने में जुट गई हैं।
खास बात यह रही कि यदि दूसरे चरण की 13 सीटों की ही आपस में तुलना करें तो वहां वोटिंग प्रतिशत अधिक रहा, जहां कांटे या मजबूत त्रिकोणीय मुकाबला था। इसी नजरिए से देखें तो जिन सीटों पर जातिगत समीकरण हावी रहे, वहां भी वोटिंग प्रतिशत अच्छा रहा।
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पढ़िए, हर सीट पर पिछले लोकसभा चुनावों के मुकाबले कितना कम-ज्यादा रहा वोटिंग प्रतिशत…
क्या है इस वोटिंग पैटर्न के कारण?
भास्कर एक्सपर्ट महेश शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार) ने बताया कि इन 13 सीटों की बात करें तो पिछले चुनाव के मुकाबले जिन सीटों पर वोटिंग ट्रेंड बढ़ा है, उन पर स्थानीय समीकरण का आधार देखने को मिला है। जैसे कांटे का मुकाबला, जातिगत समीकरण या त्रिकोणीय मुकाबला आदि।
नारायण बारेठ (वरिष्ठ पत्रकार) ने बताया कि आमतौर पर देखा जाए, तो पिछले दो लोकसभा चुनावों में राजस्थान की सभी सीटों पर वोटिंग पर्सेंटेज ने अच्छा खासा उछाल लिया था। लेकिन इस बार चुनावी मुद्दे, लहर या नाराजगी जैसे कारण नजर नहीं आए, जो वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।
अब हर लोकसभा सीट में आने वाली विधानसभा सीट में वोटिंग प्रतिशत से समझिए, कहां क्या बन रहे हैं समीकरण…
1. बाड़मेर में 5 विधानसभा सीटों पर बढ़ा मतदान, रविंद्र भाटी की शिव सीट पर कम वोटिंग
सबसे पहले बात बाड़मेर की करते हैं। यहां केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी के सामने आरएलपी से कांग्रेस में शामिल हुए उम्मेदाराम बेनीवाल के बीच निर्दलीय रविंद्र सिंह भाटी ने त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया। पिछले विधानसभा चुनाव में शिव सीट से भाजपा से टिकट नहीं मिलने से भाटी बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे थे और विधायक बने। भाटी की रैलियों में आई भीड़ ने सभी को चौंकाए रखा था।
2. जोधपुर की सभी विधानसभा सीट पर मतदान घटा
कांग्रेस की एक मात्र पूर्व सीएम अशोक गहलोत की सीट सरदारपुरा में विधानसभा चुनाव के मुकाबले लोकसभा में 1.65 फीसदी कम वोटिंग हुई। इस लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से नाराजगी जताने वाले विधायक बाबू सिंह राठौड़ की सीट शेरगढ़ में विधानसभा चुनाव के मुकाबले 15.12 फीसदी कम वोटिंग हुई।
3. जालाेर को छोड़कर सभी सीटों पर गिरा मतदान
इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के कारण ये सीट हॉट सीट मानी जा रही है। गहलोत और उनके पूरे परिवार ने वैभव के प्रचार में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। वैभव ने पिछला चुनाव जोधपुर सीट से लड़ा था। यहां भाजपा के लुंबाराम चौधरी से उनका मुकाबला था, सीट पर कांटे की टक्कर मानी जा रही है।
4. बांसवाड़ा में बीएपी के कब्जे वाली सीट पर बढ़ा मतदान
बांसवाड़ा सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले मामूली सा कम 0.13 फीसदी मतदान देखने को मिला। महेंद्रजीत सिंह मालवीया के कई बार विधायक रहने के कारण बागीदौरा सीट पर सभी की नजरें थीं। यहां वोटिंग विधानसभा चुनाव के मुकाबले 10.64 फीसदी कम हुई है।
5. कोटा ने चौंकाया, पिछले चुनाव से ज्यादा वोटिंग के कारण कड़ी टक्कर
कोटा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने कांग्रेस की टिकट पर खड़े हुए भाजपा के बागी नेता प्रहलाद गुंजल हैं। पहले दोनों के बीच दोस्ती चर्चित थी और अब चुनावी अदावत।
कड़ी टक्कर के कारण राजस्थान की हॉट मानी जाने वाली इस सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले 1.20 फीसदी ज्यादा मतदान देखने को मिला।
6. चित्तौड़गढ़ 8 में से 5 सीटों पर 4 फीसदी से ज्यादा गिरी वोटिंग
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी इस सीट से दूसरी बार ताल ठोक रहे हैं। इस कारण ये सीट चर्चा में है। इस सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले 4.08 फीसदी कम मतदान देखने को मिला।
विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट नहीं मिलने से चित्तौड़गढ़ सीट से निर्दलीय जीते भाजपा के बागी चंद्रभान सिंह आक्या की सीट पर विधानसभा चुनाव के मुकाबले 14.21 फीसदी कम वोटिंग हुई।
7. झालावाड़ में वसुंधरा की सीट पर 5 फीसदी से ज्यादा गिरा मतदान
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गढ़ इस सीट को माना जाता है। यहां से राजे के बेटे दुष्यंत सिंह 5वीं बार सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले वे लगातार 4 बार इसी सीट से जीते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा।
8. टोंक-सवाई माधोपुर में तीन सीटों पर 10 फीसदी से ज्यादा घटा मतदान
इस लोकसभा क्षेत्र को कांग्रेस के नजरिए से सचिन पायलट और भाजपा के नजरिए से कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के प्रभाव वाला माना जाता है। इस सीट पर गुर्जर और मीणा वोट बैंक अधिक है। भाजपा ने गुर्जर समाज के सुखबीर सिंह जौनापुरिया को फिर मौका दिया है और कांग्रेस ने मीणा समाज से विधायक हरीश मीना को उतार कर मुकाबले को रोचक बना दिया है।
9. राजसमंद की सभी 8 सीटों पर 4 फीसदी से ज्यादा कम मतदान
कांग्रेस प्रत्याशी की टिकट बदलने के कारण ये सीट चर्चा में रही। विधानसभा चुनाव में दीया कुमारी को टिकट देने के कारण ये सीट खाली हो गई थी। इस सीट से भाजपा ने उदयपुर के पूर्व राजघराने की सदस्य महिमा सिंह को उतारा है।
10. पाली में भाजपा की 3 और कांग्रेस के कब्जे वाली 2 सीटों पर 5 फीसदी से ज्यादा घटी वोटिंग
पाली सीट पर भाजपा की विधानसभा सीटें अधिक हैं। भाजपा से पीपी चौधरी और कांग्रेस से संगीता बेनीवाल लोकसभा उम्मीदवार हैं और ये सीट उन सीटों में शामिल हैं, जो इस लोकसभा चुनाव में कम चर्चा में रही है।
11. अजमेर में भाजपा के कब्जे वाली 3 सीटों पर 10 फीसदी से ज्यादा गिरा मतदान
इस सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया था। इस लोकसभा क्षेत्र में शामिल 8 विधानसभा सीटों में से 7 पर भाजपा जीती थीं। यहां से रामचंद्र चौधरी कांग्रेस और भागीरथ चाैधरी भाजपा से मैदान में है। ग्रामीण इलाकों वाली 3 सीटों पर 10 फीसदी से ज्यादा कम मतदान के कारण लड़ाई रोचक हो गई है।
12. भीलवाड़ा में पिछले चुनाव से 5 फीसदी कम वोटिंग
इस लोकसभा चुनाव में ये सीट भी टिकट बदलने के कारण चर्चा में रही। यहां से पहले भी सांसद रहे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। भाजपा ने दामोदर अग्रवाल को मैदान में उतारा है। हालांकि यहां भाजपा कंफर्टेबल पोजिशन में लग रही है।
13. उदयपुर में बीएपी के कब्जे वाली 2 सीटों पर भी घटी वोटिंग
इस सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले 5.79 फीसदी कम मतदान देखने को मिला। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने टेलर कन्हैया लाल हत्या कांड को मुद्दा बनाया था। इस लोकसभा क्षेत्र में शामिल 8 में से 5 बीजेपी के खाते में हैं। बीएपी के यहां से दो विधायक हैं।
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राजस्थान में पहले चरण की सभी 12 सीटों पर वोटिंग हो गई। मतदान 57.88 फीसदी हुआ। इन 12 सीटों की तुलना 2009, 2014 और 2019 से करें तो रोचक तस्वीर सामने आ रही है। 2009 में इन 12 सीटों पर वोटिंग प्रतिशत 48.12 रहा। 2014 में मतदान 13 फीसदी से अधिक बढ़कर 61.66 प्रतिशत पहुंच गया। साल 2019 में ये आंकड़ा थोड़ा और बढ़ कर 63.71 फीसदी तक चला गया। पढ़ें पूरी खबर
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